Pakistan: गिलगित-बाल्टिस्तान के स्कर्दू में लगातार बिजली कटौती के खिलाफ AAC का विरोध प्रदर्शन
गिलगित-बाल्टिस्तान अवामी एक्शन कमेटी (एएसी) ने स्कर्दू शहर में विरोध प्रदर्शन किया क्योंकि क्षेत्र में बिजली कटौती एक नियमित मामला बन गया है। अवामी एक्शन कमेटी (एएसी) बाल्टिस्तान जम्मू कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (जेकेपीएनपी) से जुड़ा एक सार्वजनिक मंच है। एएसी की तरफ से क्षेत्र में बार-बार बिजली कटौती के खिलाफ 15 जुलाई को प्रदर्शन किया गया और बिजली परियोजनाओं पर काम के निलंबन का मुद्दा उठाया गया।
स्कर्दू (गिलगित-बाल्टिस्तान), एएनआई। गिलगित-बाल्टिस्तान अवामी एक्शन कमेटी (एएसी) ने स्कर्दू शहर में विरोध प्रदर्शन किया, क्योंकि क्षेत्र में बिजली कटौती एक नियमित मामला बन गया है। अवामी एक्शन कमेटी (एएसी), बाल्टिस्तान जम्मू कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (जेकेपीएनपी) से जुड़ा एक सार्वजनिक मंच है। एएसी की तरफ से क्षेत्र में बार-बार बिजली कटौती के खिलाफ 15 जुलाई को प्रदर्शन किया गया और ग्वाडी, हार्पो और शहर थांग बिजली परियोजनाओं पर काम के निलंबन का मुद्दा उठाया गया।
तीन परियोजनाओं को लेकर विरोध प्रदर्शन
स्कर्दू क्षेत्र में लोड शेडिंग को समाप्त करने के लिए, ऊपर बताए गए तीन बिजली परियोजनाओं पर काम फिर से शुरू करने के अनुरोध के साथ सैकड़ों स्थानीय लोगों ने बैनर लेकर प्रदर्शन में भाग लिया। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए एएसी, बाल्टिस्तान के अध्यक्ष नजफ अली ने स्कर्दू में बिजली परियोजनाओं पर निर्माण रोकने के लिए प्रशासन की आलोचना की और आरोप लगाया कि उसने इस क्षेत्र और इसके लोगों की उपेक्षा की है।
योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार
नजफ अली ने गिलगित-बाल्टिस्तान की सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों पर बिजली परियोजनाओं के निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि अब तक इन बिजली परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन एक भी ईंट नहीं रखी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि न्यायपालिका राजनीतिक आकाओं के अधीन व्यवहार कर रही है और लोगों की दुर्दशा को नजरअंदाज करते हुए केवल भ्रष्ट राजनेताओं की मदद करने के लिए हेरफेर किए गए जनादेश पारित कर रही है।
PoK और PoGB दोनों के लोग भूख से मर रहे हैं और बिजली की अनुपलब्धता के कारण व्यवसाय दिवालिया हो रहे हैं। हज़ारों लोगों ने अपनी नौकरियां खो दी हैं, क्योंकि व्यवसाय और छोटी औद्योगिक कार्यशालाएं परिस्थितियों के कारण बंद होने पर मजबूर हो गई हैं।
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