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    Taiwan: कट्टर चीन विरोधी लाई चिंग ते ने दर्ज की ऐतिहासिक जीत, लगातार तीसरी बार सत्ता में काबिज होने के लिए DPP तैयार

    By Agency Edited By: Anurag Gupta
    Updated: Sat, 13 Jan 2024 07:27 PM (IST)

    चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच ताइवान की सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (DPP) के उम्मीदवार लाई चिंग ते ने शनिवार को राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की। इसी के साथ ही वह ताइवान के अगले राष्ट्रपति बनने के लिए तैयार हैं। हालांकि लाई चिंग ते की जीत के बाद ताइवान और चीन के बीच तनाव बढ़ने की संभावना है।

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    लाई चिंग ते ने दर्ज की ऐतिहासिक जीत (फोटो: एएफपी/एपी)

    एपी/एएनआई, ताइपे। चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच ताइवान की सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (DPP) के उम्मीदवार लाई चिंग ते ने शनिवार को राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की। इसी के साथ ही वह ताइवान के अगले राष्ट्रपति बनने के लिए तैयार हैं।

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    बकौल रिपोर्ट, 2016 से ताइवान की सत्ता में डीपीपी काबिज है और पार्टी ने लगातार तीसरी ऐतिहासिक जीत हासिल की। केंद्रीय चुनाव आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय समयानुसार शाम सात बजकर 45 मिनट तक 90 फीसद से अधिक मतदान केंद्रों की गिनती में लाई चिंग ते को 50 लाख से अधिक वोट मिले। साथ ही 40 फीसद से ज्यादा वोट शेयर भी प्राप्त हुआ।

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    चीन के साथ बढ़ सकता है तनाव

    चीन में ताइवान के राष्ट्रपति चुनाव को युद्ध और शांति के बीच एक विकल्प बताया था। दरअसल, बीजिंग डीपीपी और डीपीपी सदस्य लाई चिंग ते का कड़ा विरोध करता है। हाल ही में चीन के ताइवान मामलों के कार्यालय ने गुरुवार को लाई चिंग ते को जिद्दी करार दिया था। ऐसे में लाई चिंग ते की जीत के बाद ताइवान और चीन के बीच तनाव बढ़ने की संभावना है। 

    बता दें कि लाई चिंग ते और निवर्तमान राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने ताइवान पर चीन के दावे को खारिज किया था। हालांकि, वह बीजिंग के साथ बातचीत की पेशकश भी कर चुके हैं, लेकिन बीजिंग ने इससे इनकार कर दिया था। माना जाता है कि चीन ताइवान की विपक्षी पार्टी कुओमिन्तांग (KMT) के उम्मीदवार का समर्थन करता है।

    इस चुनाव में चीन से तनाव के अलावा किफायती आवास की कमी और स्थिर मजदूरी जैसे घरेलू मुद्दे भी हावी रहे हैं।

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    बकौल रिपोर्ट, मतदान करने वालों में शामिल 43 वर्षीय स्टेसी चेन ने कहा कि उन्होंने हमेशा डीपीपी को ही वोट दिया है, क्योंकि ताइवान एक स्वतंत्र देश है। साथ ही वह चाहती हैं कि उनका बेटा चीन से अलग किसी अन्य देश में बड़ा हो। वहीं, 44 वर्षीय बेन वांग का मानना है कि ताइवान के किसी भी कदम से चीन के संभावित हमले से नहीं बचा जा सकता है।