बैंकॉक। इस्लाम छोड़ने पर परिवार द्वारा हत्या की आशंका जता रही Saudi Arab की 18 वर्षीय युवती रहाफ को बड़ी राहत मिली है। उसकी घर वापसी का फैसला टल गया है। सोशल मीडिया पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चले अभियान के बाद संयुक्त राष्ट्र ने युवती को अपने यहां शरण देने का फैसला लिया है। संयुक्त राष्ट्र ने सोमवार शाम सोशल मीडिया अभियान और तमाम अंतरराष्ट्रीय एनजीओ की पहल पर ये फैसला लिया है। मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया ने भी इस संबंध में बयान जारी कर कहा है कि वह युवती को अपने यहां शरण देने पर विचार कर रहा है। इस संबंध में जल्द ही फैसला ले लिया जाएगा। युवती फिलहाल संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार एजेंसियों की देखरेख में है।

धर्म चाहे कोई भी उसकी कट्टरता हमेशा घातक साबित होती है। इसका अंदाजा 18 वर्षीय रहाफ की कहानी से लगाया जा सकता है, जो तीन दिन से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इसकी मदद के लिए सोशल मीडिया पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुहिम चलाई गई थी। युवती ने रविवार से खुद खुद को बैंकॉक के एक होटल में कैद कर रखा था, ताकि उसे सऊदी अरब वापस न भेजा जा सके। युवती ने आशंका जताई थी कि सऊदी अरब वापस जाने पर परिवार वाले उसकी हत्या कर देंगे।

सऊदी अरब की रहने वाली इस 18 वर्षीय युवती का नाम है रहाफ मोहम्मद एम अल्कुनून। उसके पिता सऊदी अरब में ऊंचे सरकारी ओहदे पर हैं। मतलब वह एक अमीर घराने की है। युवती रविवार को सऊदी अरब से भागकर बैंकॉक आ गई थी। उसके परिवार की शिकायत पर बैंकॉक एयरपोर्ट पर उसे पकड़ लिया गया था। थाईलैंड प्रशासन ने उसका पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए थे। उसे जबरन घर वापस भेजने के लिए एक होटल में रखा गया था।

युवती को डर था कि घर वापस जाने पर परिवार वाले उसकी हत्या कर देंगे, लिहाजा उसने खुद को सोमवार शाम तक होटल में कैद रखा था। इसके साथ ही युवती ने ट्विटर के जरिए सोशल मीडिया पर खुद की जान बचाने की मुहिम शुरू की थी। युवती को सोशल मीडिया पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया, समाज सेवी संगठनों और मानविधकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं का साथ मिला। इसके बाद सोमवार शाम उसकी घर वापसी का फैसला निरस्त कर, उसे संयुक्त राष्ट्र में शरण देने का फैसला लिया गया।

दो साल पहले छोड़ चुकी है इस्लाम
रहाफ के अनुसार वह अपने परिवार के आतंक और बंदिशों से परेशान हो चुकी है। वह नास्तिक है और करीब दो साल पहले (2016 में) उसने इस्लाम छोड़ दिया है। तब वह 16 वर्ष की थी। उसके पास परिवार की बंदिशों से बचने के लिए इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं था। अब उसके कट्टर परिवार वाले उसकी हत्या करना चाहते हैं। इसलिए वह अपने घर वापस लौटना नहीं चाहती है।

बाल कटवाने पर छह महीने कैद में रही
एयरपोर्ट पर पकड़े जाने के बाद रहाफ ने ट्वीट किया था ‘मैं अकेली रह सकती हूं। स्वतंत्र और उन सब लोगों से दूर जो मेरी गरिमा का और मेरे औरत होने का सम्मान नहीं करते। परिवार ने मेरे साथ हिंसक व्यवहार किया है। मेरे पास इसके पर्याप्त सबूत हैं।’ रहाफ के ट्वीट पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी संज्ञान लिया था। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और समाचार एजेंसियों से फोन पर हुई बातचीत में रहाफ ने बताया था कि वह नास्तिक है। उसने 16 साल की उम्र में इस्लाम छोड़ दिया था। ये बात उसके परिवार वालों को पता चली तो उसकी हत्या कर दी जाएगी। रहाफ के अनुसार एक बार उसने अपने बाल कटवा लिए थे। इसके बाद उसके सख्त परिवार वालों ने उसे छह महीने तक घर में कैद करके रखा था। अब वह अपने परिवार से छुटकारा पाना चाहती है।

संयुक्त राष्ट्र से मांगी थी मदद
रहाफ ने रविवार और सोमवार को एक के बाद एक कई ट्वीट किए थे और मदद की गुजारिश की थी। साथ ही उसने ट्विटर के जरिए संयुक्त राष्ट्र से भी मदद की अपील की थी। उसने संयुक्त राष्ट्र से शरण की अपील भी की थी। युवती फोन के जरिए वह कई वकीलों, मीडिया संस्थानों और समाज सेवी संस्थाओं के संपर्क में थी। काफी प्रयास के बाद करीब 48 घंटों की जद्दोजहद के बाद संयुक्त राष्ट्र ने उसे शरण देने की स्वीकृति दे दी है।

ऐसे परिवार की कैद से भागी थी रहाफ
रहाफ ने बताया कि वह एक फैमिली हॉलिडे के लिए कार से कुवैत तक आई थी। वहां से सुबह करीब चार बजे वह भाग निकली। उस वक्त उसका पूरा परिवार सो रहा था। रहाफ के अनुसार उसके पास यही अंतिम मौका था, परिवार की कैद से आजाद होने का। रहाफ के अनुसार उसने वहां से भागने के लिए ऑस्ट्रेलिया का टिकट लिया, क्योंकि वहां पर टूरिस्ट वीजा आसानी से मिल जाता है। रहाफ ऑस्ट्रेलिया पहुंचकर अपने लिए शरण की मांग करने वाली थी। हालांकि, कुवैत एयरलाइन से बैंकॉक पहुंचने के बाद उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया। उसके परिवार ने बिना उनकी अनुमति के रहाफ के यात्रा करने की रिपोर्ट दर्ज कराई है।

थाई प्रशासन के दावों को रहाफ ने बताया झूठा
थाईलैंड के मुख्य आव्रजन अधिकारी सुरचाटे हाकपार्न ने न्यूज एजेंसियों से बातचीत में कहा था कि रहाफ रविवार को कुवैत से बैंकॉक पहुंची थी। उसके पास वापसी टिकट समेत यात्रा के लिए अन्य जरूरी दस्तावेज और पैसे नहीं थे। लिहाजा उसे आगे की यात्रा करने से रोक दिया गया। उसे वापस भेजने के लिए हवाई अड्डे पर ही एक होटल में रखा गया है। वह शादी से बचने के लिए अपने परिवार से भाग आयी है। अब उसे सऊदी अरब वापस लौटने पर खतरा महसूस हो रहा है। मामले में थाई प्रशासन, सऊदी अरब दूतावास से बातचीत कर रहा है। वहीं रहाफ का कहना है कि आव्रजन अधिकारी झूठ बोल रहे हैं। वह ऑस्ट्रेलिया में शरण लेने जा रही थी, इसलिए उसे बैंकॉक एयरपोर्ट पर सऊदी और कुवैती दूतावासों के अधिकारियों ने रोक लिया।

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Posted By: Amit Singh