वॉशिंगटन, (एजेंसी)। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के अनुरूप अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने सीरिया पर हमला कर दिया। रासायनिक हथियारों के भंडारों को नष्ट करने के लिए कुल 105 मिसाइल दागी गई। हमले के बाद ट्रंप ने कहा, तीन साथी देशों ने बर्बरता और क्रूरता के खिलाफ कदम उठाया है। ट्वीट कर जानकारी दी गई कि मिशन पूरा हुआ। जबकि सीरिया ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया है।

रूस, चीन और ईरान ने हमले पर विरोध जताया है, तो सऊदी अरब और तुर्की समेत दुनिया के ज्यादातर देशों ने कार्रवाई का समर्थन किया है। राजधानी दमिश्क के नजदीक विद्रोहियों के कब्जे वाले घौटा इलाके में असद की फौजों के रासायनिक हमले से हालात बिगड़े। सात अप्रैल को 70 नागरिकों की मौत के बाद ट्रंप ने जवाबी कार्रवाई की घोषणा की। घोषणा के 48 घंटे के भीतर शनिवार तड़के अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने दमिश्क और होम्स पर मिसाइलों की बरसात कर दी। इसमें वैज्ञानिक शोध केंद्र, उत्पादन इकाई और भंडार गृह को खासतौर पर निशाना बनाया गया।

हमले में कितने लोग मारे गए हैं, यह स्पष्ट नहीं हो सका है। हमले से कई इमारतों में आग लग गई और राजधानी दमिश्क के आसमान में हमले के दस घंटे बाद भी काले धुएं का गुबार छाया रहा। सीरिया के सरकारी सूत्रों के अनुसार जिन इमारतों पर हमला हुआ उन्हें सतर्कता बरतते हुए पहले ही खाली करा लिया गया था, इसलिए ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। सीरिया के वायु रक्षा बल ने दावा किया कि करीब 73 हमलावर मिसाइलों को लक्ष्य भेदने से पहले ही मार गिराया गया।

सीरिया को लेकर बढ़ेगा तनाव

अमेरिका और मित्र देशों के इस हमले ने सीरिया को लेकर दुनिया में तनाव और बढ़ा दिया है। इससे सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल असद को हटाने के लिए छिड़ा युद्ध और तेज होने के आसार हैं। साढ़े सात साल से जारी इस युद्ध में पांच लाख से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।

अत्याधुनिक बी-1 बी के साथ राफेल का इस्तेमाल

हमले में अमेरिका की ओर से जहां अत्याधुनिक बी-1 बी बॉम्बर ने भाग लिया, वहीं फ्रांस की ओर से राफेल व मिराज-2000 और ब्रिटेन के टॉरनाडो लड़ाकू विमानों ने मिसाइल छोड़ी। इन सभी ने सीरिया की सीमा में दाखिल हुए बगैर ही उस पर मिसाइलों की बारिश की। इसके अतिरिक्त अमेरिका ने युद्धपोतों से दमिश्क के बाहरी इलाके में स्थित इमारतों पर टॉमहॉक क्रूज मिसाइल दागीं।

पुतिन ने बुलाई सुरक्षा परिषषद की बैठक

रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने पश्चिमी देशों की कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। पुतिन ने इसे संप्रभुता पर हमला करार दिया है जिससे सीरिया के नागरिकों की मुश्किलें बढ़ेंगी। पुतिन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई है। जबकि खामेनेई ने इसे पश्चिमी देशों का अपराध बताया है जिससे उन्हें कुछ हासिल होने वाला नहीं है।

