अल नीनो ने बिगाड़ा प्रशांत महासागर का तापमान, भारत पर क्या पड़ेगा प्रभाव?
प्रशांत महासागर में अल नीनो ने तापमान का ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जिससे वैश्विक मौसम चक्र और भारत के मानसून पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।
-1792838286649_m.webp)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रशांत महासागर ने तापमान का एक बड़ा रिकॉर्ड पार कर लिया है। अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) के आंकड़ों के मुताबिक, 22 अक्टूबर 2026 को मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र की सतह का तापमान लगभग 30°C तक पहुंच गया।
यह इलाका वैज्ञानिकों द्वारा 'अल नीनो' पर नजर रखने के लिए सबसे अहम माना जाता है। उपलब्ध ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स में तापमान का इस स्तर तक पहुंचना पहली बार देखा गया है, जिसने भारत सहित वैश्विक मौसम चक्र को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
अल नीनो क्यों तोड़ रहा है सारा रिकॉर्ड?
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है, जिसमें मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इस गर्माहट का सीधा असर हवाओं और मानसूनी बादलों की चाल पर पड़ता है, जिससे समुद्र से हजारों किलोमीटर दूर के मौसम का मिजाज भी बदल जाता है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के अनुसार, इस बार का अल नीनो असामान्य रूप से शक्तिशाली है। नीनो 3.4 कहे जाने वाले प्रमुख समुद्री क्षेत्र में औसत तापमान जून में सामान्य से 1.6°C अधिक था, जो अगस्त तक बढ़कर 2.5°C अधिक हो गया।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अक्टूबर से दिसंबर के दौरान यह विसंगति सामान्य से करीब 3.7°C अधिक तक पहुंच सकती है। यह स्तर नवंबर 2015 से जनवरी 2016 के बीच दर्ज किए गए 2.6°C के पिछले सर्वकालिक रिकॉर्ड से भी कहीं ज्यादा है।
भारत पर क्या पड़ेगा इसका प्रभाव?
भारत के लिए लगातार मजबूत होता अल नीनो बारिश की कमी और बढ़ते तापमान के रूप में चिंता लेकर आया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, वर्ष 2026 में देश का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से लगभग 13% कम बारिश के साथ समाप्त हुआ है।
WMO के नवीनतम पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले महीनों में दक्षिण एशिया के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। इसके अलावा, अक्टूबर से दिसंबर के दौरान मध्य और दक्षिणी प्रायद्वीपीय दक्षिण एशिया में सामान्य से कम वर्षा होने का जोखिम बना हुआ है।
2027 की शुरुआत तक जारी रह सकता है असर
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत का मौसम केवल अल नीनो पर ही निर्भर नहीं करता, बल्कि अन्य स्थानीय और जलवायु कारक भी इसमें भूमिका निभाते हैं। फिर भी, प्रशांत महासागर का अत्यधिक गर्म होना भारी गर्मी और असामान्य मौसम की घटनाओं के खतरे को काफी बढ़ा देता है।
इस अल नीनो का असर वर्ष 2027 की शुरुआत तक बने रहने का अंदेशा है। वैज्ञानिक लगातार समुद्र की स्थितियों पर नजर रख रहे हैं ताकि आने वाले महीनों में वैश्विक और क्षेत्रीय मौसम पर पड़ने वाले प्रभावों का सटीक आकलन किया जा सके।
