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    छोटा फ्लैट, इकोनॉमी क्लास में सफर... यूरोप की लोकतांत्रिक लड़ाई का चेहरा बनीं इस देश की राष्ट्रपति

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 06:34 PM (IST)

    मोल्दोवा की राष्ट्रपति माइया सांडू अपनी सादगी और देश को यूरोपीय संघ की ओर ले जाने के प्रयासों के लिए सुर्खियों में हैं। रूस के दखल, आर्थिक संकट और दुष ...और पढ़ें

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    मोल्दोवा की राष्ट्रपति माइया सांडू (फाइल फोटो- सोर्स- सोशल मीडिया)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। साल 2025 में यूरोप की राजनीति में मोल्दोवा जैसे छोटे देश का नाम अचानक सुर्खियों में आ गया। इसके पीछे की वजह हैं, मोल्दोवा की राष्ट्रपति माइया सांडू, यह एक ऐसी नेता हैं, जो रूस के भारी दखल, आर्थिक संकट और प्रोपेगैंडा के बीच न सिर्फ सत्ता में टिकी रहीं, बल्कि अपने देश को यूरोपीय संघ की ओर मजबूती से ले जा रही हैं।

    दरअसल, मोल्दोवा की राष्ट्रपति माइया सांडू का जीवन काफी सादगी भरा है। राष्ट्रपति होने के बावजूद प्राइवेट जेट की जगह इकोनॉमी क्लास में चलती हैं।

    कितनी है सैलरी?

    मोल्दोवा की राष्ट्रपति माइया सांडू की मासिक सैलरी करीब 938 पाउंड है। जो ब्रिटेन के न्यूनतम वेतन से भी कम है। इससे 15 गुना अधिक वह वर्ल्ड बैंक में काम करते वक्त कमाती थीं। एक देश की राष्ट्रपति होने के बावजूद भी वो आज के समय में वह किशिनाउ के एक साधारण दो-कमरों वाले फ्लैट में रहती हैं।

    वे अपने साधारण जीवन को लेकर कहती हैं कि मोल्दोवा छोटा देश है और सीमित संसाधन, ऐसे में सार्वजनिक खर्च की जवाबदेही सरकार की है। ये वो तथ्य हैं, जो उनके खिलाफ चलाए गए उस प्रचार को कमजोर कर दिया, जिसमें उन पर निजी लाभ उठाने का आरोप लगाया गया था।

    मोल्दोवा की अर्थव्यवस्था प्रभावित

    रोमानिया के बीच स्थित मोल्दोवा रूस के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। यूक्रेन युद्ध के बाद 2022 में मोल्दोवा की अर्थव्यवस्था बहुत अधिक प्रभावित हुई। इस दौरान जीडीपी करीब 6 प्रतिशत तक सिकुड़ गई और ऊर्जा संकट बढ़ गए।

    रूस के दखल के बावजूद जीत गईं चुनाव

    हजारों शरणार्थी मोल्दोवा आए। इस दौरान हालात सत्ता विरोधी हो गए। इसी दौरान रूस समर्थित ताकतों ने चुनाव को प्रभावित करने की कोशिशें तेज कर दीं। फेक न्यूज, वोट खरीदने, साइबर अटैक और डार्क मनी से जुड़े आरोपों बावजूद 2025 चुनाव में माइया सांडू की पार्टी ने बहुमत हासिल किया।

    माइया सांडू का कार्यकाल 2028 में खत्म होगा। लेकिन 2025 के चुनाव नतीजों ने यह तय कर दिया है कि मोल्दोवा अब सिर्फ छोटा देश नहीं, बल्कि यूरोप की लोकतांत्रिक परीक्षा-स्थली है। जिसका नेतृत्व राष्ट्रपति माइया सांडू कर रहीं हैं।