लाहौर, पीटीआइ। पाकिस्‍तान की एक आतंकवाद निरोधी अदालत (Terror Financing Case) ने मुंबई हमले के साजिशकर्ता और प्रतिबंधित आतंकी संगठन जमात-उद-दावा (Jamat-ud Dawah, JuD) के प्रमुख हाफि‍ज सईद (Hafiz Saeed) के दो सहयोगियों को टेरर फंडिंग मामले में 15-15 साल से अधिक कैद की सजा सुनाई है। सजा पाए आतंकियों में जमाद-उद-दावा का प्रवक्ता याहया मुजाहिद (Yahya Mujahid) भी शामिल है। लाहौर स्थित आतंकवाद निरोधक अदालत (Anti Terrorism Court ) ने हाफि‍ज के बहनोई अब्दुल रहमान मक्की को भी छह महीने कैद की सजा सुनाई है।

अदालत (Anti Terrorism Court ) ने मक्की (Abdul Rehman Makki) को मंगलवार का यह सजा सुनाई। अदालत के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआइ को बताया कि आतंकवाद निरोधी अदालत के जज अरशद हुसैन भुट्टा (Arshad Hussain Bhutta) ने याहिया मुजाहिद और जफर इकबाल (Zafar Iqbal) में प्रत्‍येक को 15 साल छह महीने की कैद और अब्दुल रहमान मक्की को पंजाब पुलिस के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट की ओर से दर्ज किए गए एक मामले में छह महीने की जेल की सजा सुनाई। इससे पहले भी अदालत मुजाहिद को तीन टेरर फंडिंग मामलों में 47 साल कैद की सजा सुना चुकी है।

इसी तरह जफर इकबाल (Zafar Iqbal) को भी तीन ऐसे ही मामलों में 26 साल कैद की सजा सुनाई गई थी। इन फैसलों से जाहिर है कि मुजाहिद और इकबाल दोनों 15 साल तक जेल में रहेंगे। उनकी सजाएं समानांतर चलती रहेंगी। अधिकारियों के मुताबिक, जज अरशद हुसैन भुट्टा (Arshad Hussain Bhutta) जब सजा का एलान कर रहे थे तब तीनों आतंकी अदालत में मौजूद थे। इस दौरान सुरक्षा के पुख्‍ता इंतजाम किए गए थे। पिछले हफ्ते मुंबई हमले के मास्‍टरमाइंड और लश्‍कर-ए-तैयबा प्रमुख जकीउर रहमान लखवी को 15 साल कैद की सजा सुनाई गई थी। 

उल्‍लेखनीय है कि फरवरी 2021 में एफएटीएफ की बैठक होनी है। फाइंनेशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल रखा है। बीते दिनों भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता अनुराग श्रीवास्‍तव ने कहा था कि पाकिस्‍तान एफएटीएफ की बैठक को देखते हुए दिखावे की कार्रवाईयां कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चाहिए कि वह आतंकवाद के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराए ताकि आतंकी समूहों के खिलाफ ठोस और निर्णायक कार्रवाई हो सके।

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