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यूक्रेन के रास्ते यूरोप तक फिर पहुंचेगी रूसी गैस? अमेरिका तलाश रहा नए विकल्प

Published: Mon, 02 Nov 2026 09:24 AM (IST)

अमेरिका मॉस्को और कीव के बीच ऊर्जा संघर्ष विराम के लिए एक नई योजना पर काम कर रहा है, जिसके ...और पढ़ें

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HighLights

  1. रूसी गैस यूरोप पहुंचाने की नई योजना पर काम कर रहा है अमेरिका।

  2. यूक्रेन के रास्ते गैस आपूर्ति से यूरोप का ऊर्जा संकट कम होगा।

  3. यह पहल मॉस्को-कीव के बीच शांति वार्ता का अहम हिस्सा है।

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। सर्दियों की शुरुआत से पहले मॉस्को और कीव के बीच ऊर्जा संघर्ष विराम यानी एनर्जी सीजफायर कराने के मकसद से अमेरिका एक नई योजना पर काम कर रहा है। इस योजना के तहत यूक्रेन से गुजरने वाली पाइपलाइनों के जरिए रूसी प्राकृतिक गैस को दोबारा यूरोप तक पहुंचाया जा सकता है।

द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका, यूरोप और यूक्रेन के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रस्ताव शांति वार्ता को आगे बढ़ाने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है।

क्या है पाइपलाइन नेटवर्क का खाका?

इस व्यवस्था के तहत एक अमेरिकी मध्यस्थ कंपनी रूसी गैस की बिक्री को संभाल सकती है। इससे यूरोपीय प्रतिबंधों का उल्लंघन भी नहीं होगा और अमेरिकी निवेशकों को इस कारोबार में हिस्सेदारी भी मिल सकेगी।

अमेरिकी दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ ने सितंबर में मॉस्को और कीव यात्रा के दौरान यह प्रस्ताव रखा था। योजना में सोवियत दौर के उस पाइपलाइन नेटवर्क का इस्तेमाल करने का सुझाव है, जो साइबेरिया के उरेंगॉय गैस क्षेत्रों को यूक्रेन के रास्ते यूरोप से जोड़ता है। बदले में, यूक्रेन को गैस ट्रांजिट शुल्क से जरूरी राजस्व मिल सकेगा।

प्रतिबंधों की बाधा पर यूरोप की हिचकिचाहट

इस प्रस्ताव की राह में सबसे बड़ी रुकावट यूरोप का वह फैसला है, जिसके तहत उसने रूसी ऊर्जा पर निर्भरता पूरी तरह खत्म करने का संकल्प लिया है। यूरोपीय संघ (यूई) के कानूनों के मुताबिक, सदस्य देशों को 2027 के अंत तक रूसी प्राकृतिक गैस की खरीद पूरी तरह बंद करनी है।

कई यूरोपीय नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे रूस से आपूर्ति दोबारा शुरू नहीं करना चाहते, क्योंकि वे उसे अपनी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानते हैं। ईयू के एनर्जी कमिश्नर डैन जोर्गेनसन ने भी दोहराया कि शांति समझौता होने के बावजूद रूस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

शांति वार्ता में नए सिरे से आई तेजी

यह प्रस्ताव पिछले महीने तब धीमा पड़ गया था, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के दबाव के बाद यूक्रेन ने रूसी रिफाइनरियों पर हमले रोक दिए थे। यह रोक करीब दो सप्ताह चली, जबकि रूस की तरफ से यूक्रेन के ऊर्जा ढांचों पर हमले जारी रहे।

हालांकि, हाल ही में यूक्रेन द्वारा रूस की तीन बड़ी रिफाइनरियों पर दोबारा हमले शुरू किए जाने के बाद ऊर्जा संघर्ष विराम का मुद्दा फिर गरमा गया है।

अब नवंबर के मध्य में अबू धाबी में अमेरिका, रूस और यूक्रेन के बीच त्रिपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है, हालांकि मॉस्को ने अब तक इस व्यवस्था पर झिझक दिखाई है।

यूरोप के लिए साबित हो सकता है वरदान

व्हाइट हाउस ने इस बात पर भी विचार किया है कि रूस गैस बिक्री से मिलने वाले पैसों का इस्तेमाल युद्ध में न कर सके। इसके तहत यूरोप से मिलने वाले पैसों को किसी तीसरे देश के अधिकार क्षेत्र वाले एस्क्रो यानी सुरक्षित खाते में रखने का प्रस्ताव है।

अमेरिकी समझौता कराने वाले का मानना है कि यूरोपीय बाजार तक पहुंच व्लादिमीर पुतिन को डील स्वीकार करने का बड़ा वित्तीय कारण दे सकती है। साथ ही, कम गैस भंडार के साथ सर्दियों की तैयारी कर रहे यूरोप के लिए भी ऊर्जा लागत घटाने का यह एक जरिया बन सकता है।

नॉर्ड स्ट्रीम की तुलना में यूक्रेनी मार्ग आसान

वाशिंगटन किसी व्यापक समझौते के तहत क्षतिग्रस्त नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइनों को भी बहाल करने के विकल्प पर विचार कर रहा है। हालांकि, सितंबर 2022 में हुए पानी के भीतर धमाकों के कारण नॉर्ड स्ट्रीम 1 और 2 बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और उन्हें दोबारा शुरू करने में लंबा वक्त और कानूनी प्रक्रियाएं लगेंगी।

इसके विपरीत, यूक्रेन से होकर गुजरने वाला पाइपलाइन नेटवर्क तुरंत चालू किया जा सकता है। यह नेटवर्क स्लोवाकिया, ऑस्ट्रिया और जर्मनी तक जाता है और युद्ध के बावजूद जनवरी 2025 तक यहां से सीमित गैस आपूर्ति जारी थी।

यूरोप का गहराता ऊर्जा संकट

यूरोप में ऊर्जा की स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। ईरान से जुड़े टकराव के चलते कतर से आने वाली लिक्विफाइड नेचुरल गैस की खेप खाड़ी में अटक गई है, जिससे यूरोप की ऊर्जा लागत में करीब 100 अरब यूरो का इजाफा हुआ है। इसके अलावा, यूरोप के भूमिगत गैस भंडारण केवल 75% ही भर पाए हैं, जो नौ साल के औसत से कम है।

यूक्रेन के लिए भी यह समझौता राहत भरा हो सकता है, बशर्ते इसके जरिए उसके ऊर्जा ढांचों पर रूसी हमलों पर रोक लगे। अगर ऊर्जा संकट के कारण बिजली गुल रही और मानवीय संकट गहराया, तो यूरोप में शरणार्थियों की एक और लहर आ सकती है।

अमेरिकी पैट्रियट मिसाइलों की सीमित आपूर्ति के बीच यूक्रेन का हवाई रक्षा तंत्र भी दबाव में है, ऐसे में सर्दियों से पहले ऊर्जा संघर्ष विराम दोनों पक्षों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

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