नई दिल्‍ली जागरण स्‍पेशल। पीएम नरेंद्र मोदी को अपना प्‍यारा दोस्‍त बताने वाले बेन्‍जामिन नेतन्‍याहू (Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu) इन दिनों मुश्किलों से घिरे हुए हैं। इसकी वजह उन पर तय आपराधिक मामले हैं। भ्रष्टाचार के तीन मामलों में कोर्ट ने उन पर आरोप तय कर दिए हैं। आपको यहांं पर ये भी बता दें कि वो देश के ऐसे पहले प्रधानमंत्री भी हैं जिन्‍हें पद पर रहते हुए इस तरह के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा वह इजरायल में पीएम के पद पर सबसे लंबे समय तक रहने वाले नेता भी हैं। इसके अलावा देश के इतिहास में यह भी पहली बार हो रहा है कि किसी अंतरिम प्रधानमंत्री के खिलाफ कोर्ट ने आरोप तय किए हैं। भारत के संदर्भ में यदि बात की जाए तो उनके प्रधानमंत्री रहते हुए ही दोनों देशों के बीच संबंध काफी मजबूत हुए हैं। भारत ने इजरायल से रक्षा के क्षेत्र में काफी बढ़ चढ़कर हिस्‍सा लिया है।

खास थी पीएम मोदी की इजरायल यात्रा

वर्ष 2017 में जब पीएम नरेंद्र मोदी ने इजरायल के साथ कूटनीतिक संबंधों के 25 वर्ष पूरा होने के मौके पर वहां की यात्रा की थी, तब नेतन्‍याहू ने सभी प्रोटोकोल को नजरअंदाज करते हुए उन्‍हें एयरपोर्ट पर रिसीव किया था। इस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने जो आधिकारिक भाषण दिए उनमें नेतन्‍याहू ने पीएम मोदी को कई बार 'प्‍यारा दोस्‍त' कहकर संबोधित किया। वहीं पीएम मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत हिब्रू भाषा के शब्‍द 'श्‍लोम' कहकर की थी। इसके अलावा नेतन्‍याहू ने इस दौरान जो ट्वीट किया उसमें भी हिंदी में लिखा था 'स्‍वागत है मेरे दोस्‍त'।

गहरी है दोस्‍ती 

यह इन दो नेताओं की दोस्‍ती को दर्शाता है। दोनों के बीच ये दोस्‍ती केवल पीएम मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान ही नहीं दिखाई दी बल्कि जब पीएम मोदी ने लोकसभा चुनाव में दोबारा रिकॉर्ड जीत दर्ज की तब भी नेतन्‍याहू ने उन्‍हें अपने ही अंदाज में बधाई दी थी। इसके अलावा 73वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर फ्रेंडशिप डे पर भी नेतन्‍याहू ने एक विडियो ट्वीट कर कहा था कि 'मेरे दोस्त प्रधानमंत्री मोदी' व भारत के लोगों को शुभकामनाएं। इस पोस्ट में ये लाइन हिंदी में लिखी थी। इसके जवाब में पीएम मोदी ने उन्‍हें धन्‍यवाद दिया था। बहरहाल, भारत का अब यही दोस्‍त कानून के कसते शिकंजे से कुछ मुश्किल में है। कुछ दिन पहले ही कोर्ट ने तीन अलग-अलग आपराधिक मामलों में उन पर जालसाजी, रिश्वतखोरी और विश्वासघात के आरोप तय किए हैं। अब उन्‍हें मुकदमों का सामना करना पड़ सकता है। कोर्ट में दायर इन मुकदमों को स्टेट ऑफ इजरायल बनाम बेन्‍जामिन नेतन्‍याहू दिया है।

