नई दिल्‍ली, जेएनएन। जापान अपनी हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक को आगे बढ़ाने के लिए जल्द ही अपने अंडर-डेवलपमेंट स्क्रैमजेट इंजन का परीक्षण कर सकता है। यह उम्‍मीद की जा रही है कि 23 जुलाई, 2022 को यह परीक्षण किया जा सकता है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इंजन विभिन्न प्रकार के हाइपरसोनिक वाहनों को शक्ति प्रदान करेगा, जिससे देश के बाहरी द्वीपों की सुरक्षा करने की क्षमता बढ़ेगी। जापान के इस कदम से चीन में खलबली है। खासकर क्‍वाड के गठन के बाद चीन और जापान के रिश्‍ते तल्‍ख हुए हैं। ऐसे में जापान के इस कदम से इस क्षेत्र में शस्‍त्रों की होड़ का नया क्रम शुरू हो सकता है। आइए जानते हैं कि आखिर क्‍या है पूरा मामला।

1- चीन के साथ बढ़ते तनाव को देखते हुए मार्च 2020 में, जापान ने पहली बार अपने हाइपरसोनिक हथियारों को विकसित करने की योजना की घोषणा की थी। इसका लक्ष्य रूस, चीन और अमेरिका सहित राष्ट्रों के एक छोटे समूह में शामिल होना था। उन योजनाओं का रणनीतिक महत्व बढ़ रहा है, क्योंकि ऐसे संकेत हैं कि जापान अपने शांतिवादी संविधान को अधिक सैन्य शक्ति की अनुमति देने के लिए बदल सकता है।

2- गौरतलब है कि चीन की हाइपरसोनिक तकनीक में नई प्रगति जापान के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है। वर्तमान में जापान हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी विकास में अपने निवेश को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। यह हाइपरसोनिक मिसाइल दुश्‍मन को चकमा देने में सक्षम है। इसके अलावा यह ध्वनि की गति से पांच गुना अधिक गति से अपने लक्ष्‍य को भेदने में सक्षम है। इससे इस मिसाइल का पीछा करना बहुत कठिन हो जाता है। रूस और चीन इन हथियारों को पहले ही तैनात कर चुके हैं, जो परमाणु हथियारों से लैस हैं।

3- चीन और उत्तर कोरिया दोनों ही अधिक ताकतवर हथियार बनाने की कोशिश में जुटे हैं। उत्तर कोरिया बार-बार मिसाइल टेस्ट करता रहा है। वहीं चीनी सेना ने पिछले कुछ समय में दो बार ऐसे राकेट लान्च किए हैं, जिसने पूरी धरती का चक्कर काटने के बाद अपने लक्ष्‍य को निशाना बनाया था। यह माना जा रहा है कि अमेरिका इस टेस्ट को लेकर काफी परेशान है। जुलाई, 2021 में चीन ने एक परीक्षण किया था, जिसके बारे में जानकारों का कहना था कि ये हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण था। हालांकि चीन का कहना था कि ये पुराने अंतरिक्ष यान को फिर से इस्तेमाल करने से जुड़ा टेस्ट था। चीन के इस परीक्षण के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री लाएड आस्टिन ने कहा था कि चीन जिस सैन्य क्षमता का विकास कर रहा है, उसे लेकर हमें चिंता है, क्योंकि इससे क्षेत्र में तनाव पैदा हो रहा है।

4- इसके ठीक बाद रूस ने दावा किया था कि उसकी नौसेना ने सफलतापूर्वक एक हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल का परीक्षण किया है। इस परीक्षण के बारे में रूस का कहना था कि ये जिरकान क्रूज मिसाइल थी, जिसने अभ्यास के दौरान 400 किलोमीटर दूर मौजूद अपने लक्ष्य को भेदा। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि जिरकान सिरीज की मिसाइलें आवाज की गति से नौ गुना तेजी से मार कर सकती हैं और एक हजार किलोमीटर दूर तक के लक्ष्य भी भेद सकती हैं। रूसी सेना जल्द ही इस सिरीज की मिसाइलों को सेना में शामिल करने वाली है। इसके बाद अमेरिका की चिंता और बढ़ गई थी।

