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रूस और यूक्रेन के अलर्ट सिस्टम पर साइबर अटैक, केमिकल रेडिएशन की झूठी चेतावनियों से दहशत

Published: Mon, 02 Nov 2026 09:15 AM (IST)

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में साइबर वॉरफेयर का नया रूप सामने आया है। दोनों देशों के नागरिक सुरक्षा अलर्ट सिस्टम पर बड़े साइबर हमले हुए हैं।

रूस और यूक्रेन के अलर्ट सिस्टम पर साइबर हमला।  (फोटो-जागरण)

रूस और यूक्रेन के अलर्ट सिस्टम पर साइबर हमला। (फोटो-जागरण)

HighLights

  1. यूक्रेन के एयर अलर्ट सिस्टम पर बड़ा साइबर हमला।

  2. रासायनिक व रेडिएशन खतरों की फर्जी चेतावनियां प्रसारित।

  3. रूस के आपातकालीन ऐप पर भी झूठी सूचनाएं फैलाई गईं।

डिजिटल डेस्क, मॉस्को। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में अब साइबर वॉरफेयर का खतरनाक रूप देखने को मिला है। दोनों देशों के नागरिक सुरक्षा और आपातकालीन अलर्ट सिस्टम पर बड़े स्तर पर साइबर हमले किए गए हैं।

यूक्रेन के एयर रेड अलर्ट सिस्टम को हैक कर लोगों के फोन और सड़कों पर लगे लाउडस्पीकरों के जरिए रासायनिक और रेडिएशन के खतरे की फर्जी चेतावनियां प्रसारित कर दी गई।

वहीं रूस के आपातकालीन मंत्रालय के आधिकारिक मोबाइल एप्लिकेशन में भी सेंध लगाकर नागरिकों के बीच झूठीं सूचनाएं फैलाई जा रही हैं।

यूक्रेन के अलर्ट सिस्टम पर हमला

फॉक्स न्यूज और न्यूज एजेंसी AFP के अनुसार, यूक्रेन के एयर रेड अलर्ट सिस्टम को बाहरी हस्तक्षेप के जरिए हैक किया गया। इसके चलते पूरे देश में नागरिकों के मोबाइल फोन पर अचानक केमिकल और रेडिएशन खतरों का अलर्ट आने लगा।

इतना ही नहीं, कीव की सड़कों पर लगे लाउडस्पीकर सिस्टम से भी ऐसी ही भ्रामक घोषणाएं प्रसारित होने लगीं, जिससे जनता में भारी दहशत फैल गई।

यूक्रेन की वायु सेना के प्रवक्ता यूरी इग्नात ने ऐप के हैक होने की पुष्टि की। वायु सेना ने नागरिकों से अपील करते हुए टेलीग्राम पर लिखा, 'एयर अलर्ट ऐप के साथ छेड़छाड़ की गई। विकिरण का कोई खतरा नहीं है, कृपया घबराएं नहीं।'

यूक्रेन के सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशंस ने इस हमले का जिम्मेदार रूस को ठहराया है। बाद में यूक्रेन के डिजिटल परिवर्तन मंत्रालय ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मुख्य अलर्ट सिस्टम को सुरक्षित कर लिया गया है और वह सामान्य मोड में काम कर रहा है।

रूस के आपातकालीन एप पर साइबर अटैक

यूक्रेन के साथ-साथ रूस के आपातकालीन स्थिति मंत्रालय ने टेलीग्राम पर पोस्ट कर पुष्टि की कि उनके आधिकारिक मोबाइल एप्लिकेशन पर बड़ा साइबर हमला हुआ है। यह एप संभावित ड्रोन हमलों और हवाई खतरों की पूर्व चेतावनी देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

मंत्रालय ने बयान में कहा, 'हमलावरों ने एप में सेंध लगाकर जनता के बीच कथित खतरों को लेकर फर्जी और गलत जानकारी फैला दी है।' रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, तकनीकी दल सिस्टम की कमियों को दूर कर सुरक्षा बहाल करने जुटे हैं।

मेलानिया ट्रंप की मध्यस्थता वाला मानवीय युद्धविराम समाप्त

यह डिजिटल हमला ऐसे समय में हुआ है जब पूर्वी खेरसॉन क्षेत्र के ओलेशकी शहर में चला 5 दिवसीय दुर्लभ मानवीय संघर्ष विराम 1 नवंबर को समाप्त हुआ।

अमेरिकी फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप की मध्यस्थता से संभव हुए इस युद्धविराम के तहत लगभग 800 नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया और जरूरी सहायता पहुंचाई गई।

मेलानिया ट्रंप ने दोनों देशों के सहयोग की सराहना की थी, लेकिन युद्धविराम खत्म होते ही तनाव अब साइबर स्पेस तक फैसल गया है।

जेलेंस्की ने की ऊर्जा युद्धविराम की मांग

इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर युद्ध के असर का हवाला देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से हस्तक्षेप की अपील की है।

फॉक्स न्यूज से बातचीत में जेलेंस्की ने कहा कि यदि अमेरिकी नेतृत्व को लगता है कि इस युद्ध से तेल और ऊर्जा की कीमतें प्रभावित हो रही हैं, तो वे दोनों पक्षों के बीच ऊर्जा युद्ध विराम की मांग कर सकते हैं।

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