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    Bangladesh News: ‘…हिंदुओं से मुक्त’: लेखक तस्लीमा नसरीन ने की चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी पर बांग्लादेश की आलोचना

    Bangladesh News बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने पूर्व इस्कॉन पादरी चिन्मय कृष्ण दास को जमानत देने में देरी की आलोचना की। उन्होंने कहा बांग्लादेश में चिन्मय कृष्ण दास के लिए कोई वकील नहीं है। बता दें कि चिन्मय दास की जमानत पर सुनवाई जो पहले चटगाँव अदालत में होनी थी वो अब 2 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी गई है।

    By Versha Singh Edited By: Versha Singh Updated: Wed, 04 Dec 2024 12:51 PM (IST)
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    तस्लीमा नसरीन ने की चिन्मय दास की गिरफ्तारी पर बांग्लादेश की आलोचना (फाइल फोटो)

    डिजिटल डेस्क, ढाका। बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने पूर्व इस्कॉन पादरी चिन्मय कृष्ण दास को जमानत देने में देरी की आलोचना की, जिनके वकील पर उनकी गिरफ़्तारी के दिन सुनवाई के बाद "क्रूर हमला" किया गया था।

    बता दें कि चिन्मय दास की जमानत पर सुनवाई, जो पहले चटगाँव अदालत में होनी थी, वो अब 2 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी गई है।

    तस्लीमा नसरीन ने एक्स पर क्या कहा

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नसरीन ने कहा, बांग्लादेश में चिन्मय कृष्ण दास के लिए कोई वकील नहीं है। जिहादियों की धरती पर हिंदू नफरत को समझने के लिए यह वाक्य ही काफी है। चिन्मय कृष्ण दास के वकील को पीटा गया। यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय किए गए हैं कि कोई भी चिन्मय कृष्ण दास का बचाव न करे। चिन्मय के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप झूठे और मनगढ़ंत हैं। चिन्मय को जेल में रखने का उद्देश्य उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन है। जिहादी अपनी धरती को हिंदुओं से मुक्त करना चाहते हैं। वे अपने लक्ष्य की ओर काम कर रहे हैं।

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    इस्कॉन कोलकाता ने लगाए कई आरोप

    इस्कॉन कोलकाता ने आरोप लगाया कि चिन्मय दास की गिरफ़्तारी के दिन उनका प्रतिनिधित्व करने वाले वकील रेगन आचार्य पर सुनवाई के बाद “क्रूरतापूर्वक हमला” किया गया। इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष और प्रवक्ता राधारमण दास ने एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए दावा किया कि आचार्य के चैंबर में तोड़फोड़ की गई।

    राधारमण ने लिखा, इस वीडियो में उनके चैंबर के साइनबोर्ड पर उनका नाम बंगाली में दिखाई दे रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि कोई भी वकील पूर्व इस्कॉन पुजारी का प्रतिनिधित्व कैसे कर सकता है, जब उन्हें ऐसी धमकियों का सामना करना पड़ता है।

    चिन्मय दास की गिरफ्तारी

    25 नवंबर को चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद ढाका और भारत में हिंदू और इस्कॉन समुदाय के सदस्यों सहित उनके समर्थकों के बीच व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। चटगाँव में प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिसके परिणामस्वरूप दास को जमानत देने से इनकार किए जाने के बाद सहायक सरकारी अभियोजक सैफुल इस्लाम अलिफ की मौत हो गई।

    दास, जो पहले इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) से जुड़े थे और बांग्लादेश सम्मिलिता सनातनी जागरण जोत के प्रवक्ता थे, को ढाका के हजरत शाहजलाल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक रैली के लिए चटगाँव जाते समय गिरफ़्तार किया गया। उन्हें मंगलवार को जमानत देने से इनकार कर दिया गया और जेल भेज दिया गया।

    इस घटना के बाद बांग्लादेश में तनाव बढ़ गया है और जमानत की सुनवाई के दौरान चटगाँव कोर्ट में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। दास को कोर्ट में पेश नहीं किया गया, जिसके बाद चटगाँव बार एसोसिएशन के नेता और अन्य वकीलों ने विरोध मार्च निकाला।

    भारत ने भी इस घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त की है, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भिक्षु की गिरफ्तारी को लेकर नोबेल पुरस्कार विजेता और अंतरिम सरकार के नेता मुहम्मद यूनुस की आलोचना की और वकील की हत्या की निंदा की।

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