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    विदेश मंत्री जयशंकर बोले- यूक्रेन युद्ध किसी के हित में नहीं, ऐसी लड़ाई के पक्ष में कभी नहीं रहा भारत

    By Jagran NewsEdited By: Devshanker Chovdhary
    Updated: Mon, 10 Oct 2022 10:30 PM (IST)

    भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कहा कि यूक्रेन युद्ध किसी के हित में नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत ऐसी लड़ाई के पक्ष में कभी नहीं रहा है क्योंकि इसका दुनियाभर में हर किसी पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

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    विदेश मंत्री जयशंकर बोले- यूक्रेन युद्ध किसी के हित में नहीं, ऐसी लड़ाई के पक्ष में कभी नहीं रहा भारत।

    कैनबरा, एजेंसी। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कहा कि यूक्रेन युद्ध किसी के हित में नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत ऐसी लड़ाई के पक्ष में कभी नहीं रहा है, क्योंकि इसका दुनियाभर में हर किसी पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ सकता है। अपने आस्ट्रेलियाई समकक्ष पेन्नी वांग के साथ संयुक्त पत्रकार वार्ता में जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में रूस के खिलाफ आने वाले मसौदा प्रस्ताव पर भारतीय रुख के बारे में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

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    यूक्रेन युद्ध किसी के हित में नहीं

    विदेश मंत्री ने कहा, 'यह हमारी नीति रही है कि हम मतदान के बारे में पहले से कुछ नहीं बताते हैं। हालांकि, हम स्पष्ट रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध के खिलाफ रहे हैं।' मालूम हो कि रूस द्वारा यूक्रेन के चार इलाकों को अपने हिस्से में मिलाए जाने के खिलाफ महासभा में यह मसौदा प्रस्ताव लाया जाएगा। जयशंकर ने कहा कि इस संघर्ष से न तो इसमें शामिल लोगों का कोई हित होगा और न ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कोई लाभ मिलने वाला है।

    युद्ध से कम आमदनी वाले देश अधिक प्रभावित

    जयशंकर ने कहा, 'हम देख रहे हैं कि इसने कम आमदनी वाले देशों को किस तरह से प्रभावित किया है। उन्हें ईंधन और ऊर्वरकों की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इसीलिए, हमारे प्रधानमंत्री ने कुछ सप्ताह पहले एक सम्मेलन में कहा था कि यह युद्ध का समय नहीं है। आप जानते हैं कि आज के दौर में दुनिया के किसी भी हिस्से में लड़ाई लड़ी जाती है, तो उसका प्रभाव पूरे विश्व पर पड़ता है। यह बात हमारी नीतियों को बहुत ज्यादा प्रभावित करती है।'

    भारत और रूस के बीच लंबे समय से संबंध

    विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और रूस के बीच लंबे समय से संबंध हैं, जिसने निश्चित रूप से भारत के हितों की रक्षा की है। उन्होंने कहा, 'हमारे पास सोवियत और रूसी मूल के हथियारों की एक लंबी फेहरिस्त है और यह सूची वास्तव में कई कारणों से बढ़ी है।'

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