मनीला, एएनआइ। दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियों के खिलाफ फिलीपींस ने राजनयिक विरोध तेज कर दिए हैं। पिछले पांच वर्षों की तुलना में फिलीपींस ने इस साल चीन के खिलाफ सबसे ज्यादा राजनयिक विरोध दर्ज कराए हैं। रेडियो फ्री एशिया का मानना है कि फिलीपींस के ये कदम चीन के प्रति उसकी सख्ती को दर्शाते हैं। फिलीपींस की समाचार एजेंसी ने विदेश मामलों के विभाग (डीएफए) के हवाले से बताया कि कुल 211 में से 153 राजनयिक पत्राचार चीन की दक्षिण चीन सागर की गतिविधियों से संबंधित थे।

दक्षिण चीन सागर की शांति के लिए खतरा बना चीन

वर्ष 2021 के इन राजनयिक पत्राचार के जरिये दक्षिण चीन सागर में चीनी गतिविधियों का विरोध दर्ज कराया गया। डीएफए ने हाल ही में यह बताया था कि चीन अपने जल क्षेत्र में गश्त कर रहे फिलीपींस के अधिकारियों को उकसाता है। बुधवार को डीएफए ने ट्वीट किया, 'हमने गश्त कर रहे फिलीपींस के अधिकारियों के खिलाफ चीन की 200 से ज्यादा रेडियो चुनौतियों, सायरन व हार्न बजाने जैसी अवैध और उकसावे की गतिविधियों का विरोध किया है। चीन की यह हरकत दक्षिण चीन सागर की शांति व सुरक्षा के लिए खतरा है।'

इसलिए दक्षिण चीन सागर पर चीन ठोंकता रहा है दावा

दरअसल दक्षिण चीन सागर पश्चिमी प्रशांत महासागर का एक सीमांत समुद्र है। चूंकि यह दक्षिण चीन के उत्तरी तटों को छूता है इसलिए इसे दक्षिण चीन सागर कहा जाता है। चीन इसी बात को आधार बनाकर इस पूरे सागर पर दावा करता है। यह पूरा क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से भरा हुआ है। अनुमान है कि दक्षिण चीन सागर में करीब 11 अरब बैरल तेल और 190 खरब घन फीट प्राकृतिक गैस है। यह इंडोचाइनीज प्रायद्वीप, ताइवान के द्वीपों, फिलीपींस, ब्रुनेई, सुमात्र (इंडोनेशिया) से घिरा हुआ है। यही नहीं थाइलैंड की खाड़ी और टोंकिन की खाड़ी भी दक्षिण चीन सागर का हिस्सा हैं। 

Edited By: Krishna Bihari Singh