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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 04, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

'ऑपरेशन सिंदूर में सोफिया कुरैशी ही...', UN में बिलावल भुट्टो की बेइज्जती; पत्रकार ने बोलती बंद कर दी

Published: Wed, 04 Jun 2025 03:48 PM (IST)Updated: Wed, 04 Jun 2025 03:54 PM (IST)

पाकिस्तान के पूर्व मंत्री बिलावल भुट्टो संयुक्त राष्ट्र में एक पत्रकार के सवाल से हैरान रह गए। पत्रकार ने बिलावल ...और पढ़ें

UN में बिलावल भुट्टो के झूठ की खुली पोल (फोटो-एएनआई)
UN में बिलावल भुट्टो के झूठ की खुली पोल (फोटो-एएनआई)

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तान के पूर्व मंत्री बिलावल भुट्टो संयुक्त राष्ट्र मीडिया वार्ता में एक पत्रकार के सवाल से हैरान रह गए। दरअसल पाकिस्तानी नेता बिलावल भुट्टो जरदारी के झूठ को एक पत्रकार ने मौके पर ही पकड़ लिया। पाकिस्तानी नेता ने आरोप लगाया कि पहलगाम आतंकी हमले का इस्तेमाल भारत में मुसलमानों को बदनाम करने के लिए एक राजनीतिक साजिश के रूप में किया जा रहा है।'

बिलावल भुट्टो ने कहा है, 

आतंकी हमले को भारत सरकार राजनीतिक रूप से इस्तेमाल कर रही है।इस पर एक पत्रकार अहमद फथी ने कहा, आप कह रहे हैं मुसलमानों को बदनाम करने के ये सब किया जा रहा है, लेकिन भारतीय सेना की ब्रीफिंग्स में खुद मुस्लिम भारतीय सैन्य अधिकारी शामिल थे।

'सोफिया कुरैशी ने ऑपरेशन सिंदूर पर ब्रीफिंग की और आप...'

पत्रकार ने कर्नल सोफिया कुरैशी के संदर्भ में ये बात कही है। भुट्टो के पास इसका कोई जवाब नहीं था और वे भारत के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाने लगे। पत्रकार ने आगे कहा, कर्नल सोफिया कुरैशी ने ऑपरेशन सिंदूर पर पूरी ब्रीफिंग की और देश के लिए प्रेरणा बनकर उभरीं।

'कश्मीर मुद्दे पर UN से नहीं मिली कोई मदद'

भुट्टो ने जवाब दिया, 'ठीक है, जहां तक ऑपरेशन का सवाल है, आप बिल्कुल सही हैं। इस पर अहमद फती ने जवाब दिया, ठीक है। इससे पहले कि वह अगला सवाल पूछ पाते, भुट्टो ने बीच में टोक दिया और कुछ देर तक भारत के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाते रहे। लेकिन पत्रकार ने अपनी बात कह दी थी।

संयुक्त राष्ट्र प्रेस वार्ता के दौरान बिलावल भुट्टो ने यह भी माना कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दे को उठाने के इस्लामाबाद के प्रयासों को बाधाओं का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा, 'जहां तक ​​संयुक्त राष्ट्र के अंदर और सामान्य तौर पर कश्मीर मुद्दे का सवाल है, हमें जिन बाधाओं का सामना करना पड़ता है, वे अभी भी मौजूद हैं।

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