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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 29, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Air India Kanishka Bombing: एयर इंडिया विमान विस्फोट के संदिग्ध रिपुदमन सिंह की हत्या के दोषी को उम्रकैद की सजा

Published: Wed, 29 Jan 2025 12:13 PM (GMT+05:30)

एयर इंडिया के विमान को 1985 में बम से उड़ाने के मामले में बरी किए गए रिपुदमन सिंह मलिक की ...और पढ़ें

एयर इंडिया विमान विस्फोट के संदिग्ध रिपुदमन सिंह की हत्या के दोषी को उम्रकैद की हुई सजा
एयर इंडिया विमान विस्फोट के संदिग्ध रिपुदमन सिंह की हत्या के दोषी को उम्रकैद की हुई सजा

एएफपी, ओटावा। एयर इंडिया के विमान को 1985 में बम से उड़ाने के मामले में बरी किए गए रिपुदमन सिंह मलिक की हत्या के एक दोषी टैनर फॉक्स को कनाडा की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने 24 साल के फॉक्स को इस उम्र कैद के दौरान 20 साल तक पैरोल नहीं देने को भी कहा है।

कनाडा में एक कॉन्ट्रैक्ट किलर को मंगलवार (स्थानीय समय) को 1985 के एयर इंडिया बम धमाकों के एक बरी किए गए संदिग्ध की हत्या का दोषी ठहराया गया, जिसमें 331 लोगों की जान चली गई थी।

टैनर फॉक्स को रिपुदमन सिंह मलिक की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, जिसकी जुलाई 2022 में उसके व्यवसाय के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

टैनर फॉक्स और उसके सहयोगी जोस लोपेज़ ने पिछले अक्टूबर में मलिक की दूसरी डिग्री हत्या के लिए दोषी होने की बात स्वीकार की थी।

उन्होंने कबूल किया कि उन्हें पश्चिमी कनाडा के वैंकूवर के एक उपनगर में मलिक की हत्या करने के लिए पैसे दिए गए थे, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि उन्हें पैसे किसने दिए। लोपेज की अगली अदालत में पेशी 6 फरवरी को होनी है।

1985 में हुआ था एयर इंडिया में धमाका

23 जून 1985 को टोरंटो से मुंबई कनाडा से भारत जाने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट 182 आयरिश तट के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें सवार सभी 329 लोग मारे गए। विमान अपने गंतव्य से सिर्फ 45 मिनट की दूरी पर हवा में ही बिखर गया, कोई चेतावनी या आपातकालीन कॉल जारी नहीं की गई। उड़ान को संचालित करने वाला विमान बोइंग 747-237B था, जिसका पंजीकरण VT-EFO था और जिसका नाम सम्राट कनिष्क (Emperor Kanishk) था।

इस हमले को 11 सितंबर, 2001 को संयुक्त राज्य अमेरिका में हुए हमलों तक सबसे घातक विमानन आतंकवाद की घटना माना जाता था। विमान में सवार अधिकांश यात्री कनाडाई नागरिक थे, जो भारत में अपने रिश्तेदारों से मिलने आए थे।

इसके साथ ही, जापान के नारिता हवाई अड्डे पर एक और विस्फोट की खबर मिली, जिसमें दो बैगेज संचालकों की मौत हो गई, जो एयर इंडिया के विमान में सामान लाद रहे थे।

दोनों सूटकेस बम बाद में वैंकूवर में पाए गए, जहाँ बड़ी संख्या में सिख अप्रवासी रहते हैं। कनाडा सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, माना जाता है कि ये बम विस्फोट कनाडा स्थित सिख अलगाववादियों द्वारा पंजाब के स्वर्ण मंदिर में भारतीय सेना के 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' का बदला लेने के लिए किए गए थे।

फॉक्स और लोपेज को किसने दिए थे पैसे?

इस घटना के पांच महीने बाद दो संदिग्धों तलविंदर सिंह परमार और इंद्रजीत सिंह रेयात को गिरफ्तार किया गया। माना जा रहा था कि परमार ही इस हमले का मास्टरमाइंड था, लेकिन सबूतों के अभाव में उसके खिलाफ आरोप हटा दिए गए।

दो आरोपियों- रिपुदमन सिंह मलिक और अजायब सिंह बागरी को 2000 में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन 2005 में अपर्याप्त सबूतों के आधार पर उन्हें भी बरी कर दिया गया।

इंद्रजीत सिंह रेयात एकमात्र व्यक्ति है जिसे साजिश में दोषी ठहराया गया है, बम बनाने और मलिक और बागरी के मुकदमे में झूठ बोलने के लिए।

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