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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 11, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

संयुक्त राष्ट्र से पाकिस्तान को फिर करारा झटका, कश्मीर पर ठुकराई मध्यस्थता की अपील

By Manish PandeyEdited By:
Published: Wed, 11 Sep 2019 05:57 PM (IST)Updated: Thu, 12 Sep 2019 06:58 AM (IST)

यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि उनका कार्यालय तभी उपलब्ध होगा जब दोनों पक्ष मध्यक्षता का अनुरोध करें।

संयुक्त राष्ट्र से पाकिस्तान को फिर करारा झटका, कश्मीर पर ठुकराई मध्यस्थता की अपील
संयुक्त राष्ट्र से पाकिस्तान को फिर करारा झटका, कश्मीर पर ठुकराई मध्यस्थता की अपील

संयुक्त राष्ट्र, पीटीआइ। कश्मीर के मुद्दे पर बार-बार अपनी बेइज्जती करवा रहे पाकिस्तान को एक बार फिर करारा झटका लगा है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने कश्मीर पर मध्यस्थता की पाकिस्तान की अपील ठुकरा दी है। यूएन का कहना है कि इस मुद्दे पर उसका रुख पहले की तरह है और उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरस ने भारत और पाकिस्तान दोनों से इस मसले को आपसी बातचीत से हल करने की अपील की है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने दैनिक प्रेस वार्ता में बताया कि एंटोनियो गुतेरस ने भारत और पाकिस्तान दोनों के नेताओं से बात की थी। उन्होंने पिछले महीने फ्रांस में जी-7 सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी और पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी से भी बात की थी।

वार्ता के जरिये मसले से निपटने की अपील
सोमवार को गुतेरस ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोधी के अनुरोध पर उनसे कश्मीर मसले पर मुलाकात की थी। दुजारिक ने कहा, 'सभी के लिए उनका संदेश निजी और सार्वजनिक तौर पर एक ही रहा है कि वह भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी संभावित तनाव के प्रति बेहद चिंतित हैं। वह दोनों पक्षों से वार्ता के जरिये इस मसले से निपटने की अपील करते हैं।'

मध्यस्थता पर हमारा रुख हमेशा से एक जैसा
दुजारिक से सवाल किया गया कि क्या इस माहीने के आखिर में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान गुतेरस की योजना कश्मीर मसले पर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने की है क्योंकि इस बैठक के लिए दोनों ही देशों के प्रधानमंत्री वहां पहुंच रहे हैं? इस पर दुजारिक ने कहा, 'आप रुख जानते हैं.. सैद्धांतिक रूप से मध्यस्थता पर हमारा रुख हमेशा से एक जैसा रहा है।' संयुक्त राष्ट्र महासचिव कहते रहे हैं कि उनका कार्यालय तभी उपलब्ध होगा जब दोनों पक्ष इसका अनुरोध करें।

कश्मीर पर भारत का रुख साफ
जबकि भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष साफ कर चुका है कि कश्मीर उसका आंतरिक मसला है और इसमें तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की जरूरत नहीं है। दुजारिक ने आगे कहा, 'और जैसा कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) की उच्चायुक्त कह चुकी हैं कि कश्मीर के हालात का समाधान मानवाधिकारों के पूरे सम्मान के साथ ही किया जा सकता है।'

जिनेवा में पाक को दो-टूक
मालूम हो कि जिनेवा में यूएनएचआरसी के 42वें सत्र में भारत ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाने के अपने संप्रभु फैसले का बचाव किया था। जबकि पाकिस्तान ने इसे गैरकानूनी कृत्य करार देते हुए वैश्विक अधिकार निकाय द्वारा अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की थी। भारतीय विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) विजय ठाकुर सिंह का कहना था कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को हटाना भारत का संप्रभु फैसला था और वह देश के अंदरूनी मामलों में कोई हस्तक्षेप स्वीकार नहीं कर सकता। उन्होंने कश्मीर मसले पर पाकिस्तानी दुष्प्रचार पर निशाना साधते हुए उसके राज्य प्रायोजित आतंकवाद की कड़ी निंदा की थी।

पाक का मकसद फोरम का राजनीतिकरण
यूएनएचआरसी में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के बयान पर जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए विदेश मंत्रालय में प्रथम सचिव विमर्श आर्यन ने कहा था कि भारतीय संविधान में अनुच्छेद-370 एक अस्थायी प्रावधान था। उनका कहना था, 'झूठे विवरणों वाले पाकिस्तान के उन्मादी बयानों से हम कतई आश्चर्यचकित नहीं हैं क्योंकि उनका मकसद इस फोरम का राजनीतिकरण और ध्रुवीकरण करना है। पाकिस्तान समझ चुका है कि हमारे फैसले ने उसके पैरों के नीचे से जमीन खींच ली है और उसके सीमापार आतंकवाद को प्रायोजित करने में बाधा उत्पन्न कर दी है।'