क्या इजरायल की सत्ता में फिर वापसी करेंगे नेतन्याहू? अगर सरकार बनाने में नाकाम रहे आइजनकोट तो क्या होगा
इजरायल के पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजनकोट को राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने अगली सरकार बनाने का न्योता दिया है। बहुमत न होने के कारण आइजनकोट के सामने कई चुनौतियां हैं।


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, यरुशलम। इजरायल के पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजनकोट को राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने अगली सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है।
27 अक्टूबर को हुए चुनावों में किसी भी पार्टी या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। हालांकि, अपने गठबंधन के पास जरूरी संख्याबल न होने के कारण आइजनकोट के सामने कई गंभीर राजनीतिक चुनौतियां हैं।
उनके पास अरब दलों के बाहरी समर्थन से अल्पमत सरकार बनाने, अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स दलों से समझौता करने या व्यापक राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने जैसे विकल्प हैं।
यदि वह दी गई 42 दिनों की समयसीमा के भीतर सरकार बनाने में विफल रहते हैं, तो कार्यवाहक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सरकार बनाने का एक और मौका मिल सकता है।
अरब दलों के सहारे अल्पमत सरकार बनाने का विकल्प
120 सदस्यीय इजरायली संसद नेसेट में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों के बहुमत की जरूरत होती है। फिलहाल आइजनकोट की यशार पार्टी और उनके सहयोगी दलों मध्य-दक्षिणपंथी टुगेदर पार्टी, द डेमोक्रेट्स और एविग्डोर लीबरमैन की इजरायल अवर होम के पास कुल 48 सीटें हैं।
वहीं, इजरायल के दो अरब दलों के पास कुल 19 सीटें हैं। दोनों अरब दलों ने आइजनकोट को समर्थन देने की बात कही है ताकि नेतन्याहू की सत्ता में वापसी को रोका जा सके। यदि ये दल औपचारिक रूप से सरकार में शामिल हुए बिना बाहर से समर्थन देते हैं, तो गठबंधन का आंकड़ा 67 तक पहुंच सकता है।
हालांकि, इस रास्ते में कई बड़ी राजनीतिक बाधाएं हैं। आइजनकोट ने चुनाव प्रचार के दौरान अरब दलों के साथ सरकार न बनाने का वादा किया था। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद जनता के बदले रुख के कारण इस वादे से पीछे हटना आसान नहीं होगा।
इसके अलावा, सहयोगी नेता एविग्डोर लीबरमैन ने भी अरब दलों के समर्थन से सरकार बनाने से साफ इनकार किया है, जबकि नेतन्याहू पहले से ही अरब दलों पर निर्भर किसी भी सरकार के विरोध में अभियान चला रहे हैं। इससे पहले 2021 में पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने 'राअम' पार्टी के समर्थन से सरकार बनाई थी, लेकिन वह गठबंधन केवल 18 महीने ही चल सका था।
क्या अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स दल देंगे आइजनकोट को बहुमत?
आइजनकोट के पास दूसरा विकल्प इजरायल के दो अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी दलों का समर्थन लेना है, जिनके पास कुल 13 सीटें हैं। इनके समर्थन से आइजनकोट का खेमा 61 सीटों का जादुई आंकड़ा आसानी से पार कर सकता है।
लेकिन यहां सबसे बड़ा पेंच अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी छात्रों को मिलने वाली अनिवार्य सैन्य सेवा की छूट का है। इजरायल में एक बड़ा वर्ग इस छूट का कड़ा विरोध करता है, और आइजनकोट व लीबरमैन भी इसके खिलाफ रहे हैं। हालांकि, लीबरमैन ने हाल ही में लचीला रुख दिखाते हुए समझौते के संकेत दिए हैं और कहा है कि आपको सब कुछ मनमुताबिक नहीं मिल सकता।
चुनाव के बाद दोनों रूढ़िवादी दलों का रुख भी बंटा हुआ है, यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म ने किसी भी उम्मीदवार को समर्थन देने से परहेज किया है, जबकि शास पार्टी ने नेतन्याहू का समर्थन किया है।
यदि आइजनकोट विफल रहे तो क्या होगा?
आइजनकोट को सरकार बनाने के लिए अधिकतम 42 दिनों का समय मिला है। यदि वह इस अवधि में जरूरी समर्थन नहीं जुटा पाते हैं, तो राष्ट्रपति हर्जोग संभवतः नेतन्याहू को सरकार बनाने का मौका देंगे।
नेतन्याहू के धार्मिक-राष्ट्रवादी गठबंधन की सीटें घटकर 64 से 53 रह गई हैं। इसके बावजूद, नेतन्याहू विरोधी खेमे के सांसदों को तोड़कर अपने पाले में लाने की रणनीति अपना सकते हैं।
नेतन्याहू ने 2022 के चुनावों से पहले भी इसी तरह विरोधी खेमे में सेंध लगाकर सरकार गिराने में कामयाबी हासिल की थी। यदि उन्हें मौका मिलता है, तो उन्हें संसद में बहुमत साबित करने के लिए नए सहयोगियों की तलाश करनी होगी।
क्या बन सकती है राष्ट्रीय एकता सरकार?
यदि आइजनकोट को अरब या अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स दलों का समर्थन नहीं मिलता है, तो एक विकल्प राष्ट्रीय एकता सरकार का भी हो सकता है। इसमें यशार, टुगेदर, इजरायल अवर होम और नेतन्याहू की लिकुड पार्टी शामिल हो सकती हैं। लिकुड 27 सीटों के साथ संसद में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इन सभी दलों के मिलने से गठबंधन के पास 67 सीटें हो जाएंगी, जिससे एक मजबूत बहुमत मिल जाएगा।
फिलहाल इसकी संभावना बेहद कम नजर आती है, क्योंकि इसके लिए आइजनकोट और उनके सहयोगियों को नेतन्याहू को सत्ता से हटाने का अपना मुख्य चुनावी वादा छोड़ना पड़ेगा। वहीं नेतन्याहू को अपने पारंपरिक धुर-दक्षिणपंथी और रूढ़िवादी सहयोगियों से दूरी बनानी पड़ेगी। हालांकि, लंबी राजनीतिक अनिश्चितता या ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव की स्थिति में ये दोनों प्रतिद्वंद्वी खेमे साथ आने को मजबूर हो सकते हैं।
क्या इजरायल में फिर से होंगे चुनाव?
यदि आइजनकोट और नेतन्याहू दोनों ही सरकार बनाने में नाकाम रहते हैं, तो संसद किसी अन्य उम्मीदवार को नामित कर सकती है, जिसके लिए लगभग 100 दिनों का समय मिलता है। अगर तब भी कोई हल नहीं निकलता, तो देश को एक बार फिर नए आम चुनावों की ओर जाना पड़ेगा।
राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने नए चुनावों को लेकर पहले ही आगाह कर दिया है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से खुले दिमाग के साथ बातचीत करने की अपील की है ताकि देश को बार-बार होने वाले चुनावों से बचाया जा सके।
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