अंतरिम पीएम है नेतन्‍याहू

आपको बता दें कि कुछ माह पहले ही इजरायल में चुनाव हुए थे। इन चुनावों में किसी पार्टी को बहुमत हासिल नहीं हो सका, लिहाजा फिलहाल देश की राजनीतिक स्थिति खराब है और ये हिचकोले खाती हुई दिखाई दे रही है। माना ये भी जा रहा है इजरायल में एक बार फिर से चुनाव हो सकते हैं। फिलहाल नेतन्‍याहू अंतरिम पीएम है।  नेतन्‍याहू के लिए तब तक परेशानी कुछ कम है जब तक वहां पर कोई सरकार नहीं बन जाती। जब भी नई सरकार बनेगी तो सरकार के तहत गठित संसदीय समिति उनके भविष्‍य को तय कर देगी। दरअसल, कोर्ट के आरोप तय करने के बाद नेतन्‍याहू संसदीय समिति के सामने अर्जी लगातार ट्रायल से छूट की मांग कर सकते हैं। लेकिन क्‍योंकि अभी देश में कोई सरकार नहीं है लिहाजा यह समिति भी गठित नहीं हुई है। इस समिति के गठित होने के बाद यह तय होगा कि वह ट्रायल का सामना करेंगे या नहीं। लिहाजा अगली सरकार बनने तक उनकी पीएम की कुर्सी को सलामत माना जा रहा है। 

चुनाव से लंबित हो गया मामला

पहले चुनाव और सरकार बनाने की कवायद के बीच इन मामलों में आरोप तय होना कुछ लंबित जरूर हो गया था। कोर्ट द्वारा पीएम नेतन्‍याहू के खिलाफ आरोप तय करने के बाद अटॉर्नी जनरल अविचाई मैंडलब्लिट ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। उनका कहना है कि ये सब कुछ नेतन्‍याहू सरकार को अस्थिर करने और उन्‍हें पद से हटाने की साजिश का एक हिस्‍सा है। कोर्ट के रुख के बाद विपक्षी पार्टियों ने नेतन्याहू से पद छोड़ने की मांग तक कर डाली है। 

तीन वर्षों से चल रही थी मामले की जांच

नेतन्‍याहू के खिलाफ जिन तीन मामलों में आरोप तय किए गए हैं उनकी जांच बीते तीन वर्षों से चल रही थी। इन मामलों में आरोपों को तय करने की कार्यवाही इजरायल में हुए चुनाव से पहले ही शुरू हो गई थी। वर्ष 2018 में दायर की गई दो पुलिस रिपोट्स में नेतन्‍याहू पर आरोप तय करने की बात कही गई थी। इसके अलावा एक अन्‍य मामले में नेतन्‍याहू और उनकी पत्‍नी पर फिल्म प्रोड्यूसर अर्नन मिल्शेन और ऑस्ट्रेलियाई व्यापारी जेम्स पैकर से महंगे गिफ्ट के बदले उनकी राजनीतिक मदद करने का आरोप है। यह गिफ्ट करीब 2,80,000 डॉलर के थे, जिसको कोर्ट के समक्ष नेतन्‍याहू ने स्‍वीकार तो किया लेकिन इन्‍हें सामान्‍य गिफ्ट बताया था। इसके अलावा उन पर 2015 के चुनाव के दौरान इजरायल के अखबार से अपने पक्ष में मीडिया कवरेज कराने का आरोप है। इसके ऐवज में उसके प्रतियोगी अखबारों को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। 

ये है आरोप

एक मामले में उनपर रिश्वतखोरी, जालसाजी और विश्वासघात का आरोप लगाया है। यह मामला इजरायल की बेसेक टेलीकॉम से 2012 से 2017 के बीच अपना प्रचार करने के लिए गुप्त समझौता करने का आरोप है। आरोप है कि इसके लिए उन्‍होंने कंपनी की 50 करोड़ डॉलर की मदद दी थी। इस मामले में नेतन्‍याहू का कहना है कि उन्‍होंने कुछ गलत नहीं किया है। इस मामले का खुलासा एक इजरायली अखबार ने ही किया था। कोर्ट द्वारा तय किए गए आरोपों से बचने के लिए नेतन्‍याहू इजरायली संसद के सामने अर्जी दे सकते हैं। लेकिन फिलहाल संसदीय समिति नहीं बनी हुई है। 

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Posted By: Kamal Verma

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