यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 12, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
तीन बेटों को तेजाब से नहलाया गया, अब हमारा भगवान ही मालिक : चंदा बाबू
तेजाब कांड में मोहम्मद शहाबुद्दीन की रिहाई के बाद इस कांड में अपने तीन बेटों को खो चुके चंदा बाबू ...और पढ़ें

पटना [वेब डेस्क]। तेजाब कांड एक बार फिर चंदा बाबू की आंखों में आंसू बन छलक पड़ा है। चंदा बाबू यानि चंद्रकेश्वर प्रसाद शहाबुद्दीन की रिहाई के बाद हताश हैं और अब उन्हें सरकार और कानून पर भरोसा नहीं है। चंदा बाबू ने कहा कि अब भगवान का भरोसा है अगर वो चाहेंगे तो हम सब जिंदा रहेंगे और नहीं तो अपने तीन बेटों की तरह हम भी मार डाले जाएंगे।
तेजाब से बेटा जला, अब दुख की आग में जल रहे चंदा बाबू
हत्या और शव को तेजाब से गला देने के जिस मामले में शहाबुद्दीन को जमानत मिली, उस पीडि़त परिवार के घर में भी सन्नाटा पसरा है। इस घर के तीन बेटे मारे गए। सिवान के गोशाला रोड स्थित पकड़ी मोड़ पर चंदा बाबू का आवास है।
रविवार को चंदा बाबू व उनकी पत्नी ने कहा है कि सरकार की लापरवाही के कारण पूर्व सांसद को बेल मिली है। मुझे अब यहां की व्यवस्था पर भरोसा नहीं रहा। तीन बेटों की हत्या के बाद अब हमारे दैनिक जीवन पर किसी खुशी व गम का कोई असर नहीं होता, क्योंकि हमारे जीवन में अब अंधेरा ही अंधेरा है। हमलोगों ने पूरे मामले को न्यायालय में भगवान के भरोसे छोड़ दिया है।
क्या था मामला
16 अगस्त 2004 को सिवान के व्यवसायी चंद्रकेश्वर उर्फ चंदा बाबू के दो बेटों सतीश राज (23) और गिरीश राज (18) को अपहरण के बाद तेजाब से नहला दिया गया था, जिसके बाद उनकी मौत हो गई थी। चश्मदीद गवाह चंदा बाबू के सबसे बड़े बेटे राजीव राजीव की भी हत्या कर दी गई। इसके ठीक तीन दिन बाद राजीव को इस मामले में गवाही के लिए कोर्ट में हाजिर होना था।
चंदा बाबू और उनकी पत्नी कलावती देवी अब अपने एकमात्र जीवित और विकलांग बेटे नीतीश (27) के सहारे अपनी बची हुई जिंदगी काट रहे हैं। सिवान की एक स्थानीय अदालत ने इस हत्याकांड में राजद के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन के अलावा तीन अन्य लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। पटना हाईकोर्ट ने हाल में शहाबुद्दीन को इसी मामले में जमानत दे दी है।
