संयुक्त राष्ट्र, प्रेट्र। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के महासचिव एंटोनियो गुतेरस ने मानवाधिकार पर अंतरराष्ट्रीय घोषणा पत्र (यूडीएचआर) को आकार देने में भारतीय समाज सुधारक हंसा जीवराज मेहता की भूमिका की सराहना की है। गुतेरस ने घोषणा पत्र में लैंगिक रूप से संवेदनशील भाषा का इस्तेमाल करवाने के लिए भी उनकी तारीफ की।

यूएन मुख्यालय में यूडीएचआर की 70वीं वर्षगांठ के मौके पर विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए गुतेरस ने कहा, 'मेहता के बिना यह घोषणा पत्र मानवाधिकार का नहीं बल्कि पुरुषों के अधिकार को सुनिश्चित करने वाला होता।' हंसा मेहता समाज सुधारक और शिक्षिका होने के साथ ही सफल लेखिका भी थीं। 1947-1948 के दौरान वह मानवाधिकार को लेकर बनाए गए यूएन कमीशन में भारत की प्रतिनिधि थीं।

वह भारतीय संविधान का निर्माण करने वाली संविधान सभा की भी सदस्य रही थीं। उन्हें खासतौर पर यूडीएचआर के अनुच्छेद-1 में 'सभी पुरुष स्वतंत्र और बराबर हैं' में पुरुष की जगह मानव शब्द का इस्तेमाल करवाने के लिए जाना जाता है। यूडीएचआर 10 दिसंबर, 1948 को पेरिस में यूएन महासभा में लागू किया गया था।

Posted By: Ravindra Pratap Sing