सैन्य शासन की कार्रवाई से भड़के म्यांमार में छिड़ सकता है गृह युद्ध, जर्मनी के मंत्री ने किया आगाह
संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत क्रिस्टीना के बाद अब जर्मनी के विदेश मंत्री ने भी म्यांमार में गृह युद्ध छिड़ने की चेतावनी दी है। उनका कहना है जुंंटा की कार्रवाई से देश गृह युद्ध की आग में जल सकता है।

बर्लिन (एजेंसी)। जर्मनी के विदेश मंत्री हेको मास ने म्यांमार में खराब होते हालातों पर चिंता जताते हुए कहा है कि वहां पर जुंटा की कार्रवाई देश में गृह युद्ध को भड़का सकती है। उन्होंने इसके लिए पूरी दुनिया को आगाह भी किया है। जर्मनी के अखबार डाइचे वेले के मुताबिक रविवार को दिए एक इंटरव्यू में मास ने कहा कि एशिया का कोई भी देश नहीं चाहता है कि म्यांमार गृह युद्ध की आग में घिर जाए। म्यांमार में जो देश लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करना चाहते हैं वो भी इसको लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि म्यांमार के सैन्य शासन पर पूरी दुनिया का दबाव बना हुआ है। गौरतलब है कि मास से पहले म्यांमार के लिए नियुक्त संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष दूत क्रिस्टीना ने भी इसी तरह का बयान पिछले दिनों दिया था। उन्होंने भी माना था कि वहां का सैन्य शासन जिस तरह से निरंकुश होता जा रहा है उससे लोगों के मन में उसके प्रति जबरदस्त गुस्सा है। ऐसे में वहां पर गृह युद्ध छिड़ने की प्रबल आशंका है।
आपको बता दें कि म्यांमार में 1 फरवरी 2021 की सुबह कमांडर इन चीफ ऑफ डिफेंस सर्विस मीन आंग ह्लेनिंग ने देश में आंग सांग सू की के नेतृत्व में बनी सरकार का तख्तापलट कर दिया था। इसके बाद सेना ने सू की समेत सत्ताधारी पार्टी से जुड़े सभी ऑफिसों पर ताले डाल दिए और सभी नेताओं को हिरासत में ले लिया था। तख्तापलट के दो दिन बाद ह्लेनिंग ने देश को चलाने के लिए नई काउंसिल का गठन किया और सेना से जुड़े वरिष्ठ साथियों को ऊंचे पद दिए गए थे। तख्तापलट के साथ ही देश में इसके विरोध में लोग सड़कों पर उतरे, जिसको रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने जबरदस्त कार्रवाई की। प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई गईं, उन्हें हिरासत में लिया गया। म्यांमार में 1 फरवरी से अब तक करीब 550 प्रदर्शनकारी सुरक्षाबलों की गोलियां का शिकार होकर मारे जा चुके हैं। इंटरनेशनल एमनेस्टी इंटरनेशनल समेत ह्यूमन राइट्स वॉच की निगाह में ये संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
आपको यहां पर ये भी बता दें कि म्यांमार को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच से संयुक्त राष्ट्र महासचिव भी अपनी चिंता व्यक्त कर चुके हैं। जर्मनी के मंत्री मास का कहना है कि म्यांमार में सेना ने पिछले दो सप्ताह में लोगों का खूब खून बहाया है। सैकड़ों मारे जा चुके हैं और हजारों डर के मारे वहां से भाग गए हैं। मास ने दुनिया के सभी देशों से अपील की है कि वो सभी म्यांमार के सैन्य शासन पर अपने रसूख का इस्तेमाल करें और वहां पर लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली के लिए दबाव बनाएं। मास ने आसियान देशों (एसोसिएशन ऑफ साउथ-ईस्ट नेशन) से भी इसी तरह की अपील की है।
म्यांमार में खराब होती स्थिति पर सभी देशों की निगाहें लगी हुई हैं। मास का मानना है कि जुंटा जिस तरह से लोगों के ऊपर जुल्म कर रहा है उस तरह से वहां पर गृह युद्ध की स्थिति आ सकती है जो किसी के लिए भी अच्छी नहीं होगी। हालांकि एशिया के कई देशों ने म्यांमार में जारी तनावपूर्ण स्थिति के लिए जुंटा से अपील की है और हिरासत में लिए गए नेताओं की तुरंत रिहाई की मांग भी की है। चीन ने म्यांमार के हालातों के मद्देनजर आसियान देशों की बैठक बुलाने का आग्रह तक किया है। चीन की सरकार के अधिकारी की तरफ से एक बयान में कहा गया है चीन चाहता है कि आसियान देश इस संबंध में जितना जल्द हो बैठक बुलाएं और म्यांमार की स्थिति पर चिंतन करें।
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