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    तो इस वजह से रूसी तेल खरीदने के लिए चीन पर नहीं लगाया प्रतिबंध, रूबियो ने बताई अंदर की बात

    Updated: Mon, 18 Aug 2025 11:45 PM (IST)

    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि रूस से तेल खरीदने वाले चीन जैसे देशों पर प्रतिबंध लगाने के गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका भारत और पाकिस्तान के बीच के घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखता है। रूबियो ने कहा कि युद्धविराम का एकमात्र तरीका है कि दोनों पक्ष गोलाबारी बंद करने पर सहमत हों।

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    तो इस वजह से रूसी तेल खरीदने के लिए चीन पर नहीं लगाया प्रतिबंध

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि रूस से तेल खरीदने के लिए चीन जैसे देशों पर प्रतिबंध लगाने के गंभीर परिणाम होंगे। उनकी यह टिप्पणी अमेरिका द्वारा भारतीय आयात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की पृष्ठभूमि में आई है। इसमें रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क भी शामिल है।

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    रूबियो ने फाक्स न्यूज को दिए साक्षात्कार में कहा, चीन रूस से जो तेल खरीद रहा है, उसे परिष्कृत करता है और फिर उसे वैश्विक बाजार में बेच देता है। चीन जा रहे और परिष्कृत हो रहे तेल पर गौर कीजिए। उसमें से बहुत सारा तेल वापस यूरोप को बेचा जा रहा है।

    यूरोप अब भी प्राकृतिक गैस खरीद रहा है। अब कुछ देश ऐसे हैं जो इससे दूरी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन, यूरोप अपने प्रतिबंधों के संबंध में और भी बहुत कुछ कर सकता है। यदि चीन पर प्रतिबंध लगाया जाता है, तो जो कोई भी देश उससे तेल खरीदता है, उसे अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी या कोई वैकल्पिक बाजार ढूंढना पड़ेगा।

    अमेरिकी विदेश मंत्री से पूछा गया था कि क्या रूसी तेल खरीदने के लिए यूरोप पर प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जा रहा है? उन्होंने कहा कि अमेरिकी सीनेट में एक विधेयक है, जिसमें रूसी तेल खरीदने के लिए चीन और भारत पर सौ प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। कई यूरोपीय देश इस बारे में चिंतित हैं कि इसका क्या मतलब हो सकता है।

    हम हर दिन भारत और पाकिस्तान पर नजर रखते हैं- रूबियो

    एनबीसी न्यूज को दिए साक्षात्कार में रूबियो ने कहा कि अमेरिका हर दिन भारत और पाकिस्तान के बीच के घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखता है। रूबियो ने कहा, युद्धविराम का एकमात्र तरीका यह है कि दोनों पक्ष गोलाबारी बंद करने पर सहमत हों। रूस अभी तक इस पर सहमत नहीं हुआ है। युद्धविराम की एक जटिलता यह है कि उसे बनाए रखना होता है, जो बहुत मुश्किल है। मेरा मतलब है, हम हर दिन इस पर नजर रखते हैं कि पाकिस्तान और भारत के बीच क्या हो रहा है? कंबोडिया और थाईलैंड के बीच क्या हो रहा है? बताते चलें, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार यह दावा कर चुके हैं कि कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम की मध्यस्थता की है।

    (समाचार एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ)

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