'ईरान को कई देश देंगे न्यूक्लियर हथियार... ख्वाब से बाहर निकलें ट्रंप', पुतिन के करीबी का जंग के बीच चौंकाने वाला दावा
Israel Iran War: अमेरिकी हवाई हमलों के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मिलने मॉस्को जा रहे हैं। ईरान ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए कूटनीतिक बातचीत फिर से शुरू करने से इनकार कर दिया है। रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने भी अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि इन हमलों से ईरान का परमाणु कार्यक्रम नहीं रुकेगा और मध्य पूर्व में तनाव बढ़ेगा, जिससे ईरान की सरकार और मजबूत हुई है।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इस्तांबुल में इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) की बैठक के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ऐलान किया कि वह सोमवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने मॉस्को जाएंगे। यह फैसला अमेरिका की ओर से ईरान के तीन अहम परमाणु ठिकानों पर हवाई हमलों के बाद लिया गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन हमलों का आदेश दिया। ट्रंप प्रशासन ने इन हमलों के ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए जरूरी कदम बताया है। अराघची ने इन हमलों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है।
अराघची ने कहा, "रूस ईरान का दोस्त है, हम हमेशा एक-दूसरे से सलाह करते हैं। मैं आज दोपहर मॉस्को जा रहा हूं ताकि कल सुबह रूसी राष्ट्रपति से गंभीर बातचीत कर सकूं।" उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत अपनी रक्षा का अधिकार इस्तेमाल करेगा।
मेदवेदेव का ट्रंप पर हमला
मॉस्को में रूस के पूर्व राष्ट्रपति और सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने ट्रंप पर तीखा हमला बोला। उन्होंने टेलीग्राम पर लिखा, "ट्रंप शांति का वादा लेकर आए थे, लेकिन अब अमेरिका को मध्य पूर्व में एक नई जंग में झोंक चुके हैं।"
मेदवेदेव ने कहा कि अमेरिकी हमलों से कोई बड़ा सैन्य नतीजा नहीं निकला। परमाणु ईंधन के महत्वपूर्ण ढांचे को या तो नुकसान नहीं हुआ या बहुत कम नुकसान हुआ। परमाणु सामग्री का संवर्धन और अब हम साफ कह सकते हैं, परमाणु हथियारों का निर्माण जारी रहेगा।
मेदवेदेव ने दावा किया कि कई देश ईरान को अपने परमाणु हथियार देने को तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने इन देशों के नाम नहीं बताए। उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल की जनता अब हर वक्त डर में जी रही है, जहां कई इलाकों में विस्फोट हो रहे हैं। उन्होंने कहा, "अमेरिका अब एक नए संघर्ष में फंस चुका है, और जमीनी सैन्य कार्रवाई की संभावना भी बन सकती है।"
'ईरान बातचीत दोबारा शुरू नहीं करेगा'
अराघची ने साफ कहा कि मौजूदा हालात में ईरान कोई कूटनीतिक बातचीत दोबारा शुरू नहीं करेगा। उन्होंने कहा, "हम कूटनीति के बीच में थे। हम अमेरिका के साथ बातचीत कर रहे थे जब इजराइल ने सब कुछ तबाह कर दिया।"
What have the Americans accomplished with their nighttime strikes on three nuclear sites in Iran?
— Dmitry Medvedev (@MedvedevRussiaE) June 22, 2025
1. Critical infrastructure of the nuclear fuel cycle appears to have been unaffected or sustained only minor damage.
उन्होंने बताया कि हमले से दो दिन पहले वह यूरोपीय देशों के साथ जिनेवा में बातचीत कर रहे थे और फिर, इस बार अमेरिकियों ने सब कुछ उड़ा दिया। तो यह ईरान नहीं, बल्कि अमेरिका था जिसने कूटनीति को धोखा दिया।
अराघची ने ट्रंप प्रशासन पर आरोप लगाया कि उसने खुद को किसी भी शांति पहल के लिए अयोग्य साबित कर दिया। उन्होंने साबित कर दिया कि वे कूटनीति के लोग नहीं हैं और वे सिर्फ धमकियों और ताकत की भाषा समझते हैं। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।
मेदवेदेव का ईरान के समर्थन में बयान
वहीं मेदवेदेव ने कहा कि हमलों से ईरान की राजनीतिक सरकार न केवल बची रही, बल्कि और मजबूत हो गई है। उन्होंने कहा, "ईरान का राजनीतिक तंत्र बच गया और शायद अब वह और भी मजबूत हो गया है। जनता अपने देश के धार्मिक नेतृत्व के इर्द-गिर्द इकट्ठा हो रही है, जिसमें वे लोग भी शामिल हैं जो पहले इसके खिलाफ थे या उदासीन थे।"
नोबेल को लेकर ट्रंप का जिक्र करते हुए मेदवेदेव ने कहा, "ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार धरा का धरा रह जाएगा।"
उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी हमलों ने मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है, जिसके नतीजे पूरी दुनिया पर असर डाल सकते हैं। ईरान और रूस की इस दोस्ती और मजबूत रुख से साफ है कि आने वाले दिन वैश्विक राजनीति के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
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