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    दुर्लभ बीमारी का शिकार हुआ 21 महीने का हृदयांश, भारतीय-अमेरिकी ने बढ़ाया मदद का हाथ; जान बचाने के लिए 17 करोड़ के इंजेक्शन की जरूरत

    दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे हृदयांश की जिंदगी को बचाने के लिए एक मात्र संभावित उपचार है जोल्जेंस्मा नामक इन्जेक्शन है जो एक उत्कृष्ट जीन चिकित्सा उपचार है जो इस प्रकार की सएमए जैसी बीमारी से ग्रसित बच्चों को जीवन जीने की आशा प्रदान करता है। गौरतलब है मासूम हृदयांश को दुर्लभ बीमारी से बचाने के लिए उनके पिता नरेश शर्मा के पास दो महीने का ही समय है।

    By Agency Edited By: Mohd Faisal Updated: Mon, 04 Mar 2024 06:00 AM (IST)
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    दुर्लभ बीमारी का शिकार हुआ 21 महीने का हृदयांश (फोटो एएनआई)

    एएनआई, वॉशिंगटन। राजस्थान के धौलपुर का रहने वाला 21 महीने का एक मासूम दुर्लभ बीमारी से ग्रसित है। दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे हृदयांश की जान बचाने के लिए बेहद कीमती 17.50 करोड़ रुपये के इंजेक्शन की जरूरत है। बच्चे को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-2 नामक दुर्लभ बीमारी है।

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    हृदयांश की जान बनाने के लिए शुरू की गई मुहिम

    ऐसे में डाक्टरों ने यह भी बता दिया है कि बच्चे को जल्द से जल्द इलाज की आवश्यकता है। लाइफ सेवर जोलजेंस्मा नामक इंजेक्शन का भार उठाने में धौलुपर के मनिया पुलिस थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर नरेश शर्मा असमर्थ है। इसलिए पूरे देश से हृदयांश की जान बनाने के लिए मुहिम शुरू की गई है।

    क्या कहते हैं चिकित्सक

    चिकित्सक की राय के अनुसार, दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे हृदयांश की जिंदगी को बचाने के लिए एक मात्र संभावित उपचार है जोल्जेंस्मा नामक इन्जेक्शन है, जो एक उत्कृष्ट जीन चिकित्सा उपचार है, जो इस प्रकार की सएमए जैसी बीमारी से ग्रसित बच्चों को जीवन जीने की आशा प्रदान करता है।

    मासूम हृदयांश के पास है दो महीने का समय

    गौरतलब है मासूम हृदयांश को दुर्लभ बीमारी से बचाने के लिए उनके पिता नरेश शर्मा के पास दो महीने का ही समय है। घातक बीमारी से ग्रसित हृदयांश का कमर से नीचे का हिस्सा बिल्कुल भी काम नहीं कर रहा है। इस बीमारी का इलाज 24 महीने की उम्र तक ही उपचार किया जाता है। अमेरिका स्थित राजस्थान एलायंस ऑफ नार्थ अमेरिकन (राना) और जयपुर फुट यूएसए के सदस्य नन्हे हृदयांश के लिए योगदान देने और धन जुटाने के लिए आगे आए हैं।

    क्या बोले पिता नरेश शर्मा

    पुलिस सब इंस्पेक्टर नरेश शर्मा कहते हैं कि हमारे बेटे ने 8 महीने का होने के बाद भी चलना शुरू नहीं किया। इसलिए हम उसे जयपुर के एक अस्पताल में ले गए और डॉक्टर ने कहा कि उसकी मांसपेशियां कमजोर हैं और फिजियोथेरेपी का सुझाव दिया। बाद में हम दूसरे अस्पताल में लेकर गए, लेकिन उसकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ।

    चार डॉक्टरों की एक समिति बनाई

    चार डाक्टरों डॉ. शशि साहा, डॉ राज मोदी, डॉ शरद कोठारी, और डॉ विजय आर्य की एक समिति बनाई गई है, जिन्होंने हृदयांश को आवश्यक इंजेक्शन प्रदान करने के रास्ते तलाशने के लिए नोवार्टिस (दवा निर्माता) के साथ काम करना शुरू कर दिया है। राना के अध्यक्ष प्रेम भंडारी ने बताया कि हम इस बच्चे के लिए संभावित लाभों के बारे में आशावादी हैं।