Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    असांजे की स्वदेश वापसी को लेकर आस्ट्रेलियाई संसद में प्रस्ताव पास, अमेरिका और ब्रिटेन पर बना दबाव

    विकीलीक्स संस्थापक जूलियन असांजे की स्वदेश वापसी के पक्ष में आस्ट्रेलियाई संसद में एक प्रस्ताव पारित हुआ है। आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने गुरुवार को कहा कि उन्हें असांजे के मुकदमे के सौहादपूर्ण अंत की उम्मीद है क्योंकि सांसदों ने आस्ट्रेलियाई नागरिक को अपने घर लौटने की अनुमति देने के लिए एक प्रस्ताव पारित करके अमेरिका और ब्रिटेन पर दबाव बढ़ाया है।

    By Jagran News Edited By: Versha Singh Updated: Thu, 15 Feb 2024 04:30 PM (IST)
    Hero Image
    असांजे की स्वदेश वापसी को लेकर आस्ट्रेलियाई संसद में प्रस्ताव पास

    एपी, मेलबर्न। विकीलीक्स संस्थापक जूलियन असांजे की स्वदेश वापसी के पक्ष में आस्ट्रेलियाई संसद में एक प्रस्ताव पारित हुआ है। आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने गुरुवार को कहा कि उन्हें असांजे के मुकदमे के सौहादपूर्ण अंत की उम्मीद है, क्योंकि सांसदों ने आस्ट्रेलियाई नागरिक को अपने घर लौटने की अनुमति देने के लिए एक प्रस्ताव पारित करके अमेरिका और ब्रिटेन पर दबाव बढ़ाया है।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    जूलियन असांजे पर अपनी वेबसाइट के जरिए अमेरिका की गोपनीय जानकारी लीक करने का आरोप है। पिछले साल आस्ट्रेलिया की यात्रा के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने इसे गंभीर अपराध बताया था।

    दरअसल, ब्रिटेन की हाई कोर्ट अमेरिकी प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील पर सुनवाई करने वाली है। इससे पहले आस्ट्रेलिया ने विकीलीक्स के पक्ष में प्रस्ताव पास कर दबाव बनाने की कोशिश की है।

    आस्ट्रेलियाई पीएम ने कहा कि चाहे लोग कहीं भी खड़े हों यह चीज अनिश्चत काल तक नहीं चल सकती। बुधवार को प्रतिनिधि सभा में असांजे के समर्थन में एक प्रस्ताव लाने के लिए निर्दलीय सांसद एंड्यू विल्की को उन्होंने बधाई दी।

    प्रस्ताव के पक्ष में मत देने वाले 86 सांसदों में अल्बनीज भी शामिल थे, विरोध में 42 मत पड़े। प्रस्ताव में अमेरिका और ब्रिटेन से अपील की गई है कि अब असांजे को आस्ट्रेलिया में वापस आने दिया जाए जिससे वह अपने परिवार से मिल सकें।

    असांजे इस समय लंदन की बेलमार्श जेल में बंद हैं। इससे पहले वह स्वीडन में प्रत्यर्पण से बचने के लिए वह सात साल तक लंदन में इक्वाडोर के दूतावास में बिता चुके हैं।

    यह भी पढ़ें- Electoral Bond: इलेक्टोरल बॉन्ड पर देश में कब क्या हुआ? यहां समझिए चुनावी बॉन्ड की पूरी क्रोनोलॉजी

    यह भी पढ़ें- Sandeshkhali Violence: संदेशखाली में क्यों शुरू हुआ बवाल, जानिए ED के एक्शन के बाद से अब तक क्या-क्या हुआ