अचूक अस्त्रों से हुए प्रहार

अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की सेनाओं ने अपने-अपनी अचूक और अत्याधुनिक हथियारों से हमले किए। ये हथियार शामिल थे-यूके टॉरनाडो फाइटर्स ब्रिटेन ने अपने चार विध्वंसक टॉरनाडो फाइटर्स से सीरिया पर क्रूज मिसाइलें दागीं। टॉरनाडो ने साइप्रस स्थित रॉयल एयर फोर्स के बेस कैंप से उड़ान भरी थी। ये चार सौ किलोग्राम विस्फोटक लेकर 400 किमी दूर से हमला कर सकते हैं। दो इंजन वाले ये विमान जमीनी हमले के लिए मुफीद माने जाते हैं। इन्हें हमले के लिए दुश्मन के क्षेत्र में जाने की जरूरत भी नहीं पड़ती है। टॉमहॉक क्रूज मिसाइल युद्ध क्षेत्र में इनका लक्ष्य बदला जा सकता है। यह तेजी से लक्ष्य पर अचूक निशाना लगाती हैं। हालांकि ट्रंप प्रशासन ने इसका खुलासा नहीं किया है कि सीरिया में टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दागी गई हैं।

पिछले साल से ही अमेरिका सीरिया में इन मिसाइलों का उपयोग हमले के लिए कर रहा है। अब तक 58 मिसाइलें दागी गई हैं। यह मिसाइल 18 से 20 फीट लंबी होती है और 880 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ढाई हजार किमी दूर तक मार कर सकती है। यह 1 हजार पाउंड तक विस्फोटक ले जा सकती है। फ्रेंच फ्रिगेट एंड क्रूज मिसाइल फ्रांस नौसेना ने अपने कम से कम तीन अत्याधुनिक फ्रिगेटस से क्रूज मिसाइलें भी दागी हैं। हालांकि इस हमले में कितने फ्रिगेट का उपयोग किया गया है, इसकी जानकारी नहीं मिली है। प्रत्येक फ्रिगेट (जहाज) पर 16 लॉन्च पैड हैं। क्रूज मिसाइलों की मारक क्षमता 620 किलोमीटर के दायरे में है।

राफेल लड़ाकू विमान राफेल लड़ाकू विमानों से सीरिया पर हमले की बात खुद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्वीकारी है। उन्होंने ट्विटर पर फ्रांस के एयर बेस से राफेल के उ़़डान भरने का वीडियो शेयर किया है। राफेल 60 हजार किमी ऊंचाई पर 2130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है। विभिन्न मिसाइलों से लैस किया जाने वाला राफेल एक बार में 24,500 किलो विस्फोट ले जा सकता है।

यूएस बी-1 बमवर्षक

अमेरिका ने अपने खतरनाक बमवषर्षक बी--1 का इस हमले में उपयोग किया है। हालांकि इससे किस तरह की मिसाइलें दागी गई हैं उसका ब्योरा नहीं मिला है। चार इंजन वाला यह बमवषर्षक हवा में ही मिसाइल दाग सकता है। वह अपने साथ 450 किलो विस्फोटक ले जा सकता है।

हमले के आर्थिक असर से भारत ज्यादा चिंतित 

सीरिया पर अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की तरफ से किए गए ताजा हमले के बाद वैश्विक हालात में बदलाव के मद्देनजर भारत ने चिंता जताते हुए सधी प्रतिक्रिया जताई है। भारत ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने का आह्वान किया है। सीरिया के अपने ही नागरिकों पर रासायनिक हमला करने के मामले में भारत का कहना है कि इसकी पूरी जांच संबंधित अंतरराष्ट्रीय एजेंसी से करवाई जानी चाहिए लेकिन फिलहाल सभी पक्षों को धैर्य दिखाना चाहिए ताकि सीरिया के नागरिकों की मुसीबत और न बढ़े। भारत ने सभी पक्षों से कहा है कि वे संयुक्त राष्ट्र के तत्वाधान में बातचीत करके मामले का समाधान करें। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा है कि सभी पक्षों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मामला और न बिगड़े। आर्थिक अनिश्चितता की चिंता सरकारी सूत्रों का कहना है कि सीरिया पर शनिवार को हुए हमले ने साबित कर दिया है कि वैश्विक कूटनीति में स्थिरता नहीं है। आगे हालात कभी भी बिगड़ सकते हैं। इसका भारत पर आर्थिक असर ज्यादा पड़ेगा।

Posted By: Arti Yadav

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