लंदन, प्रेट्र। ब्रेक्जिट करार पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टेरीजा मे को एक बार फिर संसद में पराजय का सामना करना पड़ा। यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने की प्रक्रिया ब्रेक्जिट पर आगे की कार्यवाही को लेकर संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमंस में पेश सरकार के प्रस्ताव के खिलाफ 303 वोट पड़े, जबकि पक्ष में 258 वोट। हालांकि, इस प्रस्ताव का बहुत ज्यादा महत्व नहीं है, लेकिन इस हार से मे की स्थिति और कमजोर हुई है। अगले हफ्ते उन्हें यूरोपीय संघ के नेताओं से बातचीत करने के लिए ब्रुसेल्स जाना है।

सरकार की तरफ से पेश प्रस्ताव के पक्ष में 258 और विरोध में 303 वोट पड़े

यूरोपीय संघ से ब्रिटेन को अगले महीने की 29 तारीख को औपचारिक रूप से अलग होना है। लेकिन अभी तक अलगाव के बाद के संबंधों को लेकर दोनों पक्षों के बीच अभी तक कोई सहमति नहीं बन पाई है। यूरोपीय संघ और टेरीजा मे के बीच कई दौर की बातचीत के बाद ब्रेक्जिट करार तैयार किया गया था। लेकिन ब्रिटिश संसद ने उसे खारिज कर दिया था।

गुरुवार को पेश प्रस्ताव सांकेतिक था। इसके जरिए 29 जनवरी को सदन में पास दो प्रस्तावों के प्रति दोबारा भरोसा जताया गया था। इन दोनों प्रस्तावों में एक के जरिए उत्तरी आयरलैंड से जुड़े विवादित बैकस्टाप क्लाज के विकल्प की तलाश करने की बात कही गई थी। जबकि दूसरे के जरिए बिना किसी समझौते के अलगाव को रोकने के लिए अलग से प्रस्ताव तैयार करने की बात थी। लेकिन अब प्रस्ताव के गिरने के बाद से लगने लगा है कि ब्रिटेन को बिना किसी समझौते के ही अलग होना होगा। गुरुवार को हुए मतदान में मे की कंजरवेटिव पार्टी के ब्रेक्जिट समर्थक सांसदों ने भी भाग नहीं लिया।

ब्रेक्जिट करार में उत्तरी आयरलैंड और आयरलैंड की सीमा को लेकर बैकस्टाप क्लाज का विरोध हो रहा है। इसमें हार्ड बॉर्डर की बात है। लोगों को डर है कि अलगाव के बाद उत्तरी आयरलैंड की सीमा पर सख्ती से लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

प्रधानमंत्री मे अगले हफ्ते फिर यूरोपीय संघ के नेताओं से करेंगी बात

हालांकि, प्रधानमंत्री मे ने यकीन दिलाया है कि अलगाव की तारीख से पहले समझौता हो जाएगा। वह यूरोपीय संघ से कुछ और छूट लेने की कोशिशों में जुटी हैं। हालांकि, अभी तक उन्हें इसमें कोई सफलता हाथ नहीं लगी है।

 

Posted By: Bhupendra Singh