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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 06, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

'PoK मिलते ही कश्मीर मसला हल हो जाएगा', जयशंकर बोले- हमारे हिस्से को वापस करे पाकिस्तान

By Agency Edited By: Jeet Kumar
Published: Thu, 06 Mar 2025 06:34 AM (IST)

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि पाकिस्तान के ...और पढ़ें

जयशंकर बोले- पीओके मिलने के बाद कश्मीर का मसला हल हो जाएगा (फोटो- एक्स)
जयशंकर बोले- पीओके मिलने के बाद कश्मीर का मसला हल हो जाएगा (फोटो- एक्स)

HighLights

  1. जयशंकर बोले- मुझे लगता है कि अनुच्छेद 370 को हटाना एक अच्छा कदम था
  2. जयशंकर बोले- पीओके मिलने के बाद कश्मीर का मसला हल हो जाएगा

एएनआई, लंदन। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इन दिनों ब्रिटेन दौरे पर हैं और लंदन में उन्होंने एक कार्यक्रम में ऐसी बात बोल दी है जिससे पाकिस्तान को मिर्ची जरूर लग सकती है। विदेश मंत्री से बुधवार को लंदन के एक स्वतंत्र नीति संस्थान चैथम हाउस में कश्मीर मुद्दे पर सवाल पूछा तो डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान के पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) को खाली करने से कश्मीर मुद्दा पूरी तरह से हल हो जाएगा।

जयशंकर बोले- पीओके मिलने के बाद कश्मीर का मसला हल हो जाएगा

आगे कहा कि कश्मीर में हमने इसके अधिकांश मुद्दों को हल करने में अच्छा काम किया है। मुझे लगता है कि अनुच्छेद 370 को हटाना एक कदम था। फिर, कश्मीर में विकास, आर्थिक गतिविधि और सामाजिक न्याय को बहाल करना दूसरा कदम था। चुनाव कराना, जिसमें बहुत अधिक मतदान हुआ, तीसरा कदम था। मुझे लगता है कि हम जिस हिस्से का इंतजार कर रहे हैं, वह कश्मीर के उस हिस्से की वापसी है, जो अवैध पाकिस्तानी कब्जे में है। जब यह हो जाएगा, तो मैं आपको आश्वासन देता हूं कि कश्मीर का मसला हल हो जाएगा।

सवाल यह था कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कश्मीर मुद्दे को हल करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने संबंधों का उपयोग कर सकते हैं।

इससे पहले दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज, नई दिल्ली के छात्रों के साथ बातचीत के दौरान, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा था कि पीओके के बारे में मैं बस इतना कह सकता हूं कि वहां एक संसद प्रस्ताव है, इस देश की हर राजनीतिक पार्टी यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि पीओके, जो भारत का हिस्सा है, भारत में वापस आ जाए। यह हमारी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता है।

चीन-भारत के बीच अनोखे रिश्ते

वहीं, भारत चीन के साथ किस तरह का रिश्ता चाहता है? सवाल पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि हमारे बीच बहुत ही अनोखे रिश्ते हैं। हम दुनिया के दो ऐसे देश हैं जिनकी आबादी एक अरब से ज़्यादा है। हम दोनों का इतिहास बहुत पुराना है, जिसमें समय के साथ उतार-चढ़ाव आए हैं।

दोनों देश ऊपर की ओर बढ़ रहे हैं

उन्होंने कहा कि आज, दोनों देश ऊपर की ओर बढ़ रहे हैं और हम सीधे पड़ोसी भी हैं। चुनौती यह है कि जैसे-जैसे कोई देश आगे बढ़ता है, दुनिया और उसके पड़ोसियों के साथ उसका संतुलन बदलता है। जब इस आकार, इतिहास, जटिलता और महत्व वाले दो देश समानांतर रूप से आगे बढ़ते हैं, तो वे अनिवार्य रूप से परस्पर क्रिया करते हैं।

जयशंकर ने कहा कि मुख्य मुद्दा यह है कि कैसे एक स्थिर संतुलन बनाया जाए और संतुलन के अगले चरण में संक्रमण किया जाए। हम एक स्थिर संबंध चाहते हैं जहाँ हमारे हितों का सम्मान किया जाए, हमारी संवेदनशीलता को पहचाना जाए और जहाँ यह हम दोनों के लिए काम करे। वास्तव में हमारे रिश्ते में यही मुख्य चुनौती है।

भारत के लिए, सीमा एक महत्वपूर्ण पहलू- जयशंकर

आगे बोले कि भारत के लिए, सीमा एक महत्वपूर्ण पहलू है। पिछले 40 वर्षों में, यह धारणा रही है कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता रिश्ते को बढ़ाने के लिए आवश्यक है। यदि सीमा अस्थिर है, शांतिपूर्ण नहीं है, या उसमें शांति का अभाव है, तो यह निश्चित रूप से हमारे संबंधों के विकास और दिशा को प्रभावित करेगा