विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

ईरान युद्ध: 30 दिन, 4500 मौतें, गंभीर ऊर्जा संकट की गिरफ्त में दुनिया

Published: Sun, 29 Mar 2026 06:27 AM (GMT+05:30)

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने तेहरान, मीनाब और कई अन्य शहरों पर हवाई हमले शुरू किए। ईरान की ...और पढ़ें

ईरान युद्ध: 30 दिन, 4500 मौतें, गंभीर ऊर्जा संकट की गिरफ्त में दुनिया (फोटो- रॉयटर)

ईरान युद्ध: 30 दिन, 4500 मौतें, गंभीर ऊर्जा संकट की गिरफ्त में दुनिया (फोटो- रॉयटर)

HighLights

  1. संघर्ष में अब तक एक दर्जन से अधिक देशों में 4500 से अधिक लोग मारे गए हैं

  2. ईरान के दो प्रमुख इस्पात संयंत्र हवाई हमलों में क्षतिग्रस्त हो गए हैं

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए शुरू किए गए युद्ध को एक महीने पूरे हो चुके हैं। अब यह युद्ध अमेरिका-इजरायल के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है, क्योंकि दोनों देशों की अपेक्षाओं के विपरीत, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई और अन्य शीर्ष सैन्य एवं खुफिया अधिकारियों की हत्या के बावजूद, ईरान कड़ा प्रतिरोध कर रहा है। आइए 28 फरवरी को शुरू हुए इस युद्ध के घटनाक्रमों पर नजर डालते हैं।

हवाई हमले व ईरान का जवाब

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने तेहरान, मीनाब और कई अन्य शहरों पर हवाई हमले शुरू किए। ईरान की प्रतिक्रिया त्वरित और व्यापक रही, जिसने इजरायल और खाड़ी देशों कुवैत, यूएई, सऊदी अरब और जार्डन पर मिसाइलें और ड्रोन दागे।

चार हजार से ज्यादा मौतें

इस संघर्ष में अब तक एक दर्जन से अधिक देशों में 4,500 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें ईरान के 1,900 लोग शामिल हैं। ईरान के अलावा, इस संघर्ष ने इजरायल और हिज्बुल्ला के बीच के बीच भी घातक वार और पलटवार को जन्म दिया है, जिससे लेबनान में 1,100 से अधिक लोग मारे गए हैं और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। अबू धाबी में ड्रोन हमले में दो लोगों की मौत हो गई थी।

इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान

ईरानी मीडिया के मुताबिक, ईरान के दो प्रमुख इस्पात संयंत्र हवाई हमलों में क्षतिग्रस्त हो गए। युद्ध में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े प्रमुख स्थलों को भी निशाना बनाया गया। कुवैत के शुवैख बंदरगाह पर भी हमला हुआ।

अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने हाल ही में एक ब्रीफिंग में दावा किया कि अमेरिका ने 10,000 से अधिक लक्ष्यों को नष्ट कर दिया है, जिनमें भूमिगत सुविधाएं और ईरान के रक्षा औद्योगिक आधार के लिए महत्वपूर्ण इमारतें शामिल हैं और 150 से अधिक ईरानी नौसैनिक जहाजों को डुबो दिया है।

वहीं, अमेरिका को हुए नुकसान की बात करें तो पेंटागन की पूर्व अधिकारी एलेन मैकस्ककर ने अनुमान लगाया है कि पहले तीन हफ्तों में ही युद्ध में हुए नुकसान और उसकी भरपाई के लिए अमेरिका को 1.4 से 2.9 अरब डॉलर तक खर्च करने पड़ सकते हैं।

आर्थिक दबाव

भारी बमबारी के बावजूद, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण के माध्यम से पूरी दुनिया पर आर्थिक दबाव बनाने में कामयाबी हासिल की है, यह मार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन करता है। अपने प्रतिद्वंद्वियों से जुड़े जहाजों को रोककर, ईरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति को बाधित कर दिया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं।

शांति के आसार नहीं

वर्तमान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सकारात्मक दिशा में चल रहे शांति वार्ता का हवाला देते हुए ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमलों को 10 दिनों के लिए टाल दिया है।

ईरान ने अमेरिकी प्रस्तावों को एकतरफा और अनुचित बताते हुए खारिज कर दिया है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर संप्रभुता और युद्ध क्षतिपूर्ति सहित अपनी मांगें रखी हैं। इसी बीच, इजरायल ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान पर हमले जारी रहेंगे।

(क्रेडिट- जागरण रिसर्च)