DNA Lab की गलती ने छीनी मां बनने की खुशी, बच्चे के पिता का नाम बताया गलत; मंगेतर से तोड़ना पड़ा रिश्ता
न्यूयॉर्क की 28 वर्षीय महिला ने दो डीएनए लैब्स पर मुकदमा दायर किया है। गलत पितृत्व रिपोर्ट के कारण उसने गर्भपात करवा लिया जिससे उसकी ज़िंदगी और रिश्ता दोनों बर्बाद हो गए। महीनों बाद लैब ने स्वीकारा कि तकनीकी गलती से रिपोर्ट गलत थी। महिला अब इन लैब्स को जवाबदेह ठहराना चाहती है और डीएनए इंडस्ट्री की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रही है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित यॉनकर्स शहर की 28 वर्षीय महिला ने दो डीएनए लैब्स पर मुकदमा दायर किया है। महिला का आरोप है कि पितृत्व जांच (Paternity Test) में हुई गंभीर गलती के कारण उसने गर्भपात करवा लिया, जिससे उसकी जिंदगी बर्बाद हो गई। इस हादसे के चलते उसका लंबे समय से चला आ रहा रिश्ता भी टूट गया।
‘न्यू यॉर्क पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, महिला ने दावा किया है कि ब्रॉन्क्स स्थित विन हेल्थ लैब्स और ओहायो की डीएनए डायग्नोस्टिक्स सेंटर (DDC) की गलत रिपोर्टों ने उसे गहरे भ्रम में डाल दिया। रिपोर्ट्स में यह सामने आया कि गर्भ में पल रहा बच्चा उसके मंगेतर का नहीं है, जिससे टूटकर उसने गर्भपात का फैसला किया।
महिला ने भावुक होकर कहा, “मेरी बेटी 17 अप्रैल को जन्म लेती। मैं आज भी उस गलती का दुख सह रही हूं। मेरे भीतर बहुत सारे भाव हैं जो इन रिपोर्ट्स के कारण जन्मे।”
एक गलती, जिसने सब कुछ बदल दिया
महिला और उसके मंगेतर पिछले कुछ समय से बच्चा पैदा करने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि बीते साल कुछ तनावों के चलते दोनों कुछ वक्त के लिए अलग हो गए थे। इस दौरान महिला ने एक बार के लिए किसी अन्य पुरुष से सुरक्षित शारीरिक संबंध बनाए।
बाद में जब दोनों फिर एक साथ आए और महिला को गर्भवती होने का पता चला, तो उसे पूरा भरोसा था कि बच्चा मंगेतर का ही है। फिर भी मन में संदेह के चलते उसने डीएनए टेस्ट करवाने का फैसला किया।
महिला ने दो बार डीएनए टेस्ट कराया, लेकिन दोनों बार रिजल्ट नहीं मिल पाए। इन कोशिशों में उसने करीब 1,000 डॉलर खर्च कर दिए। फिर अक्टूबर में, महिला और उसके मंगेतर ने ब्रॉन्क्स की विन हेल्थ लैब्स को नए सैंपल भेजे। महिला का दावा है कि यह लैब एक हेयर सैलून के पीछे से चलाई जा रही थी।
रिपोर्ट आई और जिंदगी तबाह सी हो गई
इस बार जो रिपोर्ट आई, उसमें 99.99% की पुष्टि के साथ बताया गया कि गर्भ में पल रहा बच्चा उस दूसरे पुरुष का है। यह रिपोर्ट हैलोवीन से ठीक पहले आई, जब महिला लगभग 20 हफ्तों की गर्भवती थी। यह गर्भपात की वैध समय सीमा (24 हफ्ते) के बेहद करीब था।
महिला का कहना है कि यह जानकर वह पूरी तरह टूट गई थी और उसे मंगेतर को उस एक बार के संबंध की सच्चाई बतानी पड़ी। इससे उसका रिश्ता भी टूट गया।
“वो रोने लगा और पूछा कि अगर मुझे शक था, तो मैंने जेंडर रिवील क्यों किया? मैंने कहा कि मुझे पूरा भरोसा था कि बच्चा उसी का है।” पीड़ित महिला
दो दिन तक चली गर्भपात प्रक्रिया के बाद महिला को संदेह होने लगा कि शायद कुछ गड़बड़ हुई है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
आईटी में हुई खामी से महिला की उजड़ी दुनिया
कुछ महीनों बाद, वेलेंटाइन्स डे के दिन, डीएनए डायग्नोस्टिक्स सेंटर ने महिला से संपर्क कर बताया कि पहली रिपोर्ट में गलती हुई थी। लैब ने इसे एक “आईटी त्रुटि” करार दिया और पुष्टि की कि बच्चा उस दूसरे पुरुष का नहीं था।
इस खुलासे के बाद महिला ने दोनों लैब्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद महिला और उसका मंगेतर एक बार फिर साथ रहने की कोशिश करते रहे, लेकिन आखिरकार मार्च में उनका रिश्ता टूट गया।
डीएनए टेस्टिंग इंडस्ट्री पर उठे सवाल
अब महिला थैरेपी ले रही हैं और इन लैब्स को जवाबदेह ठहराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। महिला के वकील क्रेग फेमिस्टर ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी गलती सुधारने में चार महीने क्यों लग गए।
“जब लोग अपनी ज़िंदगी के इतने अहम फैसले इन रिपोर्ट्स पर आधारित करके ले रहे हैं, तब इतनी देर माफी के काबिल नहीं है।” महिला के वकील
इस मामले में DDC ने एक सामान्य बयान जारी किया, जिसमें कहा गया, “पिछले 30 वर्षों से हमने विश्वसनीय और सटीक परीक्षण सेवा दी है। अगर कोई चिंता जताई जाती है, तो हम तुरंत कार्रवाई करते हैं।” हालांकि, कंपनी ने चल रहे मुकदमे पर कोई सीधी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
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