सुपर अल नीनो का कहर: भीषण गर्मी से अगले 5 महीनों में होगी साढ़े 3 लाख से ज्यादा लोगों की मौत, भारत में भी असर
'सुपर अल नीनो' के कारण वैश्विक स्तर पर लाखों अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं, जिसमें भारत भी अत्यधिक जोखिम वाले देशों में शामिल है।
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सुपर अल नीनो को लेकर डराने वाला नक्शा (फोटो-क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब/रॉयटर्स)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुपर अल नीनो (El Niño) का खतरा काफी बढ़ता जा रहा है। भारत ही नहीं, बल्कि कई देश इसकी चपेट में हैं। 'क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब' ने अल नीनो के बढ़ते प्रभाव को लेकर एक ऐसा नक्शा जारी किया है, जो पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है।
'क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब' के नक्शे में यह बताया गया है कि प्रशांत महासागर में 'सुपर अल नीनो' के तेज होने पर, गर्मी के कारण कहां सबसे ज्यादा अतिरिक्त मौतें होंगी। वहीं इस नक्शे से सामने आए आंकड़े काफी डराने वाले हैं।
अल-नीनो से कहां होंगी सबसे ज्यादा मौतें?
'अल नीनो हीट मॉर्टेलिटी ट्रैकर' (अल नीनो के कारण गर्मी से होने वाली मौतों का ट्रैकर) नामक इस भयावह नक्शे के मुताबिक, अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच 373,000 से ज्यादा अतिरिक्त लोगों की जान जा सकती है।
यह नक्शा यह भी बताता है कि इनमें से एक-तिहाई मौतें नाइजीरिया, भारत और ब्राजील में होने का अनुमान है। इससे साफ तौर पर सामने आता है कि इसका सीधा असर भारत पर भी पड़ने वाला है।
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3.4 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया पारा
सुपर अल नीनो की यह स्थिति तब बनी है जब मौसम की इस असामान्य घटना ने, जिसे समुद्र की सतह के तापमान से मापा जाता है, पूर्वी-मध्य प्रशांत महासागर के 'नीनो 3.4' क्षेत्र में पानी के तापमान को सामान्य से 3.4 डिग्री सेल्सियस (6 डिग्री फारेनहाइट से ज्यादा) ऊपर पहुंचा दिया है। यह तापमान 18 से 24 अक्टूबर के सप्ताह के दौरान दर्ज किया गया था।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization) के मुताबिक, नवंबर से जनवरी के बीच यह घटना तापमान को सामान्य 'अल नीनो' की तुलना में छह गुना से भी ज्यादा बढ़ा सकती है।
9 महीनों में 857,400 अतिरिक्त मौतें
सुपर अल नीनो को दिखाता हुआ जो यह नक्शा सामने आया है, वो किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है। इसके प्रभाव कितने विनाशकारी होंगे, यह जानने के लिए 1996 से 2005 के औसत हालात की तुलना में, मौजूदा 'अल नीनो' के कारण होने वाली अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया है।
यह रिसर्च दुनियाभर के लगभग 3,700 क्षेत्रों को कवर करता है और इसे हर महीने अपडेट किया जाता है, जिसमें अगले छह महीनों के लिए पूर्वानुमान दिए जाते हैं।
नक्शे के अनुसार, जून 2026 में शुरू होने वाली इस घटना से मार्च 2027 तक गर्मी के कारण 857,400 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं, जो वैज्ञानिकों द्वारा एक महीने पहले लगाए गए अनुमान से 350,000 ज्यादा है।
किन देशों में होंगी सबसे ज्यादा मौतें?
अल नीनो की वजह से इन नौ महीनों की इस अवधि के अनुमान में लगाई गईं आधी से ज्यादा अतिरिक्त मौतें अगले छह महीनों के भीतर होने की आशंका है और भारत पर इसका भयावह रूप देखने को मिल सकता है।
- इस भीषण गर्मी का सबसे बुरा असर नाइजीरिया पर पड़ने का अनुमान है, जहां इस दौरान गर्मी से जुड़ी 56,000 से ज्यादा मौतें हो सकती हैं।
- इस मॉडल के अनुसार नाइजीरिया के ठीक बाद भारत का नंबर आता है, जहां 55,200 लोगों के खतरे में होने की आशंका है।
- वहीं तीसरे नंबर पर इंडोनेशिया है, जहां 29,300 लोगों की जान जाने की आशंका है।
- ब्राजील में 19,500 लोगों की मौत का खतरा मंडरा रहा है।
- सूडान में 14,700 लोगों की जान जा सकती है।
इस नक्शे की मदद से, शोधकर्ता यह अनुमान लगा सकेंगे कि यह समस्या कहां सबसे गंभीर है और सरकारें नुकसान को कम करने के लिए क्या कदम उठा सकती हैं।
अल नीनो से निपटने के लिए तैयार रहने की जरूरत
क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के सह-संस्थापक और यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो में अर्थशास्त्र के मिल्टन फ्रीडमैन डिस्टिंग्विश्ड सर्विस प्रोफेसर, माइकल ग्रीनस्टोन ने कहा, 'हमारा शोध नई पूर्वानुमान क्षमताओं का इस्तेमाल करके हमारे सामने मौजूद सबसे जरूरी सवालों में से एक का जवाब देता है। अत्यधिक गर्मी के कारण कहां लोगों की जान जाने का खतरा है?'
माइकल ग्रीनस्टोन ने आगे कहा, 'अत्यधिक गर्मी के जानलेवा प्रभावों का पहले से अनुमान लगा पाना एक बड़ा कदम है। इसका मतलब यह है कि हम यह पहचान सकते हैं कि लोग कहां सबसे ज्यादा खतरे में हैं और इससे नीति-निर्माताओं को लोगों की जान जाने से पहले कदम उठाने का मौका मिल सकता है।'
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि जून के बाद से 'अल नीनो' (El Niño) के कारण 484,500 अतिरिक्त मौतें हुई हैं। इसके कुछ असर इस तरह दिखे हैं- इंडोनेशिया में जंगलों में आग लगना, भारत में अहम मानसूनी बारिश का न होना और मध्य अमेरिका में सूखा पड़ना।
वहीं अमेरिका में, पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में और अधिक तूफान और बारिश होने की आशंका है, जबकि न्यूयॉर्क पर इसका कोई खास असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।
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