नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। नासा अब मंगल ग्रह पर जल्द पहुंचने के लिए परमाणु रॉकेट भेजने की तैयारी कर रहा है। दरअसल नासा ने पहली बार 60 के दशक में ही परमाणु रॉकेट भेजने की योजना बनाई थी मगर लागत अधिक होने के कारण उस समय इस विचार को त्याग दिया गया मगर अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। साल 2024 में मंगल ग्रह पर परमाणु रॉकेट भेजने की तैयारी की जा रही है। इस बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट स्पूतनीक न्यूज पोर्टल की वेबसाइट पर प्रकाशित की गई है।

मंगल ग्रह पर मानव मिशन की योजना

इस बार नासा का लक्ष्य कुछ अलग है। भौतिकविद बिल एमरिक के नेतृत्व में अपने इंजीनियरों को परमाणु विखंडन द्वारा संचालित पहला रॉकेट इंजन बनाने का काम सौंपा है। हो सकता है कि अब लोग ये तर्क भी दें कि Nuclear Repercussions(परमाणु पुनर्मूल्यांकन) के बारे में अमेरिका चिंता किए बिना ये कर रहा है। इसे अपने आप में खतरनाक भी माना जा रहा है। अमेरिका ने चंद्रमा और मंगल ग्रह पर मानव मिशन की योजना बना रखी है जिसके लिए ये चीजें तय की गई है।

अंतरिक्षयान को ऊपर उठाने में कामयाब

वैज्ञानिकों का कहना है कि परमाणु रिएक्टर अंतरिक्षयान को ऊपर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। इस वजह से परमाणु रिएक्टरों को लॉन्च पैड पर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाना चाहिए। अंतरिक्ष में ऊपर उठने के बाद, एक पारंपरिक रासायनिक रूप से रॉकेट के एक परमाणु-चालित अंतरिक्षयान को कक्षा में ले जाने के लिए सहयोग करते है। माना जाता है कि उन रिएक्टरों द्वारा ऊर्जा का भार मंगल ग्रह की यात्रा के समय को लगभग आधा कर देता है। नासा के एक पूर्व प्रशासक रेक्स गेवेनडेन ने कहा कि कई अंतरिक्ष अन्वेषण समस्याओं के लिए आवश्यक है कि हर समय उच्च-घनत्व की शक्ति उपलब्ध हो और ऐसी समस्याओं का एक वर्ग है जिसके लिए परमाणु ऊर्जा को प्राथमिकता दी जाती है। पॉवर जनरेशन कंपनी BWX टेक्नोलॉजीज के सीईओ ने अगस्त में नेशनल स्पेस काउंसिल को इस बारे में विस्तार से जानकारी दी थी। 

परमाणु रॉकेट का इस्तेमाल करने से अदभूत अवसर मिलेगा

नासा के प्रशासक जिम ब्रिडेनस्टाइन ने परमाणु प्रसार को "गेम-चेंजर" बताया है। उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने कहा कि उक्त रिएक्टरों का उपयोग करने से "एक अद्भुत अवसर मिलता है जिसका संयुक्त राज्य अमेरिका को फायदा उठाना चाहिए। लक्ष्य तक पहुंचने के लिए, एमरिच और उनकी टीम मार्शल स्पेस फ़्लाइट सेंटर में परमाणु रॉकेट इंजन के अंदर चरम स्थितियों का अनुकरण कर रही है। डिजाइन किए गए रिएक्टर अपनी गर्मी का सामना करेंगे और लगभग 4,000 डिग्री फ़ारेनहाइट के चरम तापमान पर संचालन करने में सक्षम होंगे।

न्यूक्लियर थर्मल रॉकेट एलीमेंट एनवायर्नमेंटल सिमुलेटर

इस परियोजना को संक्षिप्त नाम NTREES (न्यूक्लियर थर्मल रॉकेट एलीमेंट एनवायर्नमेंटल सिमुलेटर) के नाम से जाना जाता है। यह अध्ययन करने के लिए एक व्यापक कार्यक्रम एकीकृत किया गया कि कैसे एक परमाणु इंजन को स्पेस लॉन्च सिस्टम, नासा के अगले-जीन रॉकेट के साथ एकीकृत किया जा सकता है। Nuclear Propulsion Venture(परमाणु प्रणोदन उद्यम) के सभी चरणों को पूरा करने के लिए भारी रकम रकम का भी इंतजाम किया जा रहा है। 2017 में, नासा ने एक परमाणु इंजन के लिए आवश्यक ईंधन और रिएक्टर को विकसित करने के लिए BWX टेक्नोलॉजीज को तीन साल में 19 मिलियन डॉलर का ठेका दिया जबकि पिछले दो वर्षों से, कांग्रेस ने इस उद्देश्य के लिए नासा के बजट में कुल 225 मिलियन डॉलर का आवंटन किया है।

नासा 2024 तक भेजेगा परमाणु इंजन

कुछ समय के लिए, नासा अपने नियमों को खत्म करने के प्रयास में लगा रहा है ताकि यह संभव हो सके कि नुक्सेस को लॉन्च किया जा सके। व्हाइट हाउस ज्ञापन ने मांग की कि नासा संबंधित सुरक्षा प्रोटोकॉल विकसित करता है। नासा अंतरिक्ष में पहला परमाणु इंजन 2024 तक भेज सकता है। चंद्रमा और मंगल तक पहुंचने के लिए नासा अपने लक्ष्यों में अकेला नहीं है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ओरियन और नासा के लिए एक सेवा मॉड्यूल का निर्माण कर रही है और इस साल चंद्र अन्वेषण पर सहयोग करने के लिए कनाडा और जापान से प्रतिबद्धता भी प्राप्त की है।

Posted By: Vinay Tiwari

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