नई दिल्‍ली (जागरण स्‍पेशल)। कभी आतंकी ओसामा बिन लादेन का इंटरव्यू लेकर सुर्खियां बटोरने वाले सऊदी के पत्रकार जमाल खाशोगी की नृशंस हत्‍या की पूरी दुनिया में निंदा हो रही है। कुछ समय पहले उनके अचानक से लापता होने की खबर सामने आई थी। इसके बाद अमेरिका ने सऊदी अरब को चेतावनी भी दी थी कि यदि उसने खाशोगी के साथ कुछ गलत किया तो वह बर्दाश्‍त नहीं करेगा। लेकिन अमेरिका की कोई धमकी काम नहीं आई। काफी समय से खाशोगी और सऊदी अरब के शासकों के बीच तनाव चल रहा था। इसकी वजह यह थी उन्‍होंने सऊदी अरब के शासकों की कई गलतियों पर अंगुली उठाई थी। आपको बता दें कि 1987 और 1995 में उन्‍होंने आतंकी ओसामा बिन लादेन का इंटरव्‍यू किया था। खाशोगी की हत्‍या के बाद बदले माहौल में ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने अमेरिका का साथ देते हुए 22 से रियाद में शुरू हो रहे फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव समिट का बहिष्‍कार कर दिया है।

कौन हैं जमाल खाशोगी
जमाल सऊदी में लंबे वक्त से पत्रकारिता कर रहे हैं। सुन्नी शासकों के के खिलाफ लिखने की वजह से वह हमेशा ही विवादों में रहे। जब सऊदी की कमान क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के हाथों में आई तो वह खुद निर्वासन लेकर अमेरिका चले गए थे। फिलहाल वह वॉशिंगटन पोस्ट के लिए लिख रहे थे। अखबार ने उनके आखिरी आर्टिकल को भी अपने ताजा अंक में प्रकाशित किया है।

सऊदी दूतावास से गायब हुए थे खाशोगी
जमाल हाल ही में सऊदी के वाणिज्य दूतावास गए थे जिसके बाद वह गायब हो गए। वह अपनी तुर्की की मंगेतर से शादी करना चाहते थे। इसके लिए उन्‍हें कागजी कार्रवाई करनी थी जिसको लेकर वह 28 सितंबर को तुर्की में स्थित सऊदी दूतावास गए। दूतावास की तरफ से उन्हें दोबारा दो अक्टूबर को बुलाया गया था। दो अक्‍टूबर को वह अपनी मंगेतर के साथ दूतावास पहुंचे थे। लेकिन मंगेतर दूतावास के बाहर उनका इंतजार करती रही वह दूतावास से बाहर ही नहीं निकले। इसको लेकर सऊदी और तुर्की दोनों में तनाव बढ़ गया है। तुर्की अधिकारियों का आरोप है कि सऊदी ने दूतावास में ही जमाल को मार दिया है। उन्होंने अपने पास कुछ विडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग होने का दावा भी किया है। वहीं सऊदी अरब ने इसमें किसी तरह का हाथ होने का खंडन किया है।

हत्‍या से पहले दी गई यातना
तुर्की मीडिया के मुताबिक इस्तांबुल स्थित रियाद के वाणिज्य दूतावास के भीतर सऊदी पत्रकार जमाल खाशोगी की हत्या से पहले उन्हें यातना दी गई। अखबार ने कहा कि उसने इससे संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनी है। येनी सफाक अखबार ने दावा किया है कि दूतावास में खाशोगी से पूछताछ के दौरान उनकी अंगुलियां काट दी गईं।उनका सिर धड़ से अलग कर शरीर के टुकड़े कर दिए गए। तुर्की का यह भी कहना है कि खाशोगी की हत्‍या में सऊदी अधिकारियों की विशेष टीम का हाथ है। इतना ही नहीं वाशिंगटन पोस्ट ने भी तुर्की की तरफ एक ऑडियो विडियो का जिक्र किया है। दरअसल, जिस ऑडियो विडियो की बात यहां पर की जा रही है उसके बारे में तर्क यह दिया जा रहा है कि यातना के समय खाशोगी ने एप्‍पल वाच पहन रखी थी, जिसमें यह सबकुछ रिकॉर्ड हो गया। हालांकि इस बारे में अभी तस्‍वीर पूरी तरह से साफ नहीं हो पाई है।

टेप में सुनाई दी ये बातें
तुर्की के अखबार येनी सफाक के मुताबिक खाशोगी को यातना के दौरान एक टेप में इस्तांबुल में सऊदी अरब के वाणिज्य दूत मोहम्मद अल ओतैबी को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि ‘यह काम बाहर करो। आप मुझे परेशानी में डालने जा रहे हो। अखबार का यह भी कहना है कि एक दूसरे टेप में एक अंजान व्यक्ति ओतैबी से यह कहते सुनाई देता है, ‘यदि तुम जीवित रहना चाहते हो तो जब तुम सऊदी अरब आओ तो चुप रहना।’ अखबार ने यह नहीं बताया कि ये टेप किस तरह सामने आए और उसे कैसे हासिल हुए।

इनपर है शक
खाशोगी की गुमशुदगी से लेकर उनकी हत्‍या तक के बीच एक व्‍यक्ति पर शक की सूंई जा रही है। पहला संदिग्ध मेहर अब्दुल अजीज मुतरेब एक डिप्लोमेट है जिसे 2007 में लंदन में सऊदी दूतावास में भेजा गया था। मुतरेब को प्रिंस सलमान के साथ विमान से उतरते हुए फोटो में भी देखा गया। अल- हरबी और अलजहरानी की पहचान सऊदी रॉयल गार्ड के सदस्य के रूप में की गई है। एक अन्‍य संदिग्ध सलाह-अल-तुबाइगी एक ऑटॉप्सी एक्सपर्ट है जिसकी पहचान उसके ट्विटर एकाउंट से 'सऊदी साइंटिफिक काउंसिल ऑफ फोरेंसिक' के प्रमुख के रूप में हुई है।

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Posted By: Kamal Verma

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