विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 29, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

नेपाल में 16 साल बाद फिर क्यों उठी राजशाही की मांग? कौन थे आखिरी राजा; अब क्या है उनका हाल

Published: Sat, 29 Mar 2025 03:04 PM (IST)Updated: Sat, 29 Mar 2025 03:38 PM (IST)

नेपाल में धर्म को लेकर भी एक बड़ा विवाद बना हुआ है। 2021 के सेंसस के मुताबिक नेपाल में हिंदू ...और पढ़ें

नेपाल में उठी राजशाही की मांग (फाइल फोटो)
नेपाल में उठी राजशाही की मांग (फाइल फोटो)

HighLights

  1. नेपाल में फिर उठी राजशाही की मांग
  2. कौन थे आखिरी राजा और अब क्या है स्थिति?

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पड़ोसी देश नेपाल से एक बार फिर ऐसी खबरें आ रही हैं, जो राजशाही की पुन: मांग को लेकर है। यह खबरें इस बात से जुड़ी हुई हैं कि क्या नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए?

नेपाल लंबे समय तक दुनिया का एकमात्र हिंदू राष्ट्र रहा, लेकिन लोकतंत्र के आगमन के बाद इसे सेकुलर घोषित कर दिया गया था। अब देश में राजशाही समर्थक आवाजें उठा रहे हैं और उनका कहना है कि लोकतंत्र की व्यवस्था को खत्म करके शाही परिवार को फिर से सत्ता सौंप दी जाए।

राजशाही समर्थकों का आंदोलन

हाल ही में काठमांडू की सड़कों पर राजशाही समर्थकों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनकारियों ने "राजा वापस आओ, देश बचाओ" जैसे नारे लगाए।

उनका आरोप है कि नेपाल के राजनीतिक दल पूरी तरह से भ्रष्ट हो चुके हैं और वे दूसरे धर्मों को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसके कारण नेपाल की पहचान खत्म हो सकती है। उनके अनुसार, केवल शाही परिवार ही देश की स्थिति को सुधार सकता है। उनका कहना है कि जब शाही परिवार सत्ता में था, तब देश की समस्याओं का समाधान हुआ करता था।

नेपाल के सामाजिक और आर्थिक हालात

नेपाल में युवाओं का रोजगार के लिए विदेश पलायन बढ़ गया है, जबकि देश की आर्थिक स्थिति भी संकटग्रस्त है। यहां के राजनीतिक दलों के बीच भ्रष्टाचार और ढीले रवैये को लेकर भी लोग लगातार नाराजगी जता रहे हैं।

राजनीतिक असंतोष के साथ-साथ लोग नेपाल की विदेश नीति से भी परेशान हैं। शाही परिवार के पुनर्निर्माण की मांग का मुख्य कारण यह भी है कि लोग महसूस करते हैं कि वर्तमान सरकार उनके लिए कुछ नहीं कर रही है और देश का भविष्य असमंजस में है।

हाल ही में राजशाही समर्थकों और सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष हुआ, जिसमें एक पत्रकार सहित दो लोगों की मौत हो गई और 20 से अधिक लोग घायल हो गए। इस संघर्ष के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बैरीकेड्स तोड़ने की कोशिश की और पुलिस से टकरा गए।

नेपाल में धर्म और जनसंख्या

नेपाल में धर्म को लेकर भी एक बड़ा विवाद बना हुआ है। 2021 के सेंसस के मुताबिक, नेपाल में हिंदू धर्म को मानने वाले लोग 81 प्रतिशत से ज्यादा हैं। इसके बाद बौद्ध धर्म, इस्लाम और ईसाई धर्म के अनुयायी हैं।

हाल के वर्षों में क्रिश्चियनिटी ने देश में अच्छी खासी वृद्धि की है, जिससे कुछ हिंदू और बौद्ध धर्म के अनुयायी चिंतित हैं। क्रिश्चियन कम्युनिटी सर्वे के मुताबिक, नेपाल में हाल के कुछ वर्षों में लगभग 7,758 चर्च बन गए हैं।

इसके साथ ही बौद्ध धर्म के अनुयायी बड़ी संख्या में ईसाई धर्म अपना चुके हैं। यह वृद्धि और परिवर्तन नेपाल के बड़े हिस्से में चिंता का कारण बन गया है, और लोग चाहते हैं कि राजशाही फिर से स्थापित हो ताकि धर्म के आधार पर ही देश की पहचान तय हो सके।

राजशाही का इतिहास और पूर्व राजा ज्ञानेंद्र

नेपाल में राजशाही की शुरुआत लगभग ढाई सौ साल पहले हुई थी। 2008 में अंतिम राजा ज्ञानेंद्र को अपदस्थ कर दिया गया और नेपाल को एक लोकतांत्रिक गणराज्य बना दिया गया।

2001 में रॉयल परिवार के एक सदस्य द्वारा परिवार के 9 सदस्यों की हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद नेपाल में उथल-पुथल मच गई और माओवादी ताकतें मजबूत हुईं। इसके बाद से राजशाही के खिलाफ आंदोलन शुरू हुआ और नेपाल ने खुद को एक सेकुलर देश घोषित किया।

अब लोग फिर से राजशाही की वापसी की मांग कर रहे हैं, और खासकर पूर्व राजा ज्ञानेंद्र को सत्ता सौंपने की बातें हो रही हैं। ज्ञानेंद्र ने भले ही राजनीतिक जीवन से खुद को दूर कर लिया हो, लेकिन उनकी संपत्ति और प्रभाव अब भी बड़े पैमाने पर हैं।

ज्ञानेंद्र की संपत्ति और व्यवसाय

राजशाही खत्म होने के बाद भी पूर्व राजा ज्ञानेंद्र के पास बड़ी संपत्ति है। उनके पास काठमांडू में कई महल हैं, जैसे निर्मल निवास, जीवन निवास, नागार्जुन और गोकर्ण महल।

इसके अलावा, उनके पास हजारों एकड़ में फैला नागार्जुन जंगल भी है। नेपाल के अलावा, उन्होंने अफ्रीकी देशों में भी निवेश किए हैं। उदाहरण के लिए, मालदीव में उनका एक द्वीप है और नाइजीरिया में तेल के व्यवसाय में निवेश किया हुआ है।

पूर्व राजा ज्ञानेंद्र ने नेपाल और विदेशों में 200 मिलियन डॉलर के करीब निवेश किया है। उनका निवेश सोलटी होटल में भी था, जिसका मूल्य 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा था। इसके अलावा, चाय बागानों और अन्य व्यवसायों में भी उनका निवेश है।

नेपाल में राजशाही को लेकर बवाल, झड़प में दो लोगों की मौत और 30 घायल; पीएम ने बुलाई आपात बैठक