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    हिजबुल्लाह, हूती और हमास पर Israel ने बरपाया कहर, लेबनान सीमा पर इजरायली रिजर्व ब्रिगेड की तैनाती शुरू

    By Agency Edited By: Piyush Kumar
    Updated: Mon, 30 Sep 2024 04:33 AM (IST)

    Israel Hezbollah War हाल के दो हफ्तों के इजरायली हमलों में लेबनान में 1030 लोग मारे गए हैं। इनमें ईरान समर्थित सशस्त्र संगठन हिजबुल्ला के नेता और कमांडर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त इजरायली हमलों से बचने के लिए लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। लेबनान के प्रधानमंत्री नजीब मिकाती ने जल्द ही यह संख्या बढ़कर 10 लाख होने की आशंका जताई है।

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    Israel Hezbollah War: इजरायल एक साथ हिजबुल्लाह, हमास और हूती पर कहर बरपा रहा है।(फोटो सोर्स: जागरण)

    रॉयटर बेरूत। इजरायल का ईरान समर्थित सशस्त्र संगठनों पर कहर जारी है। रविवार को इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमला कर 45 लड़ाके व 14 स्वास्थ्यकर्मी मारे। हिजबुल्लाह के एक और सीनियर कमांडर को मार गिराया। नबील कौक नाम का यह नेता हिजबुल्ला की केंद्रीय परिषद का उप प्रमुख था।

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    दो दिनों से इजरायल पर मिसाइलें छोड़ रहे यमन के हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर दर्जनों इजरायली विमानों ने बमबारी की है, वहां अभी तक चार लोगों के मारे जाने की सूचना है। इसी प्रकार से गाजा पट्टी पर हमला कर 11 फलस्तीनियों को मारा गया। अमेरिका और चीन ने इजरायल से अब हमलों को रोकने के लिए कहा है।

    लेबनान में हिजबुल्ला के दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया गया

    ईरान ने मुस्लिम देशों से मदद की गुहार लगाई है तो ईसाई धर्मगुरु पोप फ्रांसिस ने लेबनान पर इजरायल के हमलों को नैतिकता के सिद्धांतों से परे बताया है। इजरायली वायुसेना ने रविवार को भी लेबनान में हिजबुल्ला के दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया।

    इन हमलों में दक्षिणी लेबनान के शहर आईन देलेब में 24 लड़ाके बालबेक हरमेल शहर में 21 लड़ाके मारे गए। जबकि इजरायली हमलों में लेबनान में 14 स्वास्थ्यकर्मी मरे हैं। जवाब में हिजबुल्ला ने भी इजरायली क्षेत्रों में रॉकेट और मिसाइल दागे लेकिन उनमें से ज्यादातर को डिफेंस सिस्टम ने आकाश में ही नष्ट कर दिया।

    लेबनान सीमा पर इजरायली सेना की तैनाती शुरू

    हिजबुल्ला के हमलों से इजरायल में किसी के मारे जाने की सूचना नहीं है। इजरायली विमानों ने हूती के कब्जे वाले यमन में बिजलीघरों और रास ईसा व होदेदा के बंदरगाहों को निशाना बनाया है। इस बीच इजरायल ने सेना की रिजर्व ब्रिगेड की लेबनान सीमा पर तैनाती शुरू कर दी है। कहा है कि वह सभी विकल्पों को ध्यान में रखकर चल रहा है और हिजबुल्ला के प्रभाव वाले लेबनानी क्षेत्र में जमीनी कार्रवाई की जा सकती है।

    हाल के दो हफ्तों के इजरायली हमलों में लेबनान में 1,030 लोग मारे गए हैं। इनमें ईरान समर्थित सशस्त्र संगठन हिजबुल्ला के नेता और कमांडर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त इजरायली हमलों से बचने के लिए लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। लेबनान के प्रधानमंत्री नजीब मिकाती ने जल्द ही यह संख्या बढ़कर 10 लाख होने की आशंका जताई है।

    नसरुल्ला का शव मिला, कोई जख्म नहीं

    हिजबुल्ला मुख्यालय के मलबे से संगठन के प्रमुख रहे हसन नसरुल्ला का शव मिल गया है। पता चला है कि नसरुल्ला के शव पर जख्म का कोई निशान नहीं है। माना जा रहा है कि शुक्रवार शाम के इजरायली हमले में बमों की तेज आवाज से उसकी मौत हुई। शव के अंतिम संस्कार के विषय में हिजबुल्ला ने अभी कुछ नहीं कहा है।

    उल्लेखनीय है कि इजरायल ने शुक्रवार को 80 टन वजन के बम हिजबुल्ला के मुख्यालय पर बरसाए थे जिससे वह पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था और जमीन से 20 मीटर नीचे बने बंकर में नसरुल्ला, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के डिप्टी कमांडर और पांच अन्य मारे गए थे।

    अमेरिका के अतिरिक्त सैनिक और हथियार पहुंचे

    हिजबुल्लाह प्रमुख नसरुल्ला की मौत से पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव को भांपते हुए अमेरिका ने वहां पर अतिरिक्त सैनिक और हथियार भेजे हैं। विदित हो कि पश्चिम एशिया में अमेरिका के कई सैन्य अड्डे हैं जहां पर पहले से ही 40 हजार सैनिक और हथियार तैनात हैं। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि यह समय अब संघर्ष को रोके जाने का है। वैसे बाइडन ने शनिवार को नसरुल्ला को मारे जाने की कार्रवाई का समर्थन किया था।

    महीनों की तैयारी के बाद हुआ नसरुल्ला पर वार

    हिजबुल्लाह प्रमुख हसन नसरुल्ला को घेरने की कोशिश में इजरायल महीनों से जुटा था। कई बार घात लगाई गई लेकिन नसरुल्ला निशाने पर नहीं आया, इसके चलते आखिरी समय पर हमले की योजना को रद करना पड़ा।

    शुक्रवार (27 सितंबर) को बेरूत स्थित हिजबुल्ला मुख्यालय में नसरुल्ला की मौजूदगी की पुष्ट सूचना इजरायल को मिली और उसके बाद देर न करते हुए अमेरिका दौरे पर गए प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से अनुमति ली गई और लड़ाकू विमानों से 80 टन बम बरसाकर सबसे बड़े दुश्मन को मार डाला गया। 

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