बुल्गारिया में तस्करी के दौरान मारे गए 18 अफगान प्रवासियों के शव काबुल लौटे, ...इस वजह से हुई थी मौत
बुल्गारिया की राष्ट्रीय जांच सेवा के निदेशक बोरीस्लाव सराफोव ने इस घटना को असाधारण मानवीय त्रासदी बताया। काबुल में मंत्रालय के उप प्रवक्ता जिया अहमद टकल ने कहा कि उनकी सरकार ने शवों के प्रत्यावर्तन के लिए भुगतान किया।

काबुल, एपी। बुल्गारिया में तस्करी के दौरान मारे गए 18 अफगान प्रवासियों के शव बुधवार को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल भेजे गए। तालिबान सरकार के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने यह जानकारी दी।
बता दें कि बुल्गारिया में एक लावारिस ट्रक अवैध रूप से मानव तस्करी कर रहा था। ट्रक में से एक बच्चे सहित 18 लोगों मृत पाए गए हैं। बल्गेरियाई अधिकारियों ने फरवरी में राजधानी सोफिया से दूर एक राजमार्ग पर छोड़े गए ट्रक में मौजूद एक गुप्त डिब्बे में से बच्चे सहित 18 लोगों के शवों की तलाश की थी।
कैसे हुई थी अफगान प्रवासियों की मौत?
अधिकारियों ने पुष्टि की थी कि सभी 18 अफगान प्रवासियों की मौत दम घुटने की वजह से हुई थी। बुल्गारिया के गृह मंत्रालय ने बताया था कि ट्रक अवैध रूप से प्रवासियों को डिब्बे में छिपाकर ले जा रहा था जिसमें करीब 40 लोग मौजूद थे। दम घुटने की वजह से 40 में से 18 लोगों की मौत हो गई, जबकि शेष बचे लोगों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।
'अपनी जान जोखिम में न डालें अफगानी'
बुल्गारिया की राष्ट्रीय जांच सेवा के निदेशक बोरीस्लाव सराफोव ने इस घटना को 'असाधारण मानवीय त्रासदी' बताया। काबुल में मंत्रालय के उप प्रवक्ता जिया अहमद टकल ने कहा कि उनकी सरकार ने शवों के प्रत्यावर्तन के लिए भुगतान किया। उन्होंने कहा कि शवों को उनके परिवारों को सौंप दिया गया है। साथ ही उन्होंने अफगानियों से अपनी जान जोखिम में नहीं डालने की अपील की।
कहां जाना चाहते थे प्रवासी?
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सभी 40 अफगान प्रवासी पश्चिमी यूरोप पहुंचने की उम्मीद में तुर्किए से बुल्गारिया में दाखिल हुए थे, लेकिन भूख, प्यास और ऑक्सीजन की कमी के चलते उनकी हालत खराब हो गई। जिसकी वजह से 40 में से 18 अफगान प्रवासियों की मौत हो गई, जबकि शेष बचे लोगों की हालात काफी ज्यादा खराब हो गई थी।
अफगानिस्तान के कैसे हैं हालात?
अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबानियों के काबिज होने के बाद वहां की स्थिति में नाटकीय परिवर्तन देखने को मिला। महिलाओं के लिए तरह-तरह के प्रतिबंध लगाए गए और उन्हें सार्वजनिक जगहों पर जाने से भी रोक दिया गया।
इसके अतिरिक्त छठी कक्षा से ज्यादा नहीं पढ़ने दिया जा रहा है। हालांकि, इन प्रतिबंधों के चलते तालिबान सरकार की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी आलोचना हुई। जिसकी वजह से देश अलग-थलग पड़ गया है। साथ ही देश आर्थिक संकट और सूखे के खतरे का सामना कर रहा है।
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