पेरिस, रॉयटर्स। संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एजेंसी, फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (FAO) ने दुनिया भर में खाद्य सामग्री को आयात करने पर आने वाला खर्च, रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ने की आशंका जाहिर की है। इससे बहुत से गरीब देशों पर दबाव बढ़ेगा, जिनकी अर्थव्यवस्था पहले ही कोविड-19 के चलते बरबाद हो गई है। साथ ही ये भी बताया कि, बढ़ी हुई कीमतें काफी वक्त तक रह सकती हैं। क्योंकि पैट्रोलियम के बढ़े हुए दामों से किसानों की लागत भी ज्यादा आ रही है।

एफएओ के व्यापार और बाजार विभाग के उप निदेशक जोसेफ श्मिडहुबर ने रॉयटर्स को बताया, समस्या यह नहीं है कि दुनिया बढ़ी हुई कीमतों का सामना कर रही है। मुद्दा कमजोर देशों का है।

दुनिया में कुपोषित लोगों की बढ़ती संख्या को लेकर जारी की गई चेतावनी

एफएओ ने अपनी द्वि वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि शिपिंग लागत सहित दुनिया का खाद्य आयात खर्च इस साल 1.715 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। जो 2020 में 1.530 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े से 12 फीसद ज्यादा है। अंतर्राष्ट्रीय सहायता संगठनों ने पहले ही दुनिया में कुपोषित लोगों की बढ़ती संख्या को लेकर चेतावनी जारी कर दी है। संगठन के मुताबिक महामारी के कारण यमन और नाइजीरिया जैसे देशों में खाद्य असुरक्षा बढ़ गई है। वहीं एफएओ का मासिक खाद्य मूल्य सूचकांक मई में 10 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया। जो अनाज, वनस्पति तेल और चीनी की कीमतों में तेजी के दिखाता है।

पिछले खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी के स्तर को किया पार

एफएओ के मुताबिक खाद्य आयात की लागत का एक अलग सूचकांक है। उसमें माल ढुलाई की लागत भी शामिल है, वो भी इस साल मार्च में एक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। जो की 2006-2008 और 2010-2012 में पिछले खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी के स्तर को भी पार कर गया है।

एफएओ ने पूर्वानुमान लगाया है की आगामी 2021-22 में चाइना के मक्के का आयात बढ़कर 24 मिलियन टन हो जाएगा। इसका मतलब यह होगा कि चीन 2020-21 में अपने मक्का आयात को चौगुना करके 22 मिलियन टन करने की उम्मीद कर रहा है, जो दुनिया में अनाज का शीर्ष आयातक बना रहेगा।

एफएओ ने कहा कि चीनी पोर्क उत्पादन में सुधार से वैश्विक व्यापार में कमी आने की उम्मीद है, लेकिन इस साल बीफ और पोल्ट्री की मांग में बढ़ोतरी से मीट का व्यापार स्थिर बना हुआ है।

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