फ्रांस के ब्लड बैंकों पर बड़ा साइबर हमला, कैसे नाकाम हुई प्लाज्मा खराब करने की साजिश?
फ्रांस के तीन ब्लड बैंकों पर साइबर हमला हुआ, जिसमें हैकर्स ने रेफ्रिजरेशन सिस्टम का तापमान बढ़ाने की कोशिश की, ...और पढ़ें

फ्रांस के तीन ब्लड बैंकों पर साइबर हमला, रेफ्रिजरेशन सिस्टम निशाना (AI जेनेरेटेड)

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, पेरिस। फ्रांस के तीन ब्लड बैंकों पर साइबर हमला हुआ, जिसमें हैकर्स ने रेफ्रिजरेशन सिस्टम को निशाना बनाकर तापमान बढ़ाने की कोशिश की। लेकिन समय रहते अलार्म सिस्टम ने गड़बड़ी पकड़ ली और स्टाफ ने तुरंत कार्रवाई कर हमले को नाकाम कर दिया। किसी भी ब्लड प्रोडक्ट या सैंपल को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और स्वास्थ्य पर भी कोई बुरा असर नहीं पड़ा।
सोमवार को हुई इस घटना में रेफ्रिजरेशन उपकरण सप्लाई करने वाली एक कंपनी को निशाना बनाया गया। ये उपकरण 'फ्रेंच ब्लड एस्टेब्लिशमेंट' (EFS) द्वारा इस्तेमाल किए जाते हैं, जो देश में ब्लड कलेक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क की देखरेख करता है। यूरोप भर में रेफ्रिजरेशन सिस्टम पर साइबर हमलों की एक बड़ी लहर चल रही है।
हैकर्स के निशाने पर फ्रिज और फ्रीजर
इससे पहले कई देशों में सुपरमार्केट ने बताया है कि हैकर्स ने दूर से ही उनके फ्रिज और फ्रीजर के साथ छेड़छाड़ की, जिससे उनका खाना खराब हो गया और उन्हें लाखों यूरो का नुकसान उठाना पड़ा। EFS ने मंगलवार देर रात एक बयान में कहा कि उनके तीन प्लाज्मा स्टोरेज सेंटर्स पर तापमान और डीफ्रॉस्टिंग की सेटिंग को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया गया था।
हालांकि, मॉनिटरिंग और अलार्म सिस्टम ने तुरंत इन गड़बड़ियों को पकड़ लिया, जिससे स्टाफ ने समय रहते कदम उठाया और किसी भी तरह के नुकसान को रोक दिया।
EFS ने कहा, 'स्वास्थ्य पर इसका कोई बुरा असर नहीं पड़ा है और कोई भी ब्लड प्रोडक्ट खराब नहीं हुआ है।' 'स्काई न्यूज' को दिए एक बयान में EFS ने बताया कि इस घटना से उनके कुछ ही सेंटर्स प्रभावित हुए हैं। सर्विस प्रोवाइडर से मिलने वाली तकनीकी जानकारी के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इस हमले का दायरा कितना बड़ा था।
क्रिप्टो एक्सचेंज बाइनेंस में भी साइबर चोरी
दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज बाइनेंस पर अब तक की सबसे बड़ी साइबर चोरी के मामले में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। कंपनी के मुताबिक, हैकरों ने फर्जी नौकरी के इंटरव्यू और विज्ञापन में छिपे खतरनाक साफ्टवेयर के जरिए दो इंजीनियरों के कंप्यूटर को निशाना बनाया। इसके बाद तीसरे इंजीनियर के कंप्यूटर का इस्तेमाल कर करीब 6.3 अरब डालर की क्रिप्टोकरेंसी चुरा ली।
बाइनेंस की शुरुआती जांच रिपोर्ट के अनुसार, साइबर हमले की तैयारी जून में शुरू हुई थी। कंपनी ने हमले का पता चलने के बाद निकासी रोकने और सिस्टम सुरक्षित करने की कोशिश की, लेकिन हैकर्स करीब चार घंटे तक क्रिप्टोकरेंसी निकालते रहे। अमेरिकी एफबीआई ने इस हमले के पीछे उत्तर कोरिया के हैकर समूह का हाथ बताया है, हालांकि उत्तर कोरिया ने आरोप खारिज किया है। बाइनेंस ने चोरी से प्रभावित सभी ग्राहकों को उनका पैसा लौटाने का भरोसा दिया है।
उत्तर कोरिया ने मंगलवार को बाइनेंस में हाल ही में हुई क्रिप्टोकरेंसी चोरी में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया। उसने अमेरिका के उस दावे को उकसावे की कार्रवाई बताकर खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि इस घटना के पीछे उत्तर कोरियाई हैकर्स का हाथ है। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की प्रभावशाली बहन, किम यो जोंग ने एफबीआइ के इस बयान को उकसावा और बेतुकी बयानबाजी करार दिया।
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