मोबाइल से लैपटॉप तक... इन गैजेट्स को मिली नए टैरिफ से छूट; जानिए ट्रंप ने क्यों लिया इतना बड़ा फैसला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर बड़ा फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन ने स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स को पारस्परिक टैरिफ से बाहर रखने की योजना बनाई है। कुछ बड़ी टेक कंपनियों ने नए टैरिफ व्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त की थी। इन कंपनियों ने कहा कि टैरिफ बढ़ाने के कारण उनके प्रोडक्ट की कीमतें वैश्विक बाजार में ज्यादा बढ़ जाएंगी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया भर के कई देशों पर पारस्परिक टैरिफ लगाने का एलान कर चुके हैं। उन्होंने नए टैरिफ व्यवस्था को लागू भी किया था। हालांकि, बाद में इस फैसले पर 90 दिनों की रोक लगा दी।
अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया फैसला लिया है। जानकारी के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने स्मार्टफोन, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स को पारस्परिक टैरिफ से बाहर रखने की योजना बनाई है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार देर रात इस फैसले की घोषणा की गई।
कई कंपनियों ने नए टैरिफ व्यवस्था को लेकर जताई थी चिंता
बताया जा रहा है कि ये फैसला कुछ बड़ी टेक कंपनियों की चिंताओं के बाद लिया गया है। कंपनियों ने अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे नए टैरिफ को लेकर चिंता जाहिर की थी। कंपनियों ने कहा था कि टैरिफ के कारण वैश्विक बाजार में उनके प्रोडक्ट की कीमतें अचानक बढ़ सकती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इन कंपनियों के कई प्रोडक्ट चीन में बनते हैं।
इन उपकरणों को टैरिफ से छूट
अमेरिका की ओर से जारी नए आदेश के अनुसार, विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरण इस छूट में शामिल हैं। इसमें सेमीकंडक्टर, सोलर सेल और मेमोरी कार्ड भी शामिल है।
कब से प्रभावी माना जाएगा फैसला?
यूएस कस्टम्स एंड बार्डर प्रोटेक्शन एजेंसी ने एक सूची प्रकाशित की है, जिसमें उन वस्तुओं का उल्लेख है, जिन्हें पारस्परिक शुल्क से बाहर रखा जाएगा। यह फैसला पांच अप्रैल को सुबह 12:01 बजे से प्रभावी माना जाएगा। सूची में 20 श्रेणियों का जिक्र है, जिसमें सभी कंप्यूटर, लैपटॉप, डिस्क ड्राइव और शामिल है। इसमें सेमीकंडक्टर डिवाइस, उपकरण, मेमोरी चिप्स और फ्लैट पैनल डिस्प्ले भी शामिल है।
नोटिस में ट्रंप प्रशासन के इस कदम के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। हालांकि, यह कदम राष्ट्रपति ट्रंप के अधिकतम टैरिफ से एक और कदम पीछे हटने का उदाहरण है। इससे पहले ट्रंप प्रशासन 75 से अधिक देशों पर पारस्परिक शुल्क 90 दिनों के लिए स्थगित रखने की घोषणा कर चुका है। हालांकि, चीन पर इसने 125 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ लगाने का एलान किया था।
बाद में व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि बीजिंग पर पहले लगाए गए 20 प्रतिशत टैरिफ को जोड़कर चीन पर कुल शुल्क 145 प्रतिशत होगा। पारस्परिक टैरिफ से अमेरिका में मंदी की आशंका गहरा गई है और ट्रंप के रिपब्लिकन साथी ही इस योजना का विरोध करने लगे हैं।
'चीन पर निर्भर नहीं रह सकता अमेरिका'
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को पारस्परिक टैरिफ से बाहर रखने की घोषणा के बाद ट्रंप प्रशासन ने शनिवार को स्पष्ट किया कि अमेरिका सेमीकंडक्टर, चिप्स, स्मार्टफोन और लैपटाप जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों के निर्माण के लिए चीन पर निर्भर नहीं रह सकता है।
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने सुनिश्चित किया है कि एपल और एनवीडिया जैसी टेक कंपनियां अमेरिका में खरबों डॉलर का निवेश करें। राष्ट्रपति के निर्देश पर ये कंपनियां जल्द से जल्द अमेरिका में अपना विनिर्माण शुरू करने के लिए तैयार हैं। (इनपुट एजेंसी के साथ)
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