कोलंबो, रायटर्स। श्रीलंका के राष्‍ट्रपति पद के लिए अग्रणी उम्‍मीदवार गोताबाया राजपक्षे यदि 16 नवंबर को चुनाव में जीत जाते हैं तो वे चीन के साथ देश के संबंधों को बहाल करेंगे। यह जानकारी उनके सलाहकार ने दी।

सिरीसेना का चीन पर आरोप

जनवरी 2015 में चुनाव जीतने के बाद शुरुआत में राष्‍ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने सभी चीनी निवेश की परियोजनाओं को निरस्‍त कर दिया था। उन्‍होंने चीन पर भ्रष्‍टाचार, अधिक कीमत व सरकार की प्रक्रिया का उल्‍लंघन का आरोप लगाया था। इसके एक साल बाद उन्‍होंने कुछ बदलाव के साथ चीनी परियोजनाओं को फिर से बहाल कर दिया। लेकिन तब से दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंध अभी भी जारी है। 

चीन के हिमायती थे पूर्व राष्‍ट्रपति महिंदा राजपक्षे

विपक्ष के उम्‍मीदवार राजपक्षे पूर्व रक्षा सचिव और चीन समर्थक पूर्व राष्‍ट्रपति महिंदा राजपक्षे के भाई हैं। महिंदा राजपक्षे भी चीन के साथ संबंधों को बहाल करने के लिए तैयार थे। कोलंबो में पालिता कोहोना ने कहा, ‘अब हमें चीन अलग तरीके से देख रहा है। जब गोताबाया राष्‍ट्रपति बनेंगे वे सही रिकॉर्ड बनाएंगे और पहले की तरह चीन के साथ संबंधों को बहाल करेंगे।’

लोटस टावर को लेकर चीन पर भ्रष्‍टाचार के आरोप

इस सप्‍ताह श्रीलंका के राष्‍ट्रपति सिरीसेना ने दक्षिण एशिया के सबसे लंबे टावर, लोटस टावर को बनाने वाली चीनी कंपनी पर भ्रष्‍टाचार का आरोप लगाया था जिसके बाद राजनीतिक हंगामा शुरू हो गया। श्रीलंकाई संसदीय पैनल ने कहा कि मामले की जांच करेगी। इस आरोप पर न तो कोलंबो स्‍थित चीनी दूतावास और न ही कंपनी की ओर से कोई कमेंट किया गया है। हालांकि चीन की ओर से श्रीलंका में बनाए गए इस बिल्‍डिंग में किसी तरह के भ्रष्‍टाचार की घटना से इंकार किया जाता रहा है।

लोटस टावर पर 100 करोड़ रुपये का खर्च

चीन द्वारा श्रीलंका में बनाए गए लोटस टावर पर करीब 100 करोड़ रुपये का खर्च आया है। अभी टावर का निर्माण कार्य जारी हे। हालांकि इसका उद्घाटन कर जनता के लिए खोल दिया गया है। 30,600 वर्ग मीटर में बने इस टावर में एक होटल, टेलिकम्‍युनिकेशन म्‍यूजियम, ऑडिटोरियम, ऑब्‍जर्वेशन टावर, मॉल भी हैं। बता दें कि इसमें 80 फीसद धनराशि चीन की ओर से दिया गया है। 

नंवबर में होने वाले चुनाव के लिए राजपक्षे को प्रबल दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है। क्‍योंकि वे श्रीलंका के सिंहला बौद्ध बहुल समुदाय में काफी लोकप्रिय हैं। 2009 में 26 साल की लड़ाई को खत्‍म करने में उन्‍होंने सफलता हासिल की।  

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Posted By: Monika Minal

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