5- हाल में रूस, चीन की हाइपरसोनिक मिसाइलों के खतरे का सामना कर रहे अमेरिका को रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा झटका लगा है। अमेरिका की हाइपरसोनिक मिसाइल परीक्षण में फेल हो गई है। रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने कहा कि अनियमितता आ जाने की वजह से उनका ताजा मिसाइल परीक्षण फेल हो गया है। यूक्रेन जंग के बीच अमेरिका को बहुत बड़ा झटका लगा है। इस अमेरिकी मिसाइल पर रूस और चीन की पैनी नजर थी। पेंटागन ने यह भी साफ नहीं किया कि मिसाइल में क्‍या अनियम‍ितता हुई है। यह भी नहीं बताया गया है कि मिसाइल के किस चरण में यह दिक्‍कत उत्‍पन्‍न हुई। अलबत्‍ता पेंटागन की ओर से कहा गया है कि हाइपरसोनिक हथियार हमारे लिए शीर्ष प्राथमिकता है और रक्षा मंत्रालय को पूरा भरोसा है कि वह तय समय सीमा में हमला करने और बचाव करने के लिए हाइपरसोनिक क्षमता को हासिल करने के अपने लक्ष्‍य को हासिल कर लेगा।पेंटागन के प्रवक्‍ता ने कहा कि इस परीक्षण से मिली सूचना काफी महत्‍वपूर्ण है।

क्‍या है हाइपरसोनिक मिसाइल

1- हाइपरसोनिक मिसाइल एक हथियार प्रणाली है जो 5 मैक की गति या इससे अधिक की गति से उड़ान भरती है यानी ध्वनि की गति से पांच गुना तेज है। हाइपरसोनिक मिसाइल की गतिशीलता इसे एक बैलिस्टिक मिसाइल से अलग करती है, क्योंकि यह बाद में बैलिस्टिक प्रक्षेपवक्र का अनुसरण करती है। इस प्रकार बैलिस्टिक मिसाइलों के विपरीत, हाइपरसोनिक मिसाइलें बैलिस्टिक प्रक्षेपवक्र का पालन नहीं करती हैं तथा उन्हें इच्छित लक्ष्य तक ले जाया जा सकता है।

2- ये मिसाइलें लक्ष्य की ओर लान्च होने से पूर्व एक पारंपरिक राकेट के माध्यम से पहले वायुमंडल में जाती हैं, जबकि हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल अपने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले वायु की मदद से उच्च गति इंजन या स्क्रैमजेट द्वारा संचालित होती है। ये दूरी, बचाव या समय के महत्त्वपूर्ण खतरों के खिलाफ सुरक्षित, लंबी दूरी के स्ट्राइक विकल्पों में सक्षम है, जब अन्य बल अनुपलब्ध हों, पहुंच में न हों या पसंद न हों। पारंपरिक हाइपरसोनिक हथियार केवल गतिज ऊर्जा यानी गति से प्राप्त ऊर्जा का उपयोग कठिन लक्ष्यों या भूमिगत लक्ष्यों को नष्ट करने हेतु करते हैं।

3- गति और उड़ान की कम ऊंचाई के कारण प्रायः हाइपरसोनिक मिसाइलों का पता लगाना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। जमीन आधारित रडार या स्थलीय रडार हाइपरसोनिक मिसाइलों का पता तब तक नहीं लगा पाते हैं, जब तक कि मिसाइल काफी नजदीक नहीं पहुंच जाती। इस विलंब के कारण प्रायः मिसाइल हमले के उत्तरदाताओं के लिए अपने विकल्पों का आकलन करना और मिसाइल को रोकने का प्रयास करना मुश्किल हो जाता है। अमेरिका, रूस और चीन हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रमों के उन्नत चरण में हैं। वहीं भारत, फ्रांस, जर्मनी, जापान तथा आस्ट्रेलिया भी हाइपरसोनिक हथियार विकसित कर रहे हैं।

Edited By: Ramesh Mishra