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    अफगानिस्तान में पांच हत्याओं के दोषी को सार्वजनिक मौत की सजा, मृतक के बेटे ने हत्यारे को राइफल से उड़ाया

    अफगानिस्तान में दोबारा तालिबान की हुकूमत कायम होने के बाद मंगलवार को एक व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से मौत की सजा दी गई। सार्वजनिक रूप से मौत की सजा दिए जाने की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना होने की संभावना है।

    By AgencyEdited By: Mohd FaisalUpdated: Wed, 21 Jun 2023 05:00 AM (IST)
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    अफगानिस्तान में पांच हत्याओं के दोषी को सार्वजनिक मौत की सजा (फाइल फोटो)

    इस्लामाबाद, एपी। अफगानिस्तान में दोबारा तालिबान की हुकूमत कायम होने के बाद मंगलवार को एक व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से मौत की सजा दी गई। देश की सुप्रीम कोर्ट ने यह जानकारी दी।

    अजमल को पाया पांच लोगों की हत्या का दोषी

    अदालत ने राजधानी काबुल के अजमल नाम के एक व्यक्ति को मौत की सजा सुनाई थी। उसे पिछले साल दो अलग-अलग घटनाओं में पांच लोगों की हत्या का दोषी पाया गया था।

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    रिश्तेदार बने सजाए मौत के गवाह

    अजमल द्वारा मारे गए पांच लोगों में से एक, सियाद वली के बेटे ने राइफल से अजमल को इस्लामिक कानून के अनुसार पूर्वी लघमान प्रांत में प्रांतीय गवर्नर के कार्यालय के पास एक मस्जिद के बाहर गोली से उड़ा दिया। अजमल द्वारा मारे गए चार अन्य लोगों के रिश्तेदार इस सजाए मौत के गवाह बने।

    संयुक्त राष्ट्र ने प्रथाओं को रोकने का किया था आह्वान

    सार्वजनिक रूप से मौत की सजा दिए जाने की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना होने की संभावना है। संयुक्त राष्ट्र ने पिछले महीने ही तालिबान की हुकूमत में सार्वजनिक फांसी, मारपीट और पत्थरबाजी के लिए तालिबान की कड़ी आलोचना की और देश के शासकों से इन प्रथाओं को रोकने का आह्वान किया था।

    274 पुरुषों, 58 महिलाओं को मारे गए सार्वजनिक रूप से कोड़े

    अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन ने कहा कि पिछले छह महीनों में अकेले अफगानिस्तान में 274 पुरुषों, 58 महिलाओं और दो लड़कों को सार्वजनिक रूप से कोड़े मारे गए।

    सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

    काबुल में तालिबान द्वारा संचालित सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब अजमल के खिलाफ मामला सरकार के संज्ञान में आया, तो पूरी जांच की गई। जांच के बाद तीन अलग-अलग अदालतों ने मौत की सजा बरकरार रखी। अदालत ने कहा कि सबसे अंत में तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्ला अखुंदजादा ने मौत की सजा का आदेश दिया।