SCO Summit: तियानजिन में भारत-चीन डिप्लोमेसी का नया चैप्टर, क्या है इस शहर की खासियत और इतिहास?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी SCO समिट में भाग लेने चीन के तियानजिन पहुंचे जहां उनका भव्य स्वागत हुआ। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ उनकी मुलाकात महत्वपूर्ण है खासकर ट्रंप के टैरिफ के बाद। तियानजिन ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण शहर है जो उत्तरी चीन के मैदान के उत्तर-पूर्वी छोर पर बसा है। यह चीन का प्रमुख बंदरगाह और तीसरा सबसे बड़ा शहर है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendara Modi) SCO समिट में शामिल होने के लिए चीन के तियानजिन (Tianjin) पहुंच गए हैं। चीन में एयर पोर्ट पर पीएम मोदी का भव्य स्वागत हुआ। रविवार को चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ उनकी मुलाकात होगी। ट्रंप के लगाए गए टैरिफ के बाद दोनों नेताओं की बीच होने वाली ये मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है।
चीन के जिस शहर में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है, वह ऐतिहासिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। चीन के उत्तर में बसा ये तियानजिन शहर हेबेई प्रांत के पूर्व में, उत्तरी चीन के मैदान के उत्तर-पूर्वी छोर पर बसा हुआ है। शंघाई और बीजिंग के बाद ये चीन की तीसरी सबसे बड़ी नगर पालिका वाला शहर है। यह चीन का प्रमुख बंदरगाह भी है।
तियानजिन का समृद्ध इतिहास
ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो तियानजिन मंगोल राजवंश (1206-1368) के समय एक महत्वपूर्ण परिवहन का केंद्र रहा है। 19वीं सदी में जब यूरोपीय समुदाय का यहां आगमन हुआ उससे बहुत पहले ही ये एक महानगरीय केंद्र से रूप में प्रसिद्ध था। साल 1958 से 1967 के बीच तियानजिन हेबेई प्रांत की राजधानी था।
तियानजिन चीन का प्रमुख बंदरगाह
तियानजिन, चीन के प्रमुख बंदरगाह होने के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग हब भी है। यहा हस्तशिल्प उत्पादों, टेरा-कोटा मूर्तियों, हाथ से चित्रित वुडब्लॉक प्रिंट और सी फूड के लिए प्रसिद्ध है। समुद्र से लगा होने के बावजूद यहां की जलवायु महाद्वीपीय है, जिस कारण मौसम में तेजी से बदलाव देखने को मिलता है।
चीन का तीसरा सबसे बड़ा शहर
आबादी की बात करें तो एक करोड़ 47 लाख की आबादी वाला ये शहर चीन का तीसरा सबसे बड़ा शहर है। तियानजिन में ज्यादातर आबादी शहरी इलाकों में रहती है। यहां जनसंख्या घनत्व 6000 से 29,000 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर के बीच है। साल 1949 से पहले ज्यादातर लोग व्यवसाय या सेवा के कामों में लगे हुए थे लेकिन आज करीब आधी आबादी उद्योग धंधों में और बाकी सार्वजनिक सेवाओं में लगे हुए हैं।
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