नई दिल्‍ली, आनलाइन डेस्‍क। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 77वें सत्र को संबोधित करते हुए चीन और पाकिस्तान दोनों पड़ोसी मुल्‍कों को निशाने पर लेते हुए तगड़े प्रहार किए। साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार के साथ भारत की स्थायी सीट की मांग की ओर भी ध्‍यान खींचा। भारतीय विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में महीनों से जारी यूक्रेन संघर्ष के मसले पर भारत का पक्ष रखते हुए शांति कायम करने की अपील की। पढ़ें विदेश मंत्री एस. जयशंकर के संबोधन की बड़ी बातें...

आतंकवाद को लेकर चीन और पाक पर निशाना

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद के मसले पर चीन और पाकिस्तान पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि आतंकवाद के किसी भी कृत्य को कतई जायज नहीं ठहराया जा सकता। संयुक्त राष्ट्र में आतंकियों का बचाव करने वाले देश ना तो अपने हितों और ना ही अपनी प्रतिष्ठा को ध्यान में रख रहे हैं।

आतंकवाद नहीं करेंगे बर्दाश्‍त

इसके साथ ही विदेश मंत्री ने आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों को सीधी चेतावनी भी दी। उन्‍होंने कहा कि भारत सीमा पार आतंकवाद से पीड़ित है। भारत आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं करने वाला। इसके साथ ही उन्‍होंने संयुक्त राष्ट्र से आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले मुल्‍कों और आतंकियों को बचाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की।

शांति कायम करने की अपील

भारतीय विदेश मंत्री ने परोक्ष रूप से महीनों से जारी यूक्रेन संघर्ष को खत्‍म करने की अपील की। उन्‍होंने कहा कि भारत शांति का पक्षधर है। भारत किसी भी गतिरोध के समाधान के लिए वार्ता और कूटनीति के रास्ते पर चलने की बात करता है। हमसे अक्‍सर पूछा जाता है कि रूस यूक्रेन युद्ध में किसके साथ हैं तो हमारा जवाब है कि हम शांति के पक्ष में खड़े हैं। हम संयुक्त राष्ट्र चार्टर और उसके सिद्धांतों के पक्ष में हैं।

वैश्विक हालात पर जताई चिंता

जयशंकर ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर महासभा का ध्‍यान आकर्षित कराया। विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया पहले से ही कोरोना जैसी महामारी के चलते आर्थिक सुधार की चुनौतियों से जूझ रही है। अब यूक्रेन युद्ध के चलते हालात और खराब हो गए हैं। विकासशील मुल्‍कों की स्थिति ठीक नहीं है। ईंधन, खाद्य और उर्वरकों की उपलब्धता में कमी ने चुनौतियों को और बढ़ा दिया है।

UNSC में सुधार की जरूरत बताई

जयशंकर ने संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की हिमायत की। इतना ही नहीं उन्‍होंने सुरक्षा परिषद में भारत की स्‍थाई सदस्‍यता की भारत की मांग की ओर इशारा भी किया। विदेश मंत्री ने कहा- चालबाजी से दुनिया की सबसे बड़ी पंचायत यानी यूएनएससी में सुधार को नहीं रोका जा सकता है। संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद समेत दूसरे बहुदेशीय संस्थानों में बदलाव की भारत की मांग पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

भारत का पाकिस्तान पर पलटवार

इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में जब पड़ोसी देशों के साथ शांति संबंध की इच्छा जताते हुए जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उछाला, तो भारत ने भी जबरदस्त पलटवार किया। भारत ने पाकिस्तानी पीएम को आईना दिखाते हुए कहा कि शांति की इच्छा रखने वाला देश कभी भी सीमा पार आतंकवाद को प्रायोजित नहीं करेगा और न ही मुंबई हमले के साजिशकर्ताओं को आश्रय देगा। पाकिस्तान ने 26/11 के हमलावरों के देश में होने की जानकारी विश्व समुदाय के दबाव के बाद दी।

पाकिस्तानी पीएम ने किया मंच का दु‍रुपयोग

जवाब के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव मिजितो विनितो ने कहा, 'यह खेदजनक है कि पाकिस्तानी पीएम ने इस मंच का इस्तेमाल भारत पर झूठे आरोप लगाने के लिए किया। शरीफ ने ऐसा इसलिए किया, ताकि वह अपने देश के गलत काम को छिपा सकें। भारत के खिलाफ उठाए गए कदमों को न्यायोचित ठहरा सकें, जिन्हें दुनिया अस्वीकार्य कर चुकी है।'

पाक पर करारा वार 

विनितो ने कहा कि शांति संबंध की इच्छा रखने वाला देश पड़ोसी राष्ट्र की जमीन पर न तो अन्यायपूर्ण व अस्पष्ट दावा करेगा, न ही उसकी जमीन को कब्जे में लेने या उसे गैर-कानूनी तरीके से खुद में मिलाने का प्रयास करेगा।

अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमले

भारतीय राजनयिक ने कहा, 'हमने आज सिर्फ पड़ोसी के संबंध में ही झूठे दावे नहीं सुने, बल्कि मानवाधिकार, अल्पसंख्यकों के अधिकार और मौलिक सुचिता के बारे में भी झूठ सुना है। जब अल्पसंख्यक समुदायों की हजारों युवतियों का अपहरण एसओपी (मानक परिचालन प्रक्रिया) हो गया हो, तो उनकी मानसिकता को रेखांकित करने के लिए हम क्या अनुमान लगाएं?'

भीषण बाढ़ से जूझ रहा पाकिस्‍तान 

पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा ऐसे समय में उठाया है, जब वह खुद भीषण बाढ़ व खाद्यान्न संकट से जूझ रहा है। शहबाज ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महारासभा को संबोधित करते हुए दोहराया था कि पाकिस्तान भारत के साथ शांति चाहता है। लेकिन, शांति तभी सुनिश्चित हो सकती है जब संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र व सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के तहत कश्मीर मुद्दे का समाधान हो। इससे पहले विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया था।

भारतीय उपमहाद्वीप में हो सकती है शांति, बशर्ते..

भारत ने पाकिस्तान की तरफ इशारा करते हुए बलपूर्वक कहा, 'भारतीय उपमहाद्वीप में शांति, सुरक्षा व प्रगति की इच्छा वास्तविक है। ऐसा निश्चित तौर पर हो सकता है। शर्त है कि सीमा पार से आतंकी गतिविधियां खत्म हों, सरकारें विश्व समुदाय व अपनी जनता के प्रति ईमानदार हों, अल्पसंख्यक समुदायों का उत्पीड़न न हो और सबसे अहम, इस महासभा के समक्ष हम इन वास्तविकताओं को मान्यता दें।' 

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Edited By: Krishna Bihari Singh

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