विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

इस बार सर्दी में भी छूटेंगे पसीने, प्रशांत महासागर में हो रही हलचल; चरम पर पहुंचेगा अल नीनो

Published: Fri, 23 Oct 2026 07:55 PM (GMT+05:30)

अल नीनो के दिसंबर में चरम पर पहुंचने की संभावना है, जिससे भारत में इस बार सामान्य से कम सर्दी पड़ने का अनुमान है।

अल नीनो का सर्दियों पर पड़ सकता है असर

अल नीनो का सर्दियों पर पड़ सकता है असर

HighLights

  1. दिसंबर में अलनीनो अपने चरम पर, सर्दी कम होने की संभावना।

  2. उत्तरी भारत में कभी-कभी शीतलहर, पर लंबी ठंड नहीं।

  3. पश्चिमी विक्षोभ से पहाड़ों पर बर्फबारी, मैदानी इलाकों में ठंड।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। दिसंबर में अल नीनो अपने चरम पर पहुंच सकता है, जिसके प्रभाव से नवंबर से जनवरी के बीच भारत में सामान्य से कम सर्दी पड़ने की संभावना है। हालांकि उत्तरी हिस्से में ठंड की तीव्रता पश्चिमी विक्षोभ, पहाड़ों पर बर्फबारी और उत्तर-पश्चिमी हवाओं पर निर्भर करती है।

इस दौरान दिल्ली समेत पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान एवं बिहार में कभी-कभी शीतलहर की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता।

मैदानों में तापमान कुछ समय के लिए गिर सकता है। फिर भी मौसम विज्ञानियों का मानना है कि इस बार लंबे समय तक कड़ाके की ठंड पड़ने की आशंका काफी कमजोर है।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के ताजा आकलन में प्रशांत महासागर के तापमान में लगातार वृद्धि से दक्षिण एशिया के बड़े हिस्से में दिसंबर से जनवरी के दौरान अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य या उससे ऊपर रह सकता है। इससे सर्दी की शुरुआत गर्म रह सकती है।

डब्ल्यूएमओ के अनुसार नवंबर से जनवरी के दौरान प्रशांत महासागर में अलनीनो की स्थिति और मजबूत हो सकती है। कई जलवायु माडल संकेत दे रहे हैं कि दिसंबर में यह चरम पर पहुंच सकता है। समुद्र की सतह के तापमान में परिवर्तन का असर मौसम पर पड़ता है।

भारत में भी इसका प्रभाव तापमान और वर्षा के स्वरूप पर दिखाई दे सकता है।स्काईमेट के उपाध्यक्ष महेश पलावत का मानना है कि प्रशांत महासागर में अलनीनो लगातार मजबूत हो रहा है, जिसका प्रभाव फरवरी तक बना रह सकता है। हालांकि इसका असर देश के सभी हिस्सों में एक समान नहीं होगा।

हिंद महासागर की स्थिति, पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसमी परिस्थितियां भी ठंड की तीव्रता तय कर सकती हैं।अलनीनो के कारण भारत में सर्दी कमजोर पड़ने की संभावना का मतलब यह नहीं कि सर्द हवाएं नहीं चलेंगी। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने पर उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी भी हो सकती है।

मैदानी इलाकों में ठंडी हवाएं चलने और तापमान गिरने की स्थिति बन सकती है। इसलिए कुछ दिनों तक तेज ठंड पड़ने की संभावना बनी रहेगी। लेकिन इस बार लंबे समय तक कड़ाके की सर्दी पड़ने का अनुमान नहीं है।

हालांकि आईएमडी का आधिकारिक पूर्वानुमान आना अभी बाकी है, जो सामान्य तौर पर नवंबर में जारी होता है। मगर उपलब्ध संकेत बताते हैं कि इस बार सर्दी सामान्य से गर्म रह सकती है।

यह भी पढ़ें- अल नीनो का डबल अटैक: गर्मी, बारिश के बाद अब सर्दियों पर संकट; भारत समेत दुनियाभर में अलर्ट