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अल नीनो के बाद कहर मचाने आएगा ला नीना? तूफान, चक्रवात और भारी बारिश के बीच वैज्ञानिकों की चेतावनी

Published: Fri, 30 Oct 2026 07:12 PM (IST)

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि अलनीनो का सबसे तेज दौर अभी आना बाकी है और इसका असर फरवरी 2027 तक बना रह सकता है।

WMO ने अलनीनो के चरम दौर की चेतावनी दी।

WMO ने अलनीनो के चरम दौर की चेतावनी दी।

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन की चर्चाओं के केंद्र में फिलहाल ‘अलनीनो’ छाया हुआ है। तापमान में असामान्य बढ़ोतरी से लेकर तूफान और भारी बारिश तक, इन प्राकृतिक घटना ने मौसम के पैटर्न में कई अप्रत्याशित बदलाव पैदा किए हैं।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि अलनीनो का सबसे तेज दौर अभी आना बाकी है और इसका असर फरवरी 2027 तक बना रह सकता है। लेकिन जब अलनीनो कमजोर पड़ने लगता है, तो प्रशांत महासागर में अक्सर एक बड़ा बदलाव देखने को मिलता है।

असामान्य रूप से गर्म तापमान अचानक ठंडा हो जाता है और ‘ला नीना’ की स्थिति बन जाती है। यह परिवर्तन अपने आप नहीं होता, लेकिन जब होता है तो दुनिया के अलग-अलग महाद्वीपों पर मौसम के पैटर्न को पूरी तरह बदल जाते हैं।

अल नीनो और ला नीना क्या हैं?

ये एक प्राकृतिक जलवायु पैटर्न के विपरीत हैं, जो हर 3-7 साल में आते हैं। अमेरिकी एजेंसी 'नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन' (NOAA) के अनुसार, इन्हें एक साथ ENSO (अल नीनो-सदर्न ऑसिलेशन) कहा जाता है।

मूल स्पेनिश भाषा से अनुवाद करने पर, 'अलनीनो' (El Nino) का अर्थ होता है 'छोटा लड़का'। वहीं, 'ला नीना' (La Nina) का अर्थ है 'छोटी लड़की'।

हालांकि ये दोनों मौसमी घटनाएं प्रशांत महासागर में शुरू होती हैं, लेकिन इनका असर पूरी दुनिया में महसूस किया जाता है, जिससे वैश्विक मौसम में कई तरह के बदलाव आते हैं।

उदाहरण के लिए, प्रशांत महासागर के तापमान में बदलाव से भारत में बारिश, अफ्रीका में सूखा और दुनिया के अन्य हिस्सों में तूफानों पर असर पड़ सकता है।अब क्योंकि इस साल का 'अलनीनो' कई दशकों में सबसे शक्तिशाली है, इसलिए वैज्ञानिक बारीकी से नजर रख रहे हैं कि आगे क्या होता है।

'अलनीनो' और 'ला नीना' मौसम पैटर्न को कैसे प्रभावित करते हैं?

अलनीनो के दौरान, जिसे आमतौर पर 'गर्म चरण' कहा जाता है, सामान्य पूर्वी व्यापारिक हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं या उनकी दिशा उलट जाती है। इससे सतह का गर्म पानी मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में पूर्व की ओर बढ़ने लगता है।

इसके ठंडे रूप, 'ला नीना' (La Niña) की विशेषता यह है कि इसमें व्यापारिक हवाएं (trade winds) सामान्य से अधिक तेज होती हैं।

ये हवाएं गर्म पानी को धकेलकर एशिया और ऑस्ट्रेलिया के पास पश्चिमी प्रशांत महासागर में दूर ले जाती हैं, जबकि दक्षिण अमेरिका के तट पर ठंडा और पोषक तत्वों से भरपूर पानी ऊपर की ओर आ जाता है।

क्या अल नीनो और ला नीना बारी-बारी से आते हैं?

ये ENSO चक्र के हिस्से के रूप में होते हैं, लेकिन इनका कोई तय या अनुमानित समय-क्रम नहीं होता। हालांकि अक्सर ये बारी-बारी से आते हैं, लेकिन कभी-कभी जलवायु प्रणाली में एक ही चरण लगातार आ सकता है। आमतौर पर, 'ला नीना' की तुलना में 'अल नीनो' की घटनाएं अधिक बार होती हैं।

WMO के पूर्वानुमान के अनुसार, 2025 के अंत में शुरू हुआ एक कमजोर 'ला नीना', 2026 की शुरुआत में ही जल्दी खत्म हो गया। 2026 के मध्य तक, स्थितियां पूरी तरह से बदल गईं और एक शक्तिशाली 'अल नीनो' की स्थिति बन गई।

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