बांग्लादेश में बेहद जोखिम भरा होगा आगामी चुनाव, आयोग ने चुनौतियों को लेकर किया आगाह
बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने शुक्रवार को कहा कि अगले साल फरवरी में होने वाला चुनाव देश में अबतक का सबसे जोखिम भरा चुनाव होगा। उन्होंने अधिकारियों से राजनीतिक अनिश्चितता और सामाजिक अशांति के बीच अप्रत्याशित चुनौतियों के लिए तैयार रहने का आग्रह किया। यह टिप्पणी चुनाव के लिए एक रोडमैप जारी करने के एक दिन बाद आई है।

पीटीआई, ढाका। बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने शुक्रवार को कहा कि अगले साल फरवरी में होने वाला चुनाव देश में अबतक का सबसे जोखिम भरा चुनाव होगा। उन्होंने अधिकारियों से राजनीतिक अनिश्चितता और सामाजिक अशांति के बीच अप्रत्याशित चुनौतियों के लिए तैयार रहने का आग्रह किया।
यह टिप्पणी चुनाव के लिए एक रोडमैप जारी करने के एक दिन बाद आई है। चुनाव आयुक्त एम अनवारुल इस्लाम सरकार ने चुनाव अधिकारियों के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) एएमएम नासिर उद्दीन भी शामिल हुए।
उन्होंने कहा, ''हमें उन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिनके बारे में हमें अब तक पता नहीं है।'' उन्होंने कहा कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा मतदान की तारीख से कम से कम 60 दिन पहले की जाएगी।
बांग्लादेश में आतंकवाद के आरोप में जेल भेजे गए मुक्ति संग्राम सेनानी
बांग्लादेश की एक अदालत ने 1971 के मुक्ति संग्राम के कई सेनानियों समेत 16 लोगों को आतंकवाद रोधी कानून के तहत जेल भेज दिया है। यह फैसला उस घटना के एक दिन बाद आया, जब भीड़ ने राजधानी ढाका में उनकी सार्वजनिक बैठक को बाधित किया था।
स्थानीय मीडिया के अनुसार, मजिस्ट्रेट फरजान हक ने शुक्रवार को उनको जेल भेजने का आदेश दिया। इन लोगों को हिरासत में लिए जाने के 24 घंटे बाद कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस ने शुरुआत में इन्हें भीड़ से बचाने के लिए हिरासत में लिया था। हालांकि गुरुवार देर रात ढाका पुलिस ने बताया कि हिरासत में लिए गए लोगों पर आतंकवाद रोधी कानून के तहत आरोप लगाए गए हैं।
आक्रोशित लोगों की भीड़ ने उत्पात मचाया
अदालत में दाखिल दस्तावेज के अनुसार, पकड़े गए 16 लोगों में छह की उम्र 70 वर्ष से अधिक है। इनमें कुछ प्रोफेसर और पत्रकार भी हैं। इससे पहले गुरुवार को मुक्ति संग्राम सेनानियों की बैठक में आक्रोशित लोगों की भीड़ ने उत्पात मचाया। उपद्रवियों ने यह आरोप लगाया कि बैठक कर रहे लोग शेख हसीना के फासीवादी शासन के सहयोगी रहे हैं।
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