यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 12, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बिहारः शहाबुद्दीन के मामले पर राज्यपाल से मिले NDA नेता, कहा-सरकार फेल
राजग के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल डॉ.रामनाथ कोविंद से मुलाकात कर शहाबुद्दीन पर सीसीए लगाकर उन्हें तत्काल जेल में डालने की ...और पढ़ें

पटना [जागरण टीम ]। तेजाब कांड में सजायाफ्ता मो.शहाबुद्दीन की जमानत के विरोधस्वरूप और इसे राज्य की कानून व्यवस्था के लिए बड़ा मसला बताते हुए राजग के नेताओं ने सोमवार को राज्यपाल डा.रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। राज्यपाल से मिलने गए नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार फेल हो गई है। शहाबुद्दीन पर सीसीए लगाने के साथ मुकदमों की नियमित मानीटरिंग की भी मांग की गई।
राजग नेताओं ने राज्यपाल से कहा कि मो.शहाबुद्दीन पर कई संगीन मामले चल रहे हैं। जेल में रहते हुए वे सबूतों से लेकर गवाहों तक को प्रभावित करते रहे हैं। उनके बाहर आने से उनके खिलाफ चल रहे मामलों की सुनवाई प्रभावित होगी। नेताओं ने शहाबुद्दीन पर सीसीए लगाने की मांग करते हुए कहा कि यह काम तत्काल किया जाए ताकि बिहार के लोगों में सरकार के प्रति भरोसा पैदा हो। अभी भरोसे का संकट उत्पन्न हो गया है।
राजग नेताओं ने कहा कि सरकार मो.शहाबुद्दीन से जुड़े मामलों में पीड़ितों की सुरक्षा से लेकर गवाहों को भयमुक्त करने तक की व्यवस्था करे। नेताओं ने कहा कि पत्रकार हत्याकांड से लेकर तेजाब कांड तक से जुड़े मामले अधूरे हैं। एेसे में शहाबुद्दीन को बाहर रखा जाना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करेगा। हाइकोर्ट का नोटिस तीन साल तक तामिला नहीं होने के मामले की जांच की मांग भी की गई।
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प्रतिनिधिमंडल में भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी, डॉ.प्रेम कुमार, नंदकिशोर यादव, हम के प्रदेश अध्यक्ष वृशन पटेल, लोजपा सांसद वीणा देवी, रालोसपा सांसद रामकुमार शर्मा आदि शामिल थे। सबने एक स्वर में कहा कि शहाबुद्दीन का बाहर रहना राज्य में कानून व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। सरकार को तत्काल सीसीए लगाने की कार्रवाई करनी चाहिए।
बाद में प्रदेश भाजपा कार्यालय में संवाददाताओं से बातचीत में सुशील कुमार मोदी ने कहा कि सरकार शहाबुद्दीन के मसले पर फेल हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस मामले की जवाबदेही लेते हुए पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
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कहा कि तमाम मुकदमे लंबित पड़े हैं और इसका लाभ उठाकर शहाबुद्दीन बाहर आ गया। वकील प्रशांत भूषण का बयान पढ़ा। क्या बिहार सरकार इतनी अक्षम हो गई है कि किसी आदमी को व्यक्तिगत हैसियत से सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ेगा। इन मुकदमों की नियमित पर्यवेक्षण हो, मुकदमों के पर्यवेक्षण के लिए आइजी स्तर के एक अधिकारी के नेतृत्व में टीम बने। पत्रकार हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग भी उठाई।
