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    ईरान ने 180 मिसाइल दागीं, IDF ने हवा में ही कर दिया खात्‍मा; कितना ताकतवर है इजरायल?

    Updated: Wed, 02 Oct 2024 02:50 PM (IST)

    Iran missile attack on Israel Update ईरान ने मंगलवार रात इजरायल पर 180 से ज्‍यादा बैलिस्टिक मिसाइल दागी। ईरानी मिसाइलों की बौछार इजरायल का कुछ नहीं बिगाड़ पाई। दरअसल इजराइल के एडवांस डिफेंस सिस्टम ने ईरान की ज्यादातर मिसाइलों को नष्ट कर दिया। यहां पढ़िए इजरायल बनाम ईरान में किसके पास कितनी ताकत है इजरायली डिफेंस सिस्टम कैसे काम करता है?

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    ईरान VS इजरायल : क्‍या है इजरायल के डिफेंस सिस्टम की ताकत। जागरण ग्राफिक्‍स टीम

    डिजिटल डेस्‍क, नई दिल्‍ली। ईरान ने मंगलवार रात इजरायल पर 180 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल दागीं। इजरायल की डिफेंस फोर्स (IDF) ने जानकारी दी कि हमला मोसाद हेडक्वार्टर, नेवातिम एयरबेस और तेल नोफ एयरबेस को निशाना बनाकर किया गया था। इजराइल के डिफेंस सिस्टम ने ईरान की ज्यादातर मिसाइलों को नष्ट कर दिया। 

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    ईरानी मिसाइलों की बौछारों के बावजूद इजरायल में जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है। दरअसल, इजरायल के एयर डिफेंस बहुत जबरदस्त है। उसकी वायु रक्षा प्रणाली कई स्तरों काम करती है। एरो एरियल डिफेंस सिस्टम की मदद से वह दुश्मन की मिसाइलों व ड्रोन को अपने क्षेत्र में पहुंचने से पहले ही मार गिराने की क्षमता रखता है।  इजरायल की ताकत क्या हैं, यहां पढ़िए...

    इजरायली डिफेंस सिस्टम कैसे काम करता है?

    इजरायल का आयरन डोम, डेविड स्लिंग व एरो डिफेंस सिस्टम मिलकर बहुस्तरीय रक्षा प्रणाली तैयार करते हैं। आयरन डोम का नाम तो हम सुनते ही रहते हैं, जिसने 2011 से बाद से अब तक हजारों रॉकेट मार गिराए हैं। यह ड्रोन और छोटी दूरी के खतरों को रोकने में कारगर है। इजरायल के पास मध्यम से लंबी दूरी का इंटरसेप्टर डेविड स्लिंग है। वायु रक्षा प्रणाली में एरो 2 मिसाइलों के शामिल होने से इजरायल को हवाई क्षेत्र के ऊपरी हिस्से में छोटी व मध्यम दूरी की मिसाइलें रोकने की क्षमता हासिल हुई। इसका काम हमलावर मिसाइल को हवा में ही बर्बाद करना है।

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    इजरायली एरो एरियल डिफेंस प्रणाली 

    एरो डिफेंस सिस्टम इसके सबसे ऊपरी स्तर पर काम करता है, जिसे इजरायल की एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने अमेरिकी मिसाइल रक्षा एजेंसी के साथ मिलकर तैयार किया है।

    पिछली सदी के नौवें दशक के आखिरी वर्षों में इस पर काम शुरू हुआ था। 1990 के दौरान एरो-1 को सात परीक्षणों से गुजरना पड़ा। आगे चलकर एक हल्की मिसाइल के रूप में विकसित किया गया, जिसे एरो 2 नाम से जाना जाता है।

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    इजरायली एरो डिफेंस की ताकत

    इजरायल ने एरो 2 के बाद उन्नत श्रेणी के एरो 3 को भी शामिल किया है। इसका रॉकेट मैक 9 (11,000 किमी प्रतिघंटा) की रफ्तार से दुश्मन की मिसाइल को नष्ट कर सकता है। डिफेंस सिस्टम में मिसाइल लांचर, ग्रीन पाइन फायर कंट्रोल रडार, हेजलनट ट्री लांच कंट्रोल सेंटर व सिट्रान ट्री बैटल मैनेजमेंट सिस्टम शामिल हैं।

    ग्रीन पाइन रडार 2,400 किमी की दूरी तक लक्ष्य का पता लगाने और एक साथ 14 लक्ष्यों को रोकने में सक्षम है। रडार 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर लक्ष्य को निशाना बना सकता है।

    भूगोल और जनसांख्यिकी में कौन आगे?

    • ईरान क्षेत्रफल के लिहाज से इजरायल की तुलना में काफी बड़ा देश है।
    • ईरान की आबादी इजरायल की तुलना में करीब 10 गुना ज्यादा है।
    • ईरानी सैनिकों की संख्या इजरायल की तुलना में छह गुना अधिक है।

    साइबर हमले में किसका होगा ज्यादा नुकसान?

    अगर साइबर वॉर हुआ तो ईरान की तुलना में इजरायल को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसकी वजह है कि ईरान का डिफेंस सिस्टम टेक्नोलॉजी के लिहाज से ज्यादा विकसित नहीं है। ऐसे अगर साइबर वॉर छिड़ा तो ईरान को फायदा होगा।

    इजरायल के राष्ट्रीय साइबर निदेशालय के मुताबिक,   इजरायली सेक्‍टर पर पहले की तुलना में तीन गुना ज्यादा तीव्रता से हमला हो सकता है।  7 अक्टूबर से लेकर दिसंबर 2023  तक इजरायल पर 3380 साइबर अटैक हुए हैं। वहीं ईरान के सिविल डिफेंस ऑर्गेनाइजेशन ने जानकारी दी है कि ईरान ने अपने यहां संसदीय चुनाव से पहले करीब 200 साइबर अटैक नाकाम किए हैं। 

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