मिडिल ईस्ट में 3,500 सैनिकों की एंट्री, क्या अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट और खार्ग द्वीप में कर रहा हमले की तैयारी?
पश्चिम एशिया में तनाव जारी है, जहां ईरान सीजफायर को तैयार नहीं है और अमेरिका ने अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाई ...और पढ़ें
HighLights
यूएसएस त्रिपोली पर 3,500 अमेरिकी मरीन मिडिल ईस्ट पहुंचे
पेंटागन ईरान में कई हफ्तों के युद्ध की तैयारी कर रहा है
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। एक ओर जहां ईरान किसी भी कीमत पर सीजफायर के लिए तैनात नहीं है, तो वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने भी मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य उपस्थिति और मजबूत कर दी है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने घोषणा की कि यूएसएस त्रिपोली पर सवार लगभग 3,500 सैनिक और मरीन के अलावा ट्रांसपोर्ट और स्ट्राइक फाइटर विमान, साथ ही एम्फीबियस असॉल्ट और टैक्टिकल संसाधनशनिवार को सेंटकॉम क्षेत्र में पहुंच गए हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या अमेरिका अब ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप और होर्मुज स्ट्रेट पर सैन्य हमले की तैयारी में है?
कई हफ्तों तक चलने वाली युद्ध की तैयारी
वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन ईरान में कई हफ्तों तक चलने वाले अभियानों की तैयारी कर रहा है। इसमें खारग द्वीप और होर्मुज स्ट्रेट पर हमले हो सकते हैं। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी तक किसी भी तैनाती को मंजूरी नहीं दी है।
वाशिंगटन पोस्ट ने ज्ञात अधिकारियों के हवाले से बताया कि कोई भी जमीनी अभियान पूर्ण पैमाने पर आक्रमण नहीं होगा, बल्कि इसमें विशेष अभियान बलों और पारंपरिक पैदल सेना के सैनिकों द्वारा छापे शामिल होंगे।
आगे बढ़ चुकी योजना
इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका जमीनी सैनिकों के बिना अपने सभी उद्देश्यों को प्राप्त कर सकता है, लेकिन योजना काफी आगे बढ़ चुकी है, और यह अंतिम समय की योजना नहीं है।
पश्चिम एशिया में अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि यूएसएस त्रिपोली पर सवार अमेरिकी नौसैनिक और मरीन 27 मार्च को अमेरिकी सेंट्रल कमांड के जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में पहुंचे। ये अतिरिक्त बल क्षेत्र में पहले से तैनात करीब 50,000 अमेरिकी सैनिकों को मजबूती प्रदान करेंगे।
यह यूएसएस त्रिपोली हमलावर जहाज परिवहन, स्ट्राइक फाइटर विमानों, उभयचर हमले और सामरिक संपत्तियों के साथ मरीन सैनिकों को ले जाने में सक्षम है।
यह भी पढ़ें- तेहरान का अभेद्य किला... इसलिए होर्मुज जलडमरूमध्य में चलती है ईरान की बादशाहत
यह भी पढ़ें- ईरान युद्ध: 30 दिन, 4500 मौतें, गंभीर ऊर्जा संकट की गिरफ्त में दुनिया
