बीजिंग, एजेंसी। चीन के पश्चिमी क्षेत्र में स्थित शिनजियांग प्रांत किसी बंदीगृह से कम नहीं है। यहां रहने वाले उइगर मुसलमानों पर अत्याचार के कई मामले सामने आ चुके हैं। हजारों उइगरों को प्रशिक्षण देने के नाम पर हिरासत में रखा गया है। उनकी निगरानी के लिए पुलिसबल और सर्विलांस कैमरों के साथ ही कई तरह की हाईटेक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

चीन की कम्युनिस्ट सरकार की यह सख्ती अब केवल शिनजियांग के लोगों तक ही सीमित नहीं है। मध्य एशिया और अन्य देशों से यहां आने वाले लोगों की निजता को दरकिनार करते हुए उनके बारे में कई संवेदनशील जानकारियां इकट्ठा की जा रही हैं। द न्यूयॉर्क टाइम्स और अन्य अखबारों के पत्रकारों की टीम ने इसे उजागर किया है।

उनका कहना है कि चीन सरकार इस्लामिक कट्टरपंथ से लड़ने के नाम पर लोगों के मानवाधिकार और निजता के अधिकार का उल्लंघन कर रही है। प्रांत में सड़क के रास्ते प्रवेश करने वालों के फोन में जबरदस्ती एक एप इंस्टॉल कर उनकी जानकारियों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। सीमा सुरक्षा अधिकारी सीमा पर ही फोन जब्त कर लेते हैं। एप से स्कैन करने के बाद ही फोन लौटाया जाता है।

इस पर चिंता जताते हुए मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वाच के चीनी शोधकर्ता माया वांग ने कहा, 'शिनजियांग ही नहीं पूरे चीन में ही अपनी निजता बचाए रख पाना चुनौतीपूर्ण है। एक बार आप अपनी निजता का अधिकार खो दें तो ना ही आप स्वतंत्रता से अपने धर्म का पालन कर सकते हैं और ना ही अपने विचारों को अभिव्यक्ति कर सकते हैं।

इस्लाम और कुरान से जुड़ी तस्वीरों, वीडियो की होती है जांच
पिछले साल किर्गिजस्तान के रास्ते शिनजियांग आने वाले तीन लोगों ने बताया कि सीमा पर मौजूद चीनी अधिकारियों ने उनके मोबाइल में फंग-साई नाम का एप इंस्टॉल किया था। पत्रकारों की टीम ने इसकी जांच में पाया कि यह एप फोन में मौजूद कॉल रिकार्ड, मैसेज, कॉन्टैक्ट लिस्ट आदि की जानकारियां इकट्ठा करता है। इस एप के कोड में जिहादी वीडियो, कुरान की आयतों, इस्लामिक साहित्य के साथ ही आतंकी संगठनों से संबंधित जानकारियों समेत 73 हजार चीजों की सूची मौजूद है। एप यह सुनिश्चित करता है कि सूची से संबंधित चीजें व्यक्ति के फोन में मौजूद हैं या नहीं।

अभी हालांकि यह पता नहीं चला है कि फोन में ऐसी चीजें मिलने पर क्या कार्रवाई की जा रही है? पत्रकारों का कहना है कि सूची में तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा की तस्वीरें और उनके भाषण भी मौजूद हैं। इससे स्पष्ट है कि चीन सरकार केवल इस्लामिक कट्टरपंथियों ही नहीं बल्कि दलाई लामा से भी किसी भी प्रकार का संबंध रखने वालों की पहचान करना चाहता है।

Posted By: Dhyanendra Singh