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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 12, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

महारानी द्वारा सम्मानित भारतीय शख्स को लंदन में करना पड़ रहा निर्वासन का सामना, समर्थन में आए लोग

By AgencyEdited By: Nidhi Avinash
Published: Sun, 12 Feb 2023 03:26 PM (IST)Updated: Sun, 12 Feb 2023 03:31 PM (IST)

महारानी एलिजाबेथ द्वितीय द्वारा सम्मानित एक भारतीय को ब्रिटेन में भारत निर्वासन का सामना करना पड़ रहा है। 42 वर्षीय ...और पढ़ें

महारानी द्वारा सम्मानित भारतीय शख्स को लंदन में करना पड़ रहा निर्वासन का सामना pic file: Twitter @Vimalpa95866836
महारानी द्वारा सम्मानित भारतीय शख्स को लंदन में करना पड़ रहा निर्वासन का सामना pic file: Twitter @Vimalpa95866836

लंदन, एजेंसी। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय द्वारा सम्मानित एक भारतीय को ब्रिटेन में भारत निर्वासन का सामना करना पड़ रहा है। 42 वर्षीय विमल पंड्या (Vimal Pandya)को कोविड-19 महामारी के दौरान 50 परिवारों को मुफ्त भोजन देने के लिए सम्मानित किया गया था।

कानूनी वीजा लड़ाई हार जाने के कारण अब उन्हें भारत निर्वासन का सामना करना पड़ रहा है। इसी को देखते हुए दक्षिण-पूर्व लंदन के एक निवासियों के समूह ने "प्रिय समुदाय के सदस्य" (beloved community member) के लिए लड़ने का शपथ लिया है।

स्टडी वीजा पर भारत से आए थे ब्रिटेन

समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक, विमल पंड्या वर्ष 2011 में स्टडी वीजा पर भारत से यूके आए थे, लेकिन तीन साल बाद यूके होम ऑफिस ने विदेशी छात्रों को प्रायोजित करने के उनके कॉलेज के अधिकार को रद्द कर दिया था।

दक्षिण लंदन के रॉदरहिथ में रहने वाले पांड्या ने तब से ब्रिटेन में 11 साल बिताए हैं। हाल ही में, वह आव्रजन न्यायाधिकरण में एक सुनवाई हार गए और अब बताया जा रहा है कि वह आगे की लड़ाई के लिए अपने वकीलों के साथ बातचीत कर रहे हैं।

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यूके के लोग पंड्या के समर्थन में आए सामने

स्थानीय समुदाय के साथ-साथ पूरे यूके के लोग पंड्या के समर्थन में सामने आए हैं। उनके समर्थन में सैकड़ों प्रदर्शन हुए हैं। बता दें कि उनके वीजा को बहाल करने के लिए एक ऑनलाइन याचिका पर 1,75,000 से अधिक हस्ताक्षर प्राप्त हुए हैं।

यूके बॉर्डर फोर्स के अधिकारियों ने उन्हें सूचित किया कि जिस कॉलेज में उनका नामांकन हुआ था, उसने प्रायोजन का अधिकार खो दिया था, लेकिन न तो कॉलेज और न ही गृह कार्यालय ने कथित तौर पर उन्हें इसकी सूचना दी थी। पंड्या के समर्थन में कई याचिकाएं दायर की गईं